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नोएडा और गुरुग्राम में सबसे तेज घर की कीमतें और किराया उपज में बढ़ोतरी: एनारॉक

एनारॉक के अध्ययन के अनुसार, 2019 से 2026 की दूसरी तिमाही तक भारत के 11 प्रमुख शहरों में घर की कीमतें और किराया उपज दोनों बढ़ी हैं। नोएडा और गुरुग्राम में सबसे अधिक मूल्य वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बेंगलुरु और हैदराबाद में किराया उपज में सबसे अधिक सुधार हुआ।

पृष्ठभूमि

एनारॉक रिसर्च के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत के 11 प्रमुख आवासीय बाजारों में 2019 से 2026 की दूसरी तिमाही के बीच घर की कीमतों और किराया उपज (रेंटल यील्ड) दोनों में वृद्धि हुई है। आम तौर पर, जब संपत्ति की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो किराया उपज पर दबाव बनता है, क्योंकि किराए उसी गति से नहीं बढ़ते। हालांकि, यह आंकड़े बताते हैं कि भारत के प्रमुख आवासीय बाजार इस प्रवृत्ति को तोड़ रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक विकास, रोजगार के अवसरों में विस्तार, बुनियादी ढांचे के विकास, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) के तेजी से विस्तार और बड़े शहरों में लगातार प्रवासन के कारण आवास की मांग और किराये की मांग दोनों मजबूत हुई हैं। बेहतर कनेक्टिविटी ने नए आवासीय गलियारे खोले हैं, जिससे मांग पारंपरिक शहरी केंद्रों से बाहर भी फैली है।

वर्तमान स्थिति

एनारॉक के आंकड़ों के अनुसार, नोएडा में औसत आवासीय कीमतें 2019 में 4,795 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 2026 की दूसरी तिमाही में 10,780 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं, जो 125 प्रतिशत की वृद्धि है। इस दौरान किराया उपज 3.2 प्रतिशत से बढ़कर 3.9 प्रतिशत हो गई, जो 70 आधार अंकों की वृद्धि है। गुरुग्राम में औसत कीमतें 6,150 रुपये से बढ़कर 13,350 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं, जो 117 प्रतिशत की वृद्धि है, और किराया उपज 3.5 प्रतिशत से बढ़कर 4.3 प्रतिशत हो गई।

बेंगलुरु में कीमतें 90 प्रतिशत बढ़कर 4,975 रुपये से 9,450 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं, जबकि किराया उपज 3.6 प्रतिशत से बढ़कर 4.6 प्रतिशत हो गई, जो 100 आधार अंकों की सबसे अधिक वृद्धि है। हैदराबाद में कीमतें 93 प्रतिशत बढ़कर 4,195 रुपये से 8,090 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं, और किराया उपज 2.6 प्रतिशत से बढ़कर 3.6 प्रतिशत हो गई। मुंबई में कीमतें 64 प्रतिशत बढ़ीं और किराया उपज 3.5 से 4.3 प्रतिशत हो गई, जबकि दिल्ली में कीमतें 47 प्रतिशत बढ़ीं और किराया उपज 2.2 से 3.2 प्रतिशत हो गई।

अन्य शहरों में नवी मुंबई में कीमतों में 71 प्रतिशत और किराया उपज में 80 आधार अंकों की वृद्धि हुई, ठाणे में कीमतें 63 प्रतिशत बढ़ीं और किराया उपज में 80 आधार अंकों का सुधार हुआ। पुणे में कीमतें 51 प्रतिशत बढ़ीं और किराया उपज में 65 आधार अंकों की वृद्धि हुई। चेन्नई और कोलकाता में क्रमशः 47 और 45 प्रतिशत की मूल्य वृद्धि हुई, जबकि किराया उपज में क्रमशः 55 और 60 आधार अंकों का सुधार हुआ।

प्रभाव

इस रुझान का सीधा असर निवेशकों पर पड़ रहा है, क्योंकि अब उन्हें संपत्ति के मूल्य वृद्धि और किराये की आय दोनों से लाभ मिल रहा है। पारंपरिक रूप से, निवेशकों को इन दोनों में से किसी एक पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता था, लेकिन अब कई शहरों में दोनों एक साथ बेहतर हो रहे हैं। विशेष रूप से एनसीआर और दक्षिणी शहरों में यह प्रवृत्ति अधिक स्पष्ट है।

रोजगार के अवसरों और बुनियादी ढांचे के विकास के कारण पेशेवरों का प्रवासन बढ़ा है, जिससे किराये की मांग मजबूत हुई है। इससे मकान मालिकों को अधिक किराया वसूलने में मदद मिली है, भले ही संपत्ति की कीमतें बढ़ रही हों। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रवृत्ति सभी आय वर्गों के लिए समान रूप से लाभकारी है, क्योंकि बढ़ती कीमतें पहली बार घर खरीदने वालों के लिए चुनौती पेश कर सकती हैं।

भविष्य का परिदृश्य

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि आर्थिक विकास और रोजगार सृजन की गति जारी रहती है, तो आने वाले वर्षों में भी घर की कीमतों और किराया उपज में एक साथ वृद्धि देखी जा सकती है। हालांकि, यदि ब्याज दरों में वृद्धि होती है या आर्थिक मंदी आती है, तो संपत्ति की कीमतों पर दबाव बन सकता है और किराया उपज में सुधार की गति धीमी पड़ सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जीसीसी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का विस्तार जारी रहने से मांग बनी रह सकती है, लेकिन यह अनिश्चित है कि क्या यह प्रवृत्ति सभी शहरों में एक समान रहेगी। यदि छोटे शहरों में भी इसी तरह का विकास होता है, तो निवेशकों के लिए अवसर बढ़ सकते हैं, लेकिन यदि कीमतें बहुत तेजी से बढ़ती हैं, तो किराया उपज पर फिर से दबाव बन सकता है।

स्रोत: livemint.com

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