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आंध्र प्रदेश में बाघ 'एक्सप्लोरर' की तलाश तेज, पशुओं पर हमले जारी

आंध्र प्रदेश वन विभाग ने गोदावरी क्षेत्र में छह माह से विचरण कर रहे नर बाघ 'एक्सप्लोरर' को पकड़ने के लिए अभियान तेज कर दिया है। करीब 100 कर्मी, थर्मल ड्रोन और ट्रैप कैमरों की मदद से तलाश जारी है।

आंध्र प्रदेश वन विभाग ने गोदावरी क्षेत्र में छह माह से विचरण कर रहे नर रॉयल बंगाल टाइगर 'एक्सप्लोरर' को ट्रैक करने और सुरक्षित पकड़ने के प्रयास तेज कर दिए हैं। यह बाघ पिछले छह माह से इस क्षेत्र में सक्रिय है और पशुओं पर हमलों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

वन विभाग के अनुसार, एलुरु, राजमहेंद्रवरम, काकीनाडा और चिंतूर वन प्रभागों में पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास करीब 100 वन कर्मियों के साथ वन्यजीव विशेषज्ञ, थर्मल ड्रोन, ट्रैप कैमरे और रेडियो-कॉलर निगरानी प्रणाली तैनात की गई है।

पिछले सप्ताह पूर्वी गोदावरी जिले के गोपालपुरम मंडल में बाघ की मौजूदगी की सूचना के बाद निगरानी बढ़ाई गई। 30 जुलाई को बाघ ने एलुरु जिले के कोय्यालगुडेम मंडल के मंगापति देवी पेटा गांव में दो गायों को मार डाला। अधिकारियों ने बताया कि बाघ पश्चिम गोदावरी जिले के जलेरू क्षेत्र में भी देखा गया है, जहां बछड़ों के मारे जाने की सूचना है।

एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में 60 कर्मियों की पांच टीमें तैनात की गई थीं, जिन्हें बढ़ाकर अब 100 कर दिया गया है। पुणे से वन्यजीव विशेषज्ञ और थर्मल ड्रोन टीमें भी तलाश में जुटी हैं। अधिकारियों के अनुसार, 'एक्सप्लोरर' को पहली बार फरवरी में पापीकोंडालु क्षेत्र में देखा गया था। माना जा रहा है कि यह महाराष्ट्र के ताडोबा-अंधारी बाघ अभयारण्य से दिसंबर 2025 में निकला और 650 किलोमीटर से अधिक की यात्रा करते हुए महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना होते हुए आंध्र प्रदेश पहुंचा।

स्रोत: hindustantimes.com

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