मुख्य तथ्य
- मामला
- म्यांमार आतंकी प्रशिक्षण मामला
- याचिकाकर्ता
- छह यूक्रेनी नागरिक (हुरबा पेट्रो सहित)
- अदालत
- दिल्ली हाईकोर्ट (खंडपीठ: न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन)
- फैसले की तारीख
- 4 अगस्त 2026
- जांच अवधि
- 90 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन
- गिरफ्तारी
- अप्रैल 2026 में एनआईए द्वारा
पृष्ठभूमि
म्यांमार आतंकी प्रशिक्षण मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अप्रैल 2026 में छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैंडिक को गिरफ्तार किया था। इन सभी पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था।
गिरफ्तारी के बाद से ये सभी न्यायिक हिरासत में हैं। एनआईए की जांच अवधि को 90 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन कर दिया गया था, जिसे यूक्रेनी नागरिकों ने चुनौती दी थी।
वर्तमान स्थिति
दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन शामिल थे, ने मंगलवार को यूक्रेनी नागरिकों की अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि एनआईए अधिनियम की धारा 21 के तहत यह अपील योग्य नहीं है।
अदालत ने कहा, "यह अदालत उपरोक्त निर्णयों से सहमत है कि यूएपीए की धारा 43डी(2) के तहत जांच के लिए समय बढ़ाने का आदेश एक अंतरिम आदेश है, जो एनआईए अधिनियम की धारा 21 के तहत अपील योग्य नहीं होगा।"
हालांकि, अदालत ने सैयद शाहिद यूसुफ मामले में स्थापित कानून की स्थिति दोहराई कि जांच की अवधि बढ़ाने का आदेश केवल धारा 482 सीआरपीसी/धारा 528 बीएनएसएस के तहत न्यायिक समीक्षा के अधीन होगा।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| याचिकाकर्ता | हुरबा पेट्रो और अन्य यूक्रेनी नागरिक |
| गिरफ्तारी की तारीख | अप्रैल 2026 |
| जांच अवधि | 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन |
| चुनौती दिया गया आदेश | 4 जून 2026 का एनआईए कोर्ट, पटियाला हाउस का आदेश |
| अपील की धारा | एनआईए अधिनियम की धारा 21 |
| एनआईए के वकील | राहुल त्यागी, जतिन खत्री, अमित रोहिला |
| याचिकाकर्ताओं के वकील | नित्या रामा कृष्णन, नितिन सलूजा |
प्रभाव
इस फैसले का सीधा असर यूक्रेनी नागरिकों पर पड़ा है, जिनकी अपील को खारिज कर दिया गया है। हालांकि, अदालत ने वरिष्ठ अधिवक्ता की ओर से किए गए अनुरोध पर अपील को धारा 482 सीआरपीसी/धारा 528 बीएनएसएस के तहत रिट याचिका के रूप में पुनः दर्ज करने की अनुमति दी है।
इसका मतलब है कि यूक्रेनी नागरिक अब अपनी याचिका को रिट याचिका के रूप में संबंधित रोस्टर बेंच के समक्ष पेश कर सकते हैं। इस फैसले से एनआईए की जांच प्रक्रिया पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ा है, लेकिन यह स्पष्ट करता है कि जांच अवधि बढ़ाने के आदेश को अपील के माध्यम से चुनौती नहीं दी जा सकती।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि यूक्रेनी नागरिक रिट याचिका दायर करते हैं, तो अदालत इस पर विचार कर सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि रिट याचिका पर कब सुनवाई होगी और क्या न्यायालय जांच अवधि बढ़ाने के आदेश को रद्द करेगा।
विशेष लोक अभियोजक राहुल त्यागी ने तर्क दिया था कि यह आदेश अंतरिम है और अपील योग्य नहीं है। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार कर लिया। भविष्य में, यदि इसी तरह के मामले आते हैं, तो अदालतें इस फैसले का उल्लेख कर सकती हैं।
यह संभावना है कि यूक्रेनी नागरिकों की ओर से रिट याचिका दायर की जाएगी, लेकिन इसका परिणाम क्या होगा, यह अदालत के विवेक पर निर्भर करेगा। फिलहाल, मामले की अगली सुनवाई की तारीख स्पष्ट नहीं है।
स्रोत: asiabulletin.com



