मुख्य तथ्य
- कानून बनने की तारीख
- 11 जुलाई 2026
- प्रभावी तारीख
- 7 जनवरी 2027
- प्रतिबंध की सीमा
- 350 या अधिक सिंगल-फैमिली होम
- परिभाषा
- दो या उससे कम आवासीय इकाइयों वाली संरचना
- अपवाद
- नए निर्मित, बिल्ड-टू-रेंट, रेनोवेट-टू-रेंट, गृह स्वामित्व कार्यक्रम आदि
- अतिरिक्त दायित्व
- वार्षिक सूचना HUD को, किरायेदारों को लिखित सूचना
पृष्ठभूमि
21वीं सदी ROAD टू हाउसिंग एक्ट 11 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बिना कानून बन गया। यह कानून आवास आपूर्ति बढ़ाने और गृह स्वामित्व के अवसरों को विस्तार देने के लिए विधायी प्रयासों का हिस्सा है। यह अधिनियम सिंगल-फैमिली होम बाजार में बड़े संस्थागत निवेशकों की भूमिका को सीमित करता है।
यह अधिनियम 180 दिनों की अवधि के बाद 7 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा। इसका उद्देश्य बड़े संस्थागत निवेशकों द्वारा सिंगल-फैमिली होम की खरीद पर रोक लगाना है, हालांकि कुछ अपवादों के साथ। मौजूदा पोर्टफोलियो पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
वर्तमान स्थिति
अधिनियम के अनुसार, बड़े संस्थागत निवेशक वे संस्थाएं हैं जो सिंगल-फैमिली होम में निवेश, स्वामित्व, किराये, प्रबंधन या धारण के व्यवसाय में लगी हैं और जिनके पास अधिनियम की तारीख के बाद कुल मिलाकर कम से कम 350 सिंगल-फैमिली होम का निवेश नियंत्रण है। यह परिभाषा निवेश फंड, निगम, साझेदारी, एलएलसी, संयुक्त उद्यम, एसोसिएशन या अन्य लाभकारी कानूनी संस्थाओं पर लागू होती है।
अधिनियम में सिंगल-फैमिली होम को ऐसी संरचना के रूप में परिभाषित किया गया है जिसमें दो या उससे कम आवासीय इकाइयां हों, जिनमें से प्रत्येक एक ही परिवार के आवासीय उपयोग के लिए हो। निर्मित घर (मैन्युफैक्चर्ड होम) इस परिभाषा से बाहर हैं। खरीद की परिभाषा व्यापक है, जिसमें विलय, अधिग्रहण, निर्माण, फौजदारी या थोक खरीद शामिल है।
| अपवाद | विवरण |
|---|---|
| नए निर्मित/नवीनीकृत/किराये में परिवर्तित घर | बिक्री के लिए, बिना किराये के |
| बिल्ड-टू-रेंट कार्यक्रम | नए निर्मित घर, किराये के लिए |
| रेनोवेट-टू-रेंट कार्यक्रम | नवीनीकरण के बाद किराये के लिए |
| गृह स्वामित्व कार्यक्रम | रेंट-टू-ओन, सकारात्मक किराया रिपोर्टिंग, वित्तीय सहायता |
| गृह स्वामित्व बढ़ाने वाले कार्यक्रम | पहली पसंद का अधिकार, 30-दिन की पहली नज़र अवधि |
| अन्य बड़े संस्थागत निवेशकों से खरीद | यदि घर अधिनियम की तारीख पर स्वामित्व में था या अनुपालन में खरीदा गया था |
| गैर-कवर निवेशकों से खरीद | प्रभावी तारीख के दो साल के भीतर |
| आयु-प्रतिबंधित समुदाय | 55 वर्ष या उससे अधिक आयु के निवासी |
प्रभाव
इस कानून का सबसे बड़ा प्रभाव उन बड़े संस्थागत निवेशकों पर पड़ेगा जो 350 या उससे अधिक सिंगल-फैमिली होम रखते हैं या इस सीमा के करीब पहुंच रहे हैं। उन्हें 180 दिनों की अवधि में अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी योजनाबद्ध खरीद अपवादों के अंतर्गत आती है या नहीं।
अधिनियम के तहत कई अपवाद दिए गए हैं, जिनमें नए निर्मित, नवीनीकृत या किराये में परिवर्तित घरों की बिक्री, बिल्ड-टू-रेंट और रेनोवेट-टू-रेंट कार्यक्रम, गृह स्वामित्व कार्यक्रम, आयु-प्रतिबंधित समुदाय, और अन्य बड़े संस्थागत निवेशकों से खरीद शामिल हैं। इन अपवादों का लाभ उठाने के लिए निवेशकों को नियमों का पालन करना होगा।
इसके अतिरिक्त, बड़े संस्थागत निवेशकों को सालाना आवास और शहरी विकास सचिव (HUD) को अपनी स्थिति और नियंत्रित घरों की संख्या की सूचना देनी होगी। उन्हें किरायेदारों को संघीय रूप से स्थापित आउटरीच संसाधन के बारे में लिखित सूचना भी देनी होगी।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि नियामक एजेंसियां स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करती हैं, तो कानून के कार्यान्वयन में अधिक स्पष्टता आ सकती है। ट्रेजरी सचिव, HUD, संघीय आवास वित्त एजेंसी और प्रतिभूति और विनिमय आयोग के परामर्श से नियम बनाएंगे, जिससे कुछ खुले मुद्दों का समाधान हो सकता है।
यदि बड़े संस्थागत निवेशक अपवादों का लाभ उठाते हैं, तो वे कुछ श्रेणियों में खरीद जारी रख सकते हैं, जैसे बिल्ड-टू-रेंट कार्यक्रम। हालांकि, यदि वे नियमों का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
यह स्पष्ट नहीं है कि यह कानून आवास बाजार पर किस हद तक प्रभाव डालेगा, लेकिन इससे छोटे निवेशकों और व्यक्तिगत घर खरीदारों को अधिक अवसर मिल सकते हैं। फिर भी, यह अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी कि इसका दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा।
स्रोत: mondaq.com



