मुख्य तथ्य
- वर्महोल समाधान
- 1988 में किप थॉर्न और सहयोगियों द्वारा खोजा गया
- गोडेल का समाधान
- 1949 में प्रस्तुत, बंद समय-जैसे वक्रों की अनुमति
- नोविकोव का सिद्धांत
- आत्म-अनुरूपता: अतीत को बदला नहीं जा सकता
- हॉकिंग का अनुमान
- 1992 में कालक्रम संरक्षण अनुमान
- हॉकिंग की पार्टी
- 28 जून 2009, कोई समय यात्री नहीं पहुंचा
पृष्ठभूमि
वर्महोल समय यात्रा के संभावित मार्ग के रूप में भौतिकी में चर्चा का विषय रहे हैं। अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार, भविष्य की यात्रा संभव है, लेकिन अतीत की यात्रा के लिए सामान्य सापेक्षता के विभिन्न समाधानों की आवश्यकता होती है। 1949 में, कर्ट गोडेल ने आइंस्टीन को जन्मदिन के उपहार के रूप में एक समाधान प्रस्तुत किया, जो बंद समय-जैसे वक्रों की अनुमति देता है।
1988 में, नोबेल पुरस्कार विजेता किप थॉर्न और उनके सहयोगियों ने आइंस्टीन के क्षेत्र समीकरणों का एक नया समाधान खोजा: पारगम्य वर्महोल, जो यथार्थवादी ब्रह्मांड मॉडल में समय यात्रा की अनुमति दे सकते हैं। इसने वैज्ञानिकों की समय यात्रा में रुचि को पुनर्जीवित किया।
वर्तमान स्थिति
रूसी भौतिक विज्ञानी इगोर दिमित्रिच नोविकोव ने आत्म-अनुरूपता सिद्धांत प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार समय यात्री अतीत को प्रभावित कर सकता है लेकिन उसे बदल नहीं सकता। थॉर्न और उनके छात्रों ने 1991 में गणनाओं के माध्यम से दिखाया कि स्व-संगत समय यात्रा समाधान संभव हैं, हालांकि वे इसे साबित नहीं कर सके।
1992 में, स्टीफन हॉकिंग ने 'कालक्रम संरक्षण अनुमान' प्रस्तुत किया, जिसके अनुसार भौतिकी के नियम स्थूल वस्तुओं को अतीत में यात्रा करने से रोकते हैं। हॉकिंग ने 28 जून 2009 को एक पार्टी का आयोजन किया, जिसका निमंत्रण पार्टी के बाद भेजा गया, लेकिन कोई समय यात्री नहीं पहुंचा।
| वर्ष | घटना |
|---|---|
| 1944 | रेने बार्जावेल का उपन्यास 'फ्यूचर टाइम्स थ्री' |
| 1949 | गोडेल का समाधान |
| 1988 | थॉर्न का वर्महोल समाधान |
| 1991 | थॉर्न के समूह की गणना |
| 1992 | हॉकिंग का कालक्रम संरक्षण अनुमान |
| 2009 | हॉकिंग की पार्टी |
प्रभाव
यदि वर्महोल के माध्यम से समय यात्रा संभव होती है, तो यह भौतिकी की हमारी समझ को मौलिक रूप से बदल सकती है। इससे कार्य-कारण के सिद्धांत पर प्रश्न उठते हैं, जैसे दादा विरोधाभास, जहां एक व्यक्ति अतीत में जाकर अपने दादा की मृत्यु का कारण बन सकता है, जिससे उसका अस्तित्व ही असंभव हो जाता है।
इसका प्रभाव विज्ञान कथा साहित्य और फिल्मों पर भी पड़ा है, जैसे 'डॉक्टर हू', 'द अम्ब्रेला अकादमी', '12 मंकीज़' और जर्मन श्रृंखला 'डार्क', जहां पात्र अतीत को बदलने का प्रयास करते हैं लेकिन उनके कार्य उन्हीं घटनाओं को जन्म देते हैं जिन्हें वे रोकना चाहते थे।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि भविष्य में भौतिकी का कोई मौलिक सिद्धांत विकसित होता है जो कालक्रम संरक्षण अनुमान को सिद्ध करता है, तो अतीत की यात्रा असंभव हो सकती है। हालांकि, यदि स्व-संगत समाधान सिद्ध हो जाते हैं, तो समय यात्रा संभव हो सकती है, लेकिन अतीत को बदलने की क्षमता सीमित होगी।
वैज्ञानिक अभी भी इस पर शोध कर रहे हैं, और यह स्पष्ट नहीं है कि क्या वर्महोल वास्तव में मौजूद हैं या उन्हें पार करना संभव होगा। यदि वे मौजूद हैं, तो वे समय यात्रा का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए अभी और प्रमाण की आवश्यकता है।
स्रोत: scientificamerican.com



