मुख्य तथ्य
- विशेषज्ञ
- नादिया अलीभाई, प्रिंसिपल ऑस्टियोपैथ, बायोम बाय कॉरिंथिया लंदन
- स्रोत
- HELLO! वेबसाइट पर लाइव प्रश्नोत्तर सत्र
- मुख्य सुझाव
- हर 30-60 मिनट में हिलें, स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखें, और नियमित व्यायाम करें
- गर्मी में हाइड्रेशन
- पानी में आधा चम्मच सेल्टिक नमक और आधे नींबू का रस मिलाकर पिएं
- सोने की स्थिति
- करवट लेकर सोएं, घुटनों के बीच तकिया रखें
- चेतावनी
- गंभीर दर्द, सुन्नता, या मूत्राशय नियंत्रण खोने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें
पृष्ठभूमि
सेलिब्रिटी ऑस्टियोपैथ नादिया अलीभाई ने HELLO! वेबसाइट पर लाइव प्रश्नोत्तर सत्र में पाठकों के सवालों के जवाब दिए। वे लंदन के बायोम बाय कॉरिंथिया में प्रिंसिपल ऑस्टियोपैथ के रूप में कार्यरत हैं और नियमित रूप से टेलीविजन पर दिखाई देती हैं तथा HELLO! के लिए मासिक कॉलम लिखती हैं।
अलीभाई ने कहा कि शरीर की देखभाल वैसे ही करनी चाहिए जैसे हम अपनी कार की करते हैं—टूटने से पहले ही सर्विस करा लेते हैं। उन्होंने बताया कि दर्द न होने पर भी ऑस्टियोपैथ के पास जाना फायदेमंद हो सकता है, और कुछ लोग हर चार से आठ सप्ताह में 'रखरखाव' के लिए आते हैं।
वर्तमान स्थिति
गर्मी के मौसम में जोड़ों और मांसपेशियों की समस्याओं के बारे में पूछे गए सवाल पर अलीभाई ने कहा कि हाइड्रेटेड रहना बेहद जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि एक गिलास पानी में आधा चम्मच सेल्टिक समुद्री नमक और आधे नींबू का रस मिलाकर पीने से इलेक्ट्रोलाइट्स बने रहते हैं। हालांकि, उच्च रक्तचाप या किडनी रोग वाले लोगों को नमक बढ़ाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
उन्होंने तरबूज, जामुन, खीरा, संतरे और पत्तेदार सलाद जैसे पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने की सलाह दी। साथ ही, सुबह या शाम के ठंडे समय में हल्की एक्सरसाइज करने और सूजे हुए जोड़ों पर ठंडी सिकाई करने की सलाह दी। उन्होंने ढीले-ढाले प्राकृतिक कपड़े पहनने और आरामदायक जूते पहनने पर जोर दिया।
| पहलू | सुझाव |
|---|---|
| हाइड्रेशन | पानी में नमक और नींबू मिलाकर पिएं |
| आहार | तरबूज, जामुन, खीरा, संतरे, पत्तेदार सलाद |
| व्यायाम | सुबह या शाम को हल्की सैर, स्ट्रेचिंग, तैराकी |
| जोड़ों की सूजन | ठंडी सिकाई करें |
| कपड़े | लिनन, बांस, भांग, कपास जैसे प्राकृतिक रेशे |
| जूते | चौड़े पंजे वाले, आरामदायक जूते |
प्रभाव
अलीभाई ने बताया कि पीठ दर्द अक्सर मांसपेशियों में खिंचाव या अकड़न के कारण होता है और हल्की गतिविधि, आराम और समय से ठीक हो जाता है। उन्होंने सलाह दी कि यदि दर्द गंभीर हो, बढ़ रहा हो, कुछ हफ्तों में ठीक न हो, रात में जगाए या दैनिक जीवन प्रभावित करे तो जांच करानी चाहिए। पैरों में सुन्नता, कमजोरी, मूत्राशय या आंत पर नियंत्रण खोना, अस्पष्ट वजन घटना, बुखार या गंभीर चोट के बाद दर्द होने पर तुरंत चिकित्सा सलाह लें।
लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए उन्होंने कहा कि शरीर आठ घंटे एक ही स्थिति में रहने के लिए नहीं बना है। उन्होंने बार-बार हिलने-डुलने, स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखने और नियमित व्यायाम की सलाह दी। सोते समय करवट लेकर सोने और घुटनों के बीच तकिया रखने से रीढ़ को आराम मिलता है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि लोग इन सुझावों का पालन करते हैं, तो उनकी मुद्रा में सुधार हो सकता है और जोड़ों का दर्द कम हो सकता है। हालांकि, यदि दर्द बना रहता है या बढ़ता है, तो विशेषज्ञ से जांच कराना आवश्यक हो सकता है।
अलीभाई ने कहा कि हल्के स्कोलियोसिस वाले किशोरों के लिए फिजियोथेरेपी जारी रखना महत्वपूर्ण है, और ऑस्टियोपैथी फिजियोथेरेपी के साथ मिलकर काम कर सकती है। यदि वक्रता बढ़ती है, तो नियमित निगरानी और स्वास्थ्य टीम के साथ समन्वय आवश्यक होगा।
जोड़ों के दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए, यदि वे हल्की गतिविधि और आहार में बदलाव करते हैं, तो उन्हें कुछ राहत मिल सकती है। लेकिन यदि दर्द गंभीर है, तो अपनी स्वास्थ्य टीम से बात करना और दवा या उपचार योजना में बदलाव पर विचार करना उचित होगा।
स्रोत: hellomagazine.com



