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दिल्ली दंगा साजिश मामला: अदालत ने आरोपी को LLB में दाखिले के लिए गाजियाबाद जाने की अनुमति दी

दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने दिल्ली दंगा साजिश मामले के आरोपी शादाब अहमद को 4 से 7 अगस्त के बीच LLB में दाखिले के लिए गाजियाबाद जाने की अनुमति दी है।

दिल्ली दंगा साजिश मामला: अदालत ने आरोपी को LLB में दाखिले के लिए गाजियाबाद जाने की अनुमति दी
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

आरोपी
शादाब अहमद
मामला
दिल्ली दंगा साजिश
अदालत
दिल्ली कड़कड़डूमा कोर्ट
अनुमति की अवधि
4 से 7 अगस्त 2026
समय सीमा
सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे
उद्देश्य
एलएलबी में दाखिला

पृष्ठभूमि

दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी शादाब अहमद को सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को जमानत दी थी। जमानत की शर्तों के तहत उसे अदालत की अनुमति के बिना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली से बाहर जाने की मनाही थी।

शादाब अहमद ने कृष्णा लॉ कॉलेज से एलएलबी करने की इच्छा जताई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की शर्तों के कारण उसे अदालत से अनुमति लेनी पड़ी। उसकी ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में भी एक अन्य मामले में याचिका दायर की गई थी, जिसमें हाई कोर्ट ने आदेश पारित किया था।

वर्तमान स्थिति

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेई ने मंगलवार को शादाब अहमद को 4 से 7 अगस्त 2026 के बीच सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक एनसीटी दिल्ली से बाहर जाने की अनुमति दी। यह अनुमति कॉलेज में एलएलबी में दाखिला सुनिश्चित करने के लिए दी गई है।

अदालत ने निर्देश दिया कि शादाब अहमद को मंगलवार और गुरुवार (4 अगस्त और 6 अगस्त 2026) को सुबह 8:30 बजे संबंधित पुलिस स्टेशन पर रिपोर्ट करना होगा, जबकि सामान्य समय 10:30 बजे है। पुलिस स्टेशन प्रभारी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आधे घंटे के भीतर उसे रिहा करेंगे।

अदालत के आदेश में कहा गया है, 'माननीय उच्च न्यायालय के उक्त आदेश के अनुसार, आवेदक को 04.08.2026 से 07.08.2026 तक सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे के बीच एनसीटी दिल्ली छोड़ने की अनुमति दी जाती है, ताकि वह कॉलेज में दाखिला ले सके।'

अनुमति से संबंधित मुख्य विवरण
विवरण जानकारी
आरोपी का नामशादाब अहमद
मामलादिल्ली दंगा साजिश
जमानत की तारीख5 जनवरी 2026
अनुमति की तारीखें4-7 अगस्त 2026
समयसुबह 10 बजे से शाम 7 बजे
पुलिस रिपोर्टिंग समयसुबह 8:30 बजे (मंगलवार और गुरुवार)
कॉलेजकृष्णा लॉ कॉलेज
सभी जानकारी स्रोत से सीधे ली गई है।

प्रभाव

इस अनुमति से शादाब अहमद को अपनी पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिलेगा, जिससे वह कानून की पढ़ाई में दाखिला ले सकेंगे। यह आदेश उनकी शैक्षणिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दाखिला सुनिश्चित करने के लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से कॉलेज जाना आवश्यक था।

इस फैसले से यह भी संकेत मिलता है कि अदालतें आरोपियों की शैक्षणिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जमानत की शर्तों में लचीलापन दिखा सकती हैं, बशर्ते वे अदालत की निगरानी में रहें। हालांकि, इसका व्यापक प्रभाव स्पष्ट नहीं है, क्योंकि यह मामला विशिष्ट परिस्थितियों पर आधारित है।

आगे की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि शादाब अहमद अदालत की शर्तों का पालन करते हैं और समय पर पुलिस स्टेशन पर रिपोर्ट करते हैं, तो उन्हें दाखिला प्रक्रिया पूरी करने में सफलता मिल सकती है। हालांकि, यदि वे किसी भी शर्त का उल्लंघन करते हैं, तो अदालत अनुमति वापस ले सकती है या जमानत की शर्तों को कड़ा कर सकती है।

आगे चलकर, यदि दाखिला सुनिश्चित हो जाता है, तो शादाब अहमद को नियमित कक्षाओं में भाग लेने के लिए और अनुमतियों की आवश्यकता हो सकती है, जिसके लिए उन्हें अदालत से दोबारा संपर्क करना पड़ सकता है। यह स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि अदालत आगे क्या आदेश देती है।

स्रोत: indiagazette.com

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