मुख्य तथ्य
- कंपनी
- कोसोल एनर्जी
- मॉड्यूल प्रकार
- n-टाइप ग्लास-ग्लास हेल-रेसिस्टेंट
- ओलों का आकार
- 35mm
- वेरिएंट
- 600Wp, 620Wp, 630Wp
- मानक
- IEC 61215:2021
- DCR कॉन्फ़िगरेशन
- G12R, G12
पृष्ठभूमि
भारतीय सोलर मॉड्यूल निर्माता कोसोल एनर्जी ने एक नया n-टाइप ग्लास-ग्लास हेल-रेसिस्टेंट (ओलों से सुरक्षित) मॉड्यूल लॉन्च किया है। कंपनी के अनुसार, यह मॉड्यूल 35mm ओलों के प्रभाव परीक्षण के लिए योग्य है और NABL-अनुमोदित IEC प्रयोगशाला में सफल परीक्षण पास कर चुका है।
यह मॉड्यूल थर्मली टेम्पर्ड हाई-स्ट्रेंथ सोलर ग्लास से बना है, जो बेहतर यांत्रिक शक्ति और प्रभाव प्रतिरोध प्रदान करता है। साथ ही, इसमें पॉलीओलेफिन इलास्टोमर (POE) एनकैप्सुलेशन की अधिक मात्रा का उपयोग किया गया है, जिससे परिवहन, कंपन, थर्मल साइकलिंग और ओलों के प्रभाव के दौरान सोलर सेल्स को बेहतर सुरक्षा मिलती है।
वर्तमान स्थिति
नए मॉड्यूल 600Wp, 620Wp और 630Wp वेरिएंट में उपलब्ध हैं और IEC 61215:2021 मानकों के अनुरूप हैं। ये BIS-प्रमाणित डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (DCR) कॉन्फ़िगरेशन में भी उपलब्ध हैं, जिनमें G12R और G12 मॉडल शामिल हैं।
कोसोल एनर्जी के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक कल्पेश कलथिया ने कहा, "सोलर ऊर्जा का भविष्य केवल उच्च दक्षता पर निर्भर नहीं है, बल्कि बढ़ती चुनौतीपूर्ण मौसम स्थितियों के तहत दीर्घकालिक विश्वसनीयता पर भी निर्भर करता है। हमारे उन्नत n-टाइप ग्लास-टू-ग्लास मॉड्यूल असाधारण स्थायित्व प्रदान करने के लिए इंजीनियर किए गए हैं।"
| विवरण | कोसोल एनर्जी | LONGi | थोर्नोवा सोलर |
|---|---|---|---|
| मॉड्यूल नाम | नया हेल-रेसिस्टेंट मॉड्यूल | Hi-Mo 9 Ice-Shield | अनिर्दिष्ट |
| ओलों का आकार | 35mm | अनिर्दिष्ट | अनिर्दिष्ट |
| लॉन्च समय | अगस्त 2026 | इंटरसोलर यूरोप 2026 | मई 2026 |
प्रभाव
यह लॉन्च ऐसे समय में हुआ है जब कई सोलर मॉड्यूल निर्माता ओलों से सुरक्षित मॉड्यूल पेश कर रहे हैं। इस साल इंटरसोलर यूरोप में LONGi ने Hi-Mo 9 Ice-Shield मॉड्यूल पेश किया, जबकि मई में थोर्नोवा सोलर ने अपना मॉड्यूल लॉन्च किया।
अमेरिका में ओलों के तूफान सोलर PV परियोजनाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हैं। kWh Analytics की मई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सोलर PV परियोजनाओं में ओलों के कारण 73% वित्तीय नुकसान होता है, जबकि कुल घटनाओं में इसकी हिस्सेदारी केवल 6% है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि ओलों से सुरक्षित मॉड्यूल की मांग बढ़ती है, तो कोसोल एनर्जी को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है, खासकर DCR सेगमेंट में। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इन मॉड्यूल की कीमत पारंपरिक मॉड्यूल की तुलना में कितनी अधिक होगी।
यदि ओलों की घटनाएं बढ़ती हैं, तो बीमा कंपनियां हेल-रेसिस्टेंट मॉड्यूल के लिए प्रीमियम में छूट दे सकती हैं, जिससे इनकी मांग बढ़ सकती है। लेकिन यह संभावना तभी साकार होगी जब बाजार में इन मॉड्यूल की विश्वसनीयता साबित होगी।
स्रोत: pv-tech.org



