मलावी कांग्रेस पार्टी (MCP) और उसके तीन सांसदों द्वारा दो वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के खिलाफ दायर अवमानना मामले की सुनवाई 17 अगस्त से शुरू होगी। यह मामला निर्वाचन आयोग (MEC) के मुख्यालय को लेकर विवाद से जुड़ा है।
MCP ने मुख्य सचिव जस्टिन सैदी और भूमि एवं आवास विकास मंत्री चिमवेम्वे चिपुंगु पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अदालत के आदेश के बावजूद लिलोंग्वे के न्जेवा में MEC द्वारा उपयोग किए जाने वाले गोदाम के किराए का भुगतान सुनिश्चित नहीं किया।
विवाद की शुरुआत राष्ट्रपति पीटर मुथारिका के उस आदेश से हुई, जिसमें MEC को अपना कार्यालय ब्लांटायर स्थानांतरित करने को कहा गया था। MCP और उसके विधायकों ने इसका विरोध किया और 5 जून 2026 को उच्च न्यायालय ने स्थानांतरण पर रोक लगाते हुए सरकार को लिलोंग्वे परिसर का किराया जारी रखने का आदेश दिया।
MCP के नवीनतम आवेदन में कहा गया है कि सैदी और चिपुंगु ने 'जानबूझकर उपेक्षा' करते हुए लिलोंग्वे के प्लॉट नंबर 13/116 स्थित कैपिटल डेवलपमेंट लिमिटेड परिसर के पट्टे के नवीनीकरण की प्रक्रिया में देरी की। MCP के कानूनी मामलों के निदेशक जॉर्ज कादज़िपातिके ने शपथ पत्र में इसे अदालत के आदेश की खुली अवहेलना बताया।
याचिका MCP के साथ तीन सांसदों – इमैनुएल चंबुलान्यिना जेरे (मज़िम्बा साउथ), अब्राहम म्वाखवावा (करोंगा लुफिल्या) और डैनियल म्वान्योंगो चिटोन्या (करोंगा टाउन) – द्वारा दायर की गई है। अदालत को यह तय करना है कि क्या सैदी और चिपुंगु निर्वाचन आयोग के लिलोंग्वे परिसर के मामले में अवमानना के दोषी हैं।
स्रोत: allafrica.com



