मुख्य तथ्य
- बिना बीमा वाहनों का प्रतिशत
- 56%
- बिना बीमा वाहनों की संख्या
- 16.54 करोड़
- कुल पंजीकृत वाहन
- लगभग 30 करोड़
- कारों के लिए तृतीय-पक्ष बीमा अवधि
- चार वर्ष
- दोपहिया वाहनों के लिए तृतीय-पक्ष बीमा अवधि
- छह वर्ष
- अगली सुनवाई
- 18 अगस्त
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने भारत में बिना वैध बीमा के चल रहे वाहनों की बड़ी संख्या पर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि देश में लगभग 56 प्रतिशत वाहन बिना वैध बीमा कवर के चल रहे हैं।
संसदीय समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत ने बताया कि लगभग 30 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से 16.54 करोड़ वाहनों के पास बीमा कवर नहीं है।
वर्तमान स्थिति
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने केंद्र से 'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' नीति पर आधारित पायलट परियोजना शुरू करने को कहा। इस योजना के तहत बिना वैध बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति प्रतिबंधित करने की संभावना तलाशी जाएगी।
अदालत ने नए खरीदे गए वाहनों के लिए अनिवार्य तृतीय-पक्ष मोटर बीमा की अवधि भी बढ़ा दी। कारों के लिए यह अवधि चार वर्ष और दोपहिया वाहनों के लिए छह वर्ष कर दी गई है। पहले 2018 के आदेश के अनुसार कारों के लिए तीन वर्ष और दोपहिया वाहनों के लिए पांच वर्ष का बीमा अनिवार्य था।
पीठ ने कहा कि पिछले आदेश के बाद भी काफी संख्या में वाहन बिना बीमा के हैं, इसलिए अनिवार्य कवर अवधि एक वर्ष बढ़ाना आवश्यक है।
| वाहन प्रकार | पहले की अवधि | अब की अवधि |
|---|---|---|
| कार | तीन वर्ष | चार वर्ष |
| दोपहिया वाहन | पांच वर्ष | छह वर्ष |
प्रभाव
इस फैसले का सीधा असर वाहन मालिकों पर पड़ेगा, जिन्हें अब नए वाहनों के लिए लंबी अवधि का तृतीय-पक्ष बीमा कराना होगा। साथ ही, पेट्रोल पंपों पर बीमा सत्यापन प्रणाली लागू होने से बिना बीमा वाहनों को ईंधन नहीं मिल सकेगा।
अदालत ने सड़कों पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरों को बीमा डेटाबेस और वाहन पोर्टल से जोड़ने का सुझाव दिया है। पुलिस कर्मियों को मोबाइल ऐप या डिवाइस से बीमा विवरण जांचने और चालान काटने की सुविधा देने की बात कही गई है।
अदालत ने कहा कि अनिवार्य तृतीय-पक्ष बीमा केवल दुर्घटना के बाद मुआवजा देने के बारे में नहीं है, बल्कि पीड़ितों को लंबी कानूनी लड़ाई से बचाने के बारे में भी है। इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जोड़ते हुए अदालत ने कहा कि समय पर बीमा कवर सुनिश्चित करने से दुर्घटना पीड़ितों को बिना देरी के वित्तीय सहायता मिलती है।
आगे की राह
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
अदालत ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) और भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) को निर्देश दिया है कि वे बिना वैध बीमा वाले वाहनों के लिए पेट्रोल और डीजल आपूर्ति प्रतिबंधित करने की प्रणाली तलाशें। संबंधित अधिकारियों को 14 अगस्त तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी है, और अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
यदि पायलट परियोजना सफल रहती है, तो इसे देश भर में लागू किया जा सकता है, जिससे बीमा कवरेज में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। हालांकि, ईंधन आपूर्ति पर प्रतिबंध से वाहन मालिकों को असुविधा हो सकती है, और इसके क्रियान्वयन में तकनीकी चुनौतियां भी आ सकती हैं।
अदालत ने चार-स्तरीय मोटर बीमा मॉडल का सुझाव दिया है, जिसमें यात्रियों और पीछे बैठने वालों के लिए वैकल्पिक कानूनी देयता कवर और मालिकों, चालकों तथा यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यक्तिगत दुर्घटना कवर शामिल है। बीमा कंपनियों को सरल भाषा में पॉलिसी समझाने और अतिरिक्त कवर विकल्पों के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित करने का निर्देश दिया गया है।
स्रोत: indiablooms.com



