मुख्य तथ्य
- विकास सहायता (एनडीए)
- 14.85 लाख करोड़ रुपये से अधिक
- विकास सहायता (यूपीए)
- 2.80 लाख करोड़ रुपये
- अवधि (एनडीए)
- पिछले 11 वर्ष
- अवधि (यूपीए)
- 2004-2014
- बैठक स्थल
- बेगूसराय, रिफाइनरी टाउनशिप मैदान
- शामिल जिले
- 10 जिले (बेगूसराय सहित)
पृष्ठभूमि
वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि एनडीए सरकार ने पिछले 11 वर्षों में बिहार को विकास परियोजनाओं और कार्यों के लिए 14.85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की है। उन्होंने यह बात बेगूसराय में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित करते हुए कही।
शाह ने कहा कि 2004 से 2014 तक यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान बिहार को केवल 2.80 लाख करोड़ रुपये मिले थे। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
वर्तमान स्थिति
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि किसी भी भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि एसआईआर मतदाता सूची को घुसपैठियों से मुक्त करने का अभियान है। वरिष्ठ भाजपा नेता ने जोर देकर कहा कि घुसपैठियों को किसी भी परिस्थिति में वोट डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी, क्योंकि यह भाजपा की दृढ़ प्रतिबद्धता है।
उन्होंने कहा कि राजद और कांग्रेस अपनी वोट बैंक की राजनीति के कारण मतदाता सूची से घुसपैठियों को हटाने का विरोध कर रहे हैं। इससे पहले दिन में, शाह बेगूसराय पहुंचे, जहां उन्होंने रिफाइनरी टाउनशिप मैदान में आयोजित बैठक में भाग लिया। बेगूसराय के अलावा, कुल 10 जिलों-पटना ग्रामीण, पटना महानगर, बाढ़, नालंदा, शेखपुरा, मुंगेर, जमुई, लखीसराय और खगड़िया-के नेता और कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।
| शासन | अवधि | सहायता (लाख करोड़ रुपये) |
|---|---|---|
| एनडीए | पिछले 11 वर्ष | 14.85 से अधिक |
| यूपीए | 2004-2014 | 2.80 |
प्रभाव
बैठक में केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक, एमएलसी और विभिन्न स्तरों के पार्टी पदाधिकारी मौजूद थे। यह बैठक आगामी चुनावों की तैयारी और पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए बुलाई गई थी। शाह ने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक सक्रिय रहने का आग्रह किया।
शाह ने दिन में पहले रोहतास जिले के देहरी ऑन सोन में भी पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को संबोधित किया। इस क्षेत्रीय बैठक का उद्देश्य पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना और चुनावी तैयारियों को पुख्ता करना है, जिसका सीधा असर आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि एसआईआर अभियान को लेकर राजनीतिक दलों के बीच विवाद जारी रहता है, तो आगामी चुनावों में यह मुद्दा प्रमुखता से उभर सकता है। भाजपा द्वारा घुसपैठियों को वोट देने से रोकने की प्रतिबद्धता दोहराए जाने से विपक्षी दलों के साथ टकराव बढ़ सकता है।
यदि सरकार एसआईआर को पारदर्शी तरीके से लागू करती है और किसी भारतीय नागरिक का नाम नहीं हटाया जाता है, तो इससे भाजपा को राजनीतिक लाभ हो सकता है। हालांकि, यदि विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर जनता को गुमराह करने में सफल रहता है, तो स्थिति भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि इस अभियान का चुनावी नतीजों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
स्रोत: News On AIR



