मुख्य तथ्य
- बैठक
- नई दिल्ली में विदेश मंत्री स्तरीय
- व्यापार
- लगभग एक अरब डॉलर
- सहयोग के क्षेत्र
- निर्माण, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, खनन
- एनएएम अध्यक्षता
- 2027-2029 के लिए भारत का समर्थन
- ब्रिक्स
- 2026 में भारत अध्यक्ष, उज्बेकिस्तान साझेदार
- आतंकवाद
- शून्य सहनशीलता की नीति
पृष्ठभूमि
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान को अपने विस्तारित पड़ोस का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। दोनों देशों के बीच लोगों, विचारों और व्यापार का आदान-प्रदान लगातार होता रहा है।
आधुनिक समय में दोनों देशों के राजनीतिक और संस्थागत स्तर पर नियमित संपर्क रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति के प्रति विशेष सम्मान रखते हैं। दोनों देशों के नेताओं के बीच करीबी संवाद बना हुआ है।
वर्तमान स्थिति
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को नई दिल्ली में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और सहयोग के नए क्षेत्रों में विस्तार पर चर्चा हुई। जयशंकर ने विश्वास जताया कि यह बैठक भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को और मजबूत करने में योगदान देगी।
दोनों देशों के बीच वर्तमान में निर्माण, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग है। भारत इन संबंधों को खनन क्षेत्र तक आगे ले जाना चाहता है। दोनों देशों के बीच करीब एक अरब डॉलर का व्यापार होता है, जिसे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
प्रभाव
जयशंकर ने कहा कि भारत ने भारत-उज्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह का गठन किया है। इससे दोनों देशों के जनप्रतिनिधियों के बीच नियमित संवाद बढ़ने की उम्मीद है, जिससे संस्थागत सहयोग को गति मिल सकती है।
आतंकवाद, उग्रवाद और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दों पर दोनों देश सहयोग करते हैं। भारत उज्बेकिस्तान के आतंकवाद के खिलाफ रुख की सराहना करता है। दोनों देशों ने आतंकवाद को पनाह देने वाली गतिविधियों और सीमा पार आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई है।
भविष्य की संभावनाएँ
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
जयशंकर ने उज्बेकिस्तान को वर्ष 2027 से 2029 तक गुटनिरपेक्ष आंदोलन (एनएएम) की अध्यक्षता के लिए भारत के समर्थन का आश्वासन दिया। यदि यह समर्थन जारी रहता है, तो दोनों देशों के बीच बहुपक्षीय सहयोग और मजबूत हो सकता है।
इस वर्ष भारत ब्रिक्स का अध्यक्ष है। जयशंकर ने ब्रिक्स की गतिविधियों में साझेदार देश के रूप में उज्बेकिस्तान के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। यदि दोनों देश व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिल सकती है।
स्रोत: DD News



