मुख्य तथ्य
- मुद्रास्फीति लक्ष्य
- 4 प्रतिशत ±2 प्रतिशत सहनशीलता बैंड
- नवीनीकरण अवधि
- मार्च 2031 तक पांच वर्ष
- अधिसूचना तिथि
- 25 मार्च 2026
- वक्ता
- डॉ. पूनम गुप्ता, डिप्टी गवर्नर, RBI
- कार्यक्रम
- NCAER, नई दिल्ली में संयुक्त संगोष्ठी
- वैश्विक आईटी देश
- 48 देश (14 उन्नत, 34 उभरती और विकासशील)
पृष्ठभूमि
भारत में मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (आईटी) ढांचे को मई 2016 में आरबीआई अधिनियम, 1934 में संशोधन के साथ औपचारिक रूप से स्थापित किया गया था। आरबीआई को मौद्रिक नीति संचालन की जिम्मेदारी दी गई, जिसका प्राथमिक उद्देश्य 'विकास के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना' है।
आरबीआई अधिनियम की धारा 45ZA के अनुसार, केंद्र सरकार बैंक के परामर्श से हर पांच साल में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के संदर्भ में मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारित करती है। सरकार ने शुरुआत में 2016-2021 के लिए 4 प्रतिशत का लक्ष्य ±2 प्रतिशत सहनशीलता बैंड के साथ अधिसूचित किया था।
मार्च 2021 में समीक्षा के बाद, लक्ष्य 2021-2026 के लिए बरकरार रखा गया। दूसरी वैधानिक समीक्षा में, 25 मार्च 2026 की राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से, ढांचे को मार्च 2031 तक पांच साल के लिए फिर से बढ़ा दिया गया है।
वर्तमान स्थिति
डॉ. पूनम गुप्ता ने 5 मई 2026 को नई दिल्ली में एनसीएईआर में एक संयुक्त संगोष्ठी में यह व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने 25 मार्च 2026 को राजपत्र अधिसूचना जारी कर मौजूदा मुद्रास्फीति लक्ष्य 4 प्रतिशत ±2 प्रतिशत सहनशीलता बैंड को पांच साल के लिए बढ़ा दिया है, जिससे यह मार्च 2031 तक प्रभावी रहेगा।
यह नवीनीकरण, जिसमें ढांचे की सभी विशेषताओं को बरकरार रखा गया है, न केवल निरंतरता पर बल्कि एक दशक के अनुभव से सीखे गए सबक और भविष्य में किए जा सकने वाले सुधारों पर भी विचार करने का अवसर देता है।
मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) को मुद्रास्फीति लक्ष्य प्राप्त करने के लिए आवश्यक नीतिगत रेपो दर तय करने की जिम्मेदारी दी गई है। एमपीसी के निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं, और गवर्नर के पास बराबरी की स्थिति में निर्णायक वोट होता है, हालांकि पिछले दशक में इस प्रावधान का उपयोग कभी नहीं करना पड़ा।
| श्रेणी | देशों की संख्या |
|---|---|
| उन्नत अर्थव्यवस्थाएं | 14 |
| उभरती बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं | 34 |
| कुल | 48 |
प्रभाव
मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचे के तहत, आरबीआई प्रत्येक बैठक के बाद एमपीसी द्वारा अपनाए गए प्रस्ताव को प्रकाशित करता है, 14 दिन बाद व्यक्तिगत सदस्यों के विचारों की कार्यवाही जारी करता है, और हर छह महीने में मौद्रिक नीति रिपोर्ट (एमपीआर) प्रकाशित करता है। ये उपाय पारदर्शिता और संचार सुनिश्चित करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय साक्ष्य बताते हैं कि मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण अपनाने वाले देशों में मुद्रास्फीति कम और अधिक स्थिर रही है। वर्तमान में 48 देश (14 उन्नत अर्थव्यवस्थाएं और 34 उभरती बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं) इस ढांचे के तहत काम करते हैं।
भारत ने 2016 में इस ढांचे को अपनाया था। अब तक किसी भी देश ने मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण को नहीं छोड़ा है, हालांकि देशों ने अपनी आर्थिक संरचनाओं के अनुसार समय-समय पर अपने ढांचे में संशोधन किया है।
भविष्य का परिदृश्य
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि 2031 में अगली समीक्षा के समय कुछ मुद्दों पर विचार किया जा सकता है। यदि मुद्रास्फीति लक्ष्य को बरकरार रखा जाता है, तो नीति में निरंतरता बनी रहेगी, लेकिन यदि आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव होता है, तो लक्ष्य या सहनशीलता बैंड में संशोधन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव बताता है कि देश अपनी आर्थिक संरचनाओं के अनुसार ढांचे में बदलाव करते रहे हैं। भारत में भी, यदि मुद्रास्फीति की गतिशीलता में महत्वपूर्ण बदलाव आते हैं, तो ढांचे में सुधार की आवश्यकता हो सकती है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अगली समीक्षा में कौन से विशिष्ट बदलाव किए जाएंगे। यह काफी हद तक घरेलू और वैश्विक आर्थिक स्थितियों पर निर्भर करेगा।
स्रोत: Reserve Bank of India
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मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण अपनाने वाले देशों की संख्या
कुल48
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| श्रेणी | देशों की संख्या |
|---|---|
| उन्नत अर्थव्यवस्थाएं | 14 |
| उभरती बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं | 34 |
| कुल | 48 |
स्रोत:Reserve Bank of India स्रोत-समर्थित



