मुख्य तथ्य
- छापेमारी की तारीख
- बुधवार (रिपोर्ट प्रकाशन तिथि: 4 अगस्त 2026)
- लक्षित अधिकारी
- पूर्व सीजीएम, कार्यकारी निदेशक, पूर्व जीएम
- जांच का दायरा
- 2012 से मोहाली और अमृतसर में कम से कम 20 औद्योगिक प्लॉटों का कथित धोखाधड़ीपूर्ण आवंटन
- जांच का आधार
- विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज मॉनिटरिंग एफआईआर
- राज्य का रुख
- पंजाब विजिलेंस जांच का हवाला देते हुए जानकारी देने से इनकार; मामला मुख्य सचिव को भेजा गया
पृष्ठभूमि
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को पंजाब स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कॉर्पोरेशन (पीएसआईईसी) के एक पूर्व मुख्य महाप्रबंधक (सीजीएम), एक कार्यकारी निदेशक और एक पूर्व महाप्रबंधक (जीएम) के आवासों पर छापे मारे। इसके साथ ही एजेंसी ने निगम के मुख्यालय से औद्योगिक प्लॉटों से संबंधित रिकॉर्ड भी मांगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी 2012 से मोहाली और अमृतसर में कम से कम 20 औद्योगिक प्लॉटों के कथित धोखाधड़ीपूर्ण आवंटन की जांच कर रही है। यह मामला पीएसआईईसी के अधिकारियों द्वारा प्लॉट आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
वर्तमान स्थिति
पिछले साल ईडी ने तत्कालीन प्रधान सचिव (उद्योग एवं वाणिज्य) और पीएसआईईसी के प्रबंध निदेशक को भेजे पत्र में 2012 से आवंटित औद्योगिक प्लॉटों का ब्योरा, निगम या किसी अन्य प्रवर्तन एजेंसी द्वारा की गई जांच का विवरण और इस संबंध में दर्ज किसी भी एफआईआर की जानकारी मांगी थी।
हालांकि, पंजाब सरकार ने पंजाब विजिलेंस की जांच का हवाला देते हुए यह जानकारी देने से इनकार कर दिया था। मामले की संवेदनशीलता और ईडी के केंद्रीय एजेंसी होने के कारण, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने इस मामले को आवश्यक आदेशों के लिए मुख्य सचिव के पास भेज दिया है।
ईडी विजिलेंस ब्यूरो द्वारा पीएसआईईसी के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज मॉनिटरिंग एफआईआर के आधार पर जांच कर रही है। आरोप है कि प्लॉटों का आवंटन पीएसआईईसी के अधिकारियों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया था।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| छापेमारी की तारीख | बुधवार (4 अगस्त 2026) |
| लक्षित अधिकारी | पूर्व सीजीएम, कार्यकारी निदेशक, पूर्व जीएम |
| जांच का दायरा | 2012 से मोहाली और अमृतसर में कम से कम 20 औद्योगिक प्लॉट |
| जांच का आधार | विजिलेंस ब्यूरो की मॉनिटरिंग एफआईआर |
| राज्य का रुख | जानकारी देने से इनकार; मामला मुख्य सचिव को भेजा गया |
प्रभाव
इस जांच का सीधा असर पीएसआईईसी के उन अधिकारियों पर पड़ सकता है जिनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, इस मामले से पंजाब में औद्योगिक प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ सकते हैं। निवेशकों और उद्योगपतियों के बीच इससे भरोसे की कमी हो सकती है, हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इसका कोई ठोस प्रभाव पड़ेगा या नहीं।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि ईडी को प्लॉट आवंटन में अनियमितताओं के पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो आगे की कार्रवाई में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। इससे संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
वहीं, यदि राज्य सरकार ईडी को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में देरी करती है, तो जांच में और समय लग सकता है। संभावना है कि मामला मुख्य सचिव के स्तर पर विचार के बाद आगे बढ़े, लेकिन इसकी दिशा अभी स्पष्ट नहीं है।
फिलहाल यह देखना होगा कि ईडी की जांच किस ओर जाती है और क्या इससे पीएसआईईसी के अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई होती है।
स्रोत: tribuneindia.com



