मुख्य तथ्य
- मामला
- स्वतः संज्ञान: जोधपुर में न्यायिक आवास, मंदिर, स्कूल आदि का वक्फ के रूप में अवैध पंजीकरण
- अदालत
- राजस्थान हाईकोर्ट, न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की पीठ
- मुख्य आदेश
- विवादित संपत्तियों पर स्थिति यथावत रखने का निर्देश
- जांच के निर्देश
- जिला कलेक्टर को भौतिक सत्यापन और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश
- अगली सुनवाई
- 11 अगस्त 2026
पृष्ठभूमि
राजस्थान हाईकोर्ट ने दैनिक भास्कर की एक खबर पर स्वतः संज्ञान लिया है, जिसमें दावा किया गया है कि जोधपुर में न्यायाधीशों के आधिकारिक आवास, स्कूल, कॉलेज, मंदिर और कई अन्य सार्वजनिक तथा निजी संपत्तियां आधिकारिक अभिलेखों में वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज हैं।
अदालत ने कहा कि राजस्व अभिलेखों में इसके विपरीत होने के बावजूद कई बड़ी संपत्तियों को वक्फ गजट में दर्ज किया गया है और उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्ति के रूप में अपलोड किया गया है।
वर्तमान स्थिति
न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की पीठ ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों, पूजा स्थलों, न्यायिक आवासों और कई आवासीय तथा व्यावसायिक संपत्तियों का वक्फ अभिलेखों में शामिल होना, राजस्व अभिलेखों से स्पष्ट विसंगति के बावजूद, सार्वजनिक अभिलेखों की पवित्रता और विश्वसनीयता, वक्फ संपत्तियों के वैध प्रशासन, तथा वक्फ गजट और उम्मीद पोर्टल पर प्रविष्टियां करने की प्रक्रिया की अखंडता के बारे में चिंता पैदा करता है।
अदालत ने राज्य को विवादित संपत्तियों के संबंध में स्थिति यथावत बनाए रखने का निर्देश दिया। अदालत ने विशेष रूप से राज्य को इन संपत्तियों के भौतिक या कानूनी स्वरूप को बदलने वाले स्थानांतरण, पट्टे, लाइसेंस, निर्माण, विध्वंस या अन्य कार्रवाई से रोका।
अदालत ने जोधपुर के जिला कलेक्टर को मौजूदा राजस्व अभिलेखों को संरक्षित रखने और उक्त खसरा संख्याओं का फोटोग्राफ और जीपीएस विवरण सहित भौतिक सत्यापन करने तथा उनकी प्रकृति और उपयोग का तथ्यात्मक प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भी उक्त संपत्तियों को वक्फ गजट और उम्मीद पोर्टल पर शामिल करने से संबंधित पूरे अभिलेख प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
प्रभाव
इस आदेश का सीधा असर जोधपुर में उन सभी संपत्तियों पर पड़ेगा जिन्हें वक्फ के रूप में दर्ज किया गया है, जिनमें न्यायिक आवास, शैक्षणिक संस्थान, मंदिर और अन्य सार्वजनिक तथा निजी संपत्तियां शामिल हैं। इन संपत्तियों पर कोई भी स्थानांतरण, पट्टा, निर्माण या विध्वंस अब अदालत की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा।
इससे संबंधित पक्षकारों, जैसे कि शैक्षणिक संस्थानों के संचालक, मंदिर ट्रस्ट, और निजी मालिक, प्रभावित होंगे क्योंकि उनकी संपत्तियों के कानूनी दर्जे पर अस्थायी रोक लग गई है। साथ ही, राजस्थान बोर्ड ऑफ मुस्लिम वक्फ को अपने अभिलेखों की समीक्षा करनी होगी और अदालत को रिपोर्ट देनी होगी।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि भौतिक सत्यापन में पाया जाता है कि ये संपत्तियां वास्तव में वक्फ नहीं हैं, तो अदालत इन प्रविष्टियों को रद्द करने का आदेश दे सकती है, जिससे संपत्तियों के मूल स्वामियों को राहत मिल सकती है।
यदि अभिलेखों में गड़बड़ी पाई जाती है, तो अदालत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दे सकती है, जिससे भविष्य में ऐसी प्रविष्टियों को रोका जा सके।
हालांकि, यदि कुछ संपत्तियां वैध रूप से वक्फ हैं, तो अदालत उन्हें अलग कर सकती है, और बाकी संपत्तियों के संबंध में स्थिति स्पष्ट होने तक मामला लंबित रह सकता है।
स्रोत: livelaw.in



