मुख्य तथ्य
- विधि
- पॉज़ एट लेयर फीचर से मैनुअल फिलामेंट स्वैप
- लागत
- अतिरिक्त लागत नहीं, केवल मौजूदा स्पूल
- अपशिष्ट
- लगभग शून्य अपशिष्ट
- सीमा
- एक ही लेयर में रंग नहीं बदल सकते
- स्वचालित सिस्टम
- बैम्बू लैब AMS, AMS Lite, एलीगू CANVAS
पृष्ठभूमि
3D प्रिंटिंग के शौकीनों के लिए मल्टीकलर प्रिंटिंग अक्सर महंगे AMS (ऑटोमेटेड मटेरियल सिस्टम) से जुड़ी होती है, जैसे बैम्बू लैब का AMS या एलीगू का CANVAS सिस्टम। ये सिस्टम प्रिंटर के साथ या ऊपर लगे मोटराइज़्ड फिलामेंट स्विचिंग यूनिट होते हैं, जो चार स्पूल तक रख सकते हैं और स्लाइसर के निर्देशानुसार फिलामेंट बदलते हैं।
हालांकि, ये सिस्टम महंगे होते हैं और इनमें पर्ज वेस्ट (अतिरिक्त फिलामेंट बर्बादी) और प्रिंट समय में वृद्धि जैसी कमियां भी हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, बिना AMS के भी मल्टीकलर प्रिंटिंग संभव है, बशर्ते धैर्य, डिज़ाइन कार्य और स्लाइसर की तरकीबों का सहारा लिया जाए।
वर्तमान स्थिति
मेकयूज़ऑफ़ की रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिक स्लाइसर में बिल्ट-इन 'पॉज़ एट लेयर' या 'पॉज़ एट हाइट' फीचर होता है, जिससे प्रिंट को एक निश्चित लेयर पर रोककर फिलामेंट बदला जा सकता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह मैनुअल है, लेकिन इसमें लगभग शून्य अपशिष्ट होता है और प्रिंट समय पर कोई असर नहीं पड़ता।
कुछ स्लाइसर जैसे ओर्का स्लाइसर, बैम्बू स्टूडियो या एलीगू स्लाइसर में 'चेंज फिलामेंट' कमांड होता है, जो प्रक्रिया को थोड़ा स्वचालित करता है। बिना बिल्ट-इन पॉज़ स्क्रिप्ट वाली मशीनों पर G-code में सीधे M400 पॉज़ कमांड डाला जा सकता है। हालांकि, इस विधि की सीमा है कि एक ही लेयर के भीतर रंग नहीं बदला जा सकता, जिससे जटिल डिज़ाइन जैसे लोगो या पोर्ट्रेट संभव नहीं हैं।
प्रभाव
इस मैनुअल विधि से उन उपयोगकर्ताओं को लाभ हो सकता है जो कभी-कभार दो या तीन रंगों वाली प्रिंटिंग करते हैं, जैसे नेमप्लेट, रंग-ब्लॉक बेस वाला फूलदान या एक्सेंट रंग वाली चाबी की चेन। इसमें अतिरिक्त लागत नहीं आती और यह स्लाइसर और प्रिंटर के बीच समन्वय सिखाता है।
हालांकि, इस प्रक्रिया में प्रिंट की निगरानी करनी पड़ती है। यदि उपयोगकर्ता पॉज़ ट्रिगर होने पर मौजूद नहीं है, तो प्रिंट रुका रहता है, और तापमान के आधार पर नोज़ल में अवशिष्ट दबाव से छोटे धब्बे या स्ट्रिंगिंग आर्टिफैक्ट हो सकते हैं। पर्जिंग से भी फिलामेंट बर्बाद होता है, और अपर्याप्त पर्जिंग से रंग मिश्रण दिख सकता है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि उपयोगकर्ता सरल, कम रंगों वाले प्रोजेक्ट पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो मैनुअल पॉज़ विधि लागत प्रभावी बनी रह सकती है और AMS सिस्टम की आवश्यकता नहीं होगी। यह उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो बजट में रहना चाहते हैं और जटिल डिज़ाइन से बचते हैं।
दूसरी ओर, यदि उपयोगकर्ता विस्तृत मल्टीकलर डिज़ाइन, पोर्ट्रेट या लेयर-दर-लेयर लोगो बनाना चाहते हैं, तो AMS-शैली प्रणाली ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प हो सकती है। ऐसे मामलों में, स्वचालित सिस्टम की लागत और अपशिष्ट के बावजूद, यह आवश्यक हो जाता है। भविष्य में, यदि तकनीक सस्ती होती है, तो अधिक उपयोगकर्ता स्वचालित सिस्टम अपना सकते हैं, लेकिन यह अनिश्चित है।
स्रोत: makeuseof.com



