मुख्य तथ्य
- शोध प्रकाशन
- Nature Aging, 3 सितंबर 2025
- शोध संस्थान
- कोलोन विश्वविद्यालय, CECAD एजिंग रिसर्च क्लस्टर
- अध्ययन मॉडल
- राउंडवर्म C. elegans और मानव स्टेम सेल-व्युत्पन्न मोटर न्यूरॉन्स
- प्रमुख प्रोटीन
- EPS8, RAC, USP4
- रोग मॉडल
- हंटिंगटन (पॉलीग्लूटामिन) और ALS (FUS, TDP-43)
- नैदानिक स्थिति
- कोई मानव रोगी शामिल नहीं; उपचार में कोई बदलाव नहीं
पृष्ठभूमि
उम्र बढ़ना न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों का सबसे बड़ा जोखिम कारक है, लेकिन वैज्ञानिक अब तक यह नहीं बता पाए थे कि कौन सा आणविक परिवर्तन इस प्रक्रिया को शुरू करता है। कोलोन विश्वविद्यालय के सीईसीएडी एजिंग रिसर्च क्लस्टर की टीम ने एक प्रोटीन EPS8 की पहचान की है, जो उम्र के साथ जमा होता है और विषैले प्रोटीन संग्रहण को सक्रिय करता है।
अल्जाइमर, पार्किंसंस, एएलएस और हंटिंगटन रोग में अलग-अलग प्रोटीन शामिल होते हैं, लेकिन इनमें एक समान संरचनात्मक विशेषता होती है: मिसफोल्ड प्रोटीन जमा होकर तंत्रिका कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। यह अध्ययन Caenorhabditis elegans नामक राउंडवर्म और मानव कोशिकाओं पर किया गया है।
वर्तमान स्थिति
यह शोध Nature Aging पत्रिका में 3 सितंबर 2025 को प्रकाशित हुआ था। हाल ही में विज्ञान समाचार एग्रीगेटरों के माध्यम से यह फिर से चर्चा में आया, लेकिन यह कोई नई खोज नहीं है। शोध में पाया गया कि EPS8 और RAC सिग्नलिंग की अति-सक्रियता हंटिंगटन और एएलएस मॉडल में प्रोटीन संग्रहण को बढ़ाती है।
शोधकर्ताओं ने eps-8 या RAC ऑर्थोलॉग को निष्क्रिय करके विषैले संग्रहण को रोका और तंत्रिका कार्य की हानि को रोका। उन्होंने USP4 एंजाइम को EPS8 स्थिरता का नियामक भी पहचाना। मानव कोशिकाओं में USP4 को निष्क्रिय करने से एएलएस उत्परिवर्तन से होने वाली न्यूरोडीजेनेरेशन रुक गई।
| प्रोटीन | भूमिका | प्रभाव |
|---|---|---|
| EPS8 | उम्र के साथ जमा होता है | विषैले प्रोटीन संग्रहण को सक्रिय करता है |
| RAC | सिग्नलिंग मार्ग | EPS8 के साथ मिलकर संग्रहण बढ़ाता है |
| USP4 | EPS8 स्थिरता का नियामक | इसे कम करने से संग्रहण रुकता है |
प्रभाव
यह शोध प्रयोगशाला में राउंडवर्म और मानव कोशिकाओं पर किया गया है, इसमें कोई मानव रोगी शामिल नहीं था। इसका मतलब यह नहीं है कि EPS8 मनुष्यों में रोग पैदा करता है या इसे कम करना सुरक्षित है। फिलहाल एएलएस और हंटिंगटन के लिए मौजूदा चिकित्सा दिशानिर्देशों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
इस शोध का महत्व यह है कि यह कई न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों में एक साझा तंत्र की ओर इशारा करता है। यदि आगे के शोध में यह पुष्टि होती है, तो इस मार्ग को लक्षित करने वाली थेरेपी कई बीमारियों के लिए उपयोगी हो सकती है। हालांकि, यह केवल एक संभावना है, और मरीजों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई बदलाव नहीं करना चाहिए।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
इस शोध को नैदानिक रूप से उपयोगी बनाने के लिए सबसे पहले यह पुष्टि करनी होगी कि EPS8 स्तनधारियों में भी इसी तरह काम करता है। फिर यह देखना होगा कि इसे कम करना पूरे जीव के लिए सुरक्षित है या नहीं। इसके बाद ही दवा विकास शुरू हो सकता है, जिसमें आमतौर पर एक दशक से अधिक समय लग सकता है।
यदि ये चरण सफल रहते हैं, तो EPS8 और USP4 को लक्षित करने वाली दवाएं विकसित हो सकती हैं। हालांकि, यह केवल एक संभावना है, और यह निश्चित नहीं है कि यह शोध कभी इलाज तक पहुंचेगा। मरीजों को वर्तमान में नैदानिक परीक्षणों की जानकारी ClinicalTrials.gov से लेनी चाहिए।
स्रोत: medicaldaily.com



