मुख्य तथ्य
- लेखक
- अलेक्जेंडर स्टर्न, नोट्रे डेम विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र के शोध छात्र
- प्रकाशन
- न्यूयॉर्क टाइम्स का 'द स्टोन' मंच
- मुख्य तर्क
- 'ए थिंग' भाषाई आलस्य नहीं, बल्कि इंटरनेट युग में अनुभव को समझने का तरीका है
- कारण
- सामग्री की बाढ़, सांस्कृतिक विखंडन, व्यंग्य और वास्तविकता का अंतर कम होना, और सभी घटनाओं का एक जैसा होना
- उदाहरण
- नेटफ्लिक्स की शैली 'अंडरस्टेटेड रोमांटिक रोड ट्रिप मूवीज़'
पृष्ठभूमि
अमेरिकी अंग्रेज़ी बोलने वाले हाल के दिनों में तरह-तरह के रुझानों, घटनाओं, मीम्स, उत्पादों और जीवनशैली विकल्पों को एक ही लेबल 'ए थिंग' (एक चीज़) से पुकारने लगे हैं। बातचीत में किसी हैरान करने वाले फैशन या व्यवहार का ज़िक्र होने पर अक्सर सवाल उठता है, 'क्या यह सच में एक चीज़ है?' या 'यह कब से एक चीज़ बन गया?'
न्यूयॉर्क टाइम्स के 'द स्टोन' मंच पर प्रकाशित लेख में नोट्रे डेम विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र के शोध छात्र अलेक्जेंडर स्टर्न ने इसे भाषा की साधारण जिज्ञासा या पीढ़ी की भाषाई आलस्यता करार देने से इनकार किया है। उनका मानना है कि भाषा और अनुभव एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।
स्टर्न के अनुसार, 'थिंग' शब्द लंबे समय से भाषा में बहुमुखी भूमिका निभाता रहा है, जैसे 'द थिंग इज़' या 'हियर इज़ द थिंग'। लेकिन नया पहलू यह है कि अब इसके पहले अनिश्चितकालीन आर्टिकल 'ए' जोड़कर 'ए थिंग' कहा जाता है, जो सूचीबद्ध करने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
वर्तमान स्थिति
स्टर्न ने 'ए थिंग' के चार मुख्य कारण बताए हैं। पहला, सांस्कृतिक क्षेत्र में सामग्री की बाढ़। लोग ऑनलाइन अधिक समय बिता रहे हैं और यही सामग्री उनके अनुभव का हिस्सा बन गई है, जिससे 'ए थिंग' सांस्कृतिक ऑन्टोलॉजी की बुनियादी इकाई बन गई है।
दूसरा, सांस्कृतिक क्षेत्र का विखंडन। नेटफ्लिक्स की शैलियाँ जैसे 'अंडरस्टेटेड रोमांटिक रोड ट्रिप मूवीज़' दिखाती हैं कि व्यक्ति अपना निच मार्केट बनता जा रहा है। तीसरा, व्यंग्य और वास्तविकता के बीच की दूरी कम होना, जिससे 'ए थिंग' कहते समय विडंबनापूर्ण दूरी बनी रहती है।
चौथा, यह भावना कि ये सभी घटनाएँ मूल रूप से एक जैसी हैं। स्टर्न कहते हैं कि 'ए थिंग' ज़्यादातर इंटरनेट के माध्यम से अनुभव की जाती है और उसी से उत्पन्न होती है। इसलिए 'क्या यह सच में एक चीज़ है?' का फैसला अक्सर गूगल करता है।
प्रभाव
यह प्रवृत्ति अमेरिकी अंग्रेज़ी बोलने वालों के बीच संवाद के तरीके को प्रभावित कर रही है। 'ए थिंग' का इस्तेमाल किसी घटना को दूरी से देखने और उसे सूचीबद्ध करने का ज़रिया बन गया है, जिससे लोग विडंबनापूर्ण रुख अपनाते हैं।
स्टर्न का तर्क है कि युवाओं को ज़्यादा व्यंग्यात्मक या उदासीन कहना सही नहीं है, बल्कि परिस्थितियाँ ही ऐसी हैं। यह भाषाई बदलाव न केवल बातचीत को आकार देता है, बल्कि अनुभव को समझने के तरीके को भी बदलता है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रवृत्ति कितने लोगों तक सीमित है या इसका स्थायी प्रभाव क्या होगा। लेख में इस बात का कोई आंकड़ा या सर्वेक्षण नहीं दिया गया है।
भविष्य की संभावनाएँ
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि इंटरनेट पर सामग्री का प्रवाह बढ़ता रहा, तो 'ए थिंग' जैसे शब्दों का इस्तेमाल और अधिक व्यापक हो सकता है। स्टर्न का सुझाव है कि यह शब्द सांस्कृतिक अनुभवों को वर्गीकृत करने की वास्तविक आवश्यकता को पूरा करता है।
हालांकि, यह संभावना है कि भाषाई रुझान बदल जाए और 'ए थिंग' का चलन कम हो जाए, जैसे पहले 'यू नो योर अनियन्स' जैसे मुहावरे अप्रचलित हो गए। यह भी संभव है कि यह शब्द भाषा का स्थायी हिस्सा बन जाए।
यदि सांस्कृतिक विखंडन और बढ़ता है, तो 'ए थिंग' का उपयोग और अधिक सूक्ष्म श्रेणियों के लिए हो सकता है। लेकिन यह अनिश्चित है कि यह प्रवृत्ति किस दिशा में जाएगी।
स्रोत: nytimes.com



