मुख्य तथ्य
- वक्ता
- डॉ. पूनम गुप्ता, डिप्टी गवर्नर, RBI
- आयोजन
- कोलंबिया इंडिया इकोनॉमी समिट 2026, कोलंबिया विश्वविद्यालय
- तारीख
- 11 मई 2026 (व्याख्यान 11 अप्रैल 2026 को दिया गया)
- GDP वृद्धि (2022-23 से 2025-26)
- 7.7 प्रतिशत
- प्रति व्यक्ति आय (2024)
- लगभग 2700 अमेरिकी डॉलर
- IMF अनुमान (2030)
- प्रति व्यक्ति आय 4346 अमेरिकी डॉलर
पृष्ठभूमि
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की डिप्टी गवर्नर डॉ. पूनम गुप्ता ने 11 मई 2026 को कोलंबिया विश्वविद्यालय में आयोजित 'कोलंबिया इंडिया इकोनॉमी समिट 2026' में व्याख्यान दिया। इस व्याख्यान में उन्होंने भारत की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख पहलुओं, राज्यों के विकास प्रक्षेपवक्र और 2047 तक समृद्ध अर्थव्यवस्था बनने की संभावनाओं पर चर्चा की।
डॉ. गुप्ता ने अपने संबोधन की शुरुआत में प्रो. अरविंद पनगड़िया को आमंत्रण के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि उनका व्याख्यान तीन भागों में विभाजित है: पहले में पिछले चार दशकों की वृद्धि की प्रमुख विशेषताएं, दूसरे में राज्यों की वृद्धि के प्रमुख लक्षण, और तीसरे में 2047 तक समृद्धि प्राप्त करने के लिए इनसे निकलने वाले निहितार्थ।
वर्तमान स्थिति
डॉ. गुप्ता ने बताया कि 1980 के दशक से भारत की आर्थिक वृद्धि लगातार तेज हुई है। वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की औसत वृद्धि 1980 के दशक में 5.7 प्रतिशत, 1990 के दशक में 5.8 प्रतिशत, 2000 के दशक में 6.3 प्रतिशत, 2010 के दशक में 6.6 प्रतिशत और हाल के चार वर्षों (2022-23 से 2025-26) में 7.7 प्रतिशत रही। प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि और भी अधिक रही, जो 1980 के दशक में 3.5 प्रतिशत से बढ़कर हाल के वर्षों में 6.7 प्रतिशत हो गई।
प्रति व्यक्ति आय 1981 में लगभग 274 अमेरिकी डॉलर और 1991 में 306 अमेरिकी डॉलर थी, जो 2024 में बढ़कर लगभग 2700 अमेरिकी डॉलर हो गई, यानी लगभग दस गुना की वृद्धि। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अक्टूबर 2025 के विश्व आर्थिक परिदृश्य (WEO) के अनुसार, प्रति व्यक्ति आय 2025 में 2818 अमेरिकी डॉलर, 2026 में 3051 अमेरिकी डॉलर और 2030 में 4346 अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है। जनसंख्या वृद्धि में गिरावट ने भी प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि को गति दी है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि भारत ने त्वरित वृद्धि और व्यापक आर्थिक स्थिरता का एक सकारात्मक चक्र हासिल किया है। मुद्रास्फीति में कमी, चालू खाता घाटा 1990 के बाद से GDP के 0.5-2.2 प्रतिशत के बीच, बैंकिंग क्षेत्र में सुधार और राजकोषीय समेकन जैसे संकेतक इस स्थिरता को दर्शाते हैं। नीतिगत ढांचे, जैसे FRBM, GST और 2016 में शुरू की गई लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (FIT) नीति, ने इन सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
| अवधि | वास्तविक GDP वृद्धि (प्रतिशत) | प्रति व्यक्ति आय वृद्धि (प्रतिशत) |
|---|---|---|
| 1980-81 से 1989-90 | 5.7 | 3.5 |
| 1990-91 से 1999-2000 | 5.8 | 3.7 |
| 2000-01 से 2009-10 | 6.3 | 4.6 |
| 2010-11 से 2019-20 | 6.6 | 5.2 |
| 2022-23 से 2025-26* | 7.7 | 6.7 |
प्रभाव
भारत की बढ़ती आर्थिक वृद्धि और स्थिरता का सीधा प्रभाव आम नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय पर पड़ा है, जिससे जीवन स्तर में सुधार हुआ है। हालांकि, राज्यों के बीच विकास की असमानता एक चिंता का विषय है, क्योंकि सभी राज्य समान गति से प्रगति नहीं कर रहे हैं।
मजबूत बैंकिंग क्षेत्र और बेहतर पूंजीकरण से वित्तीय स्थिरता बढ़ी है, जिससे निवेश और ऋण वितरण में सुधार हो सकता है। राजकोषीय समेकन और पूंजीगत व्यय पर ध्यान देने से बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे दीर्घकालिक विकास क्षमता मजबूत होगी।
भविष्य का परिदृश्य
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि वर्तमान वृद्धि दर जारी रहती है, तो भारत 2047 तक एक समृद्ध अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। IMF के अनुमानों के अनुसार, प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि जारी रहने की संभावना है, लेकिन यह वैश्विक आर्थिक स्थितियों और घरेलू नीतियों पर निर्भर करेगा।
हालांकि, यदि राज्यों के बीच असमानता बढ़ती है, तो समग्र विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, राज्यों की वृद्धि को समावेशी बनाना और नीतिगत सुधारों को जारी रखना आवश्यक होगा। यदि वैश्विक आर्थिक मंदी या घरेलू झटके आते हैं, तो वृद्धि दर प्रभावित हो सकती है, लेकिन मजबूत नीतिगत ढांचे से इनसे निपटने में मदद मिल सकती है।
स्रोत: Reserve Bank of India
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दशकवार GDP वृद्धि दर
2022-267.7 प्रतिशत
सटीक आंकड़े देखें
| श्रेणी | GDP वृद्धि |
|---|---|
| 1980s | 5.7 प्रतिशत |
| 1990s | 5.8 प्रतिशत |
| 2000s | 6.3 प्रतिशत |
| 2010s | 6.6 प्रतिशत |
| 2022-26 | 7.7 प्रतिशत |
स्रोत:स्रोत: RBI भाषण, MoSPI डेटा। स्रोत-समर्थित



