मुख्य तथ्य
- परियोजनाएं
- दो POWERGRID ट्रांसमिशन परियोजनाएं समर्पित, एक की आधारशिला रखी गई
- कुरनूल विंड/सोलर जोन (भाग ए और बी)
- लगभग 3,547 करोड़ रुपये का निवेश
- अनंतपुर (2,500 मेगावाट) और कुरनूल (1,000 मेगावाट) सौर क्षेत्र
- लगभग 823 करोड़ रुपये का निवेश
- कुरनूल-IV आरईजेड चरण-एक
- अनुमानित लागत 5,550 करोड़ रुपये, 4.5 गीगावाट क्षमता
- लक्ष्य
- 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता
- POWERGRID परिचालन (30 जून 2026 तक)
- 291 सबस्टेशन, 1,86,595 सर्किट किलोमीटर लाइनें, 6,34,516 एमवीए ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता
पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश में दो POWERGRID ट्रांसमिशन परियोजनाओं को समर्पित किया और तीसरी नवीकरणीय ऊर्जा ट्रांसमिशन परियोजना की आधारशिला रखी। ये परियोजनाएं देश की हरित ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करने और राष्ट्रीय ग्रिड में नवीकरणीय बिजली के एकीकरण में सहायता करने के उद्देश्य से विकसित की गई हैं।
ये परियोजनाएं विद्युत मंत्रालय के अधीन महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (POWERGRID) द्वारा विकसित की गई हैं। इनका उद्देश्य आंध्र प्रदेश के कुरनूल और अनंतपुर नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में उत्पन्न नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी को सुगम बनाना है।
वर्तमान स्थिति
आधिकारिक बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कुरनूल पवन ऊर्जा क्षेत्र/सौर ऊर्जा क्षेत्र (भाग ए और भाग बी) के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली समर्पित की, जिसे लगभग 3,547 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने अनंतपुर (2,500 मेगावाट) और कुरनूल (1,000 मेगावाट) में सौर ऊर्जा क्षेत्रों के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली भी समर्पित की, जिसे लगभग 823 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है।
प्रधानमंत्री ने कुरनूल-IV नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र (आरईजेड) चरण-एक परियोजना के एकीकरण के लिए ट्रांसमिशन प्रणाली की आधारशिला भी रखी। यह परियोजना लगभग 5,550 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित की जाएगी, जो कुरनूल नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से अतिरिक्त 4.5 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय ग्रिड में एकीकृत करने के लिए अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करेगी।
| परियोजना | लागत (करोड़ रुपये) | क्षमता |
|---|---|---|
| कुरनूल विंड/सोलर जोन (भाग ए और बी) | 3,547 | — |
| अनंतपुर और कुरनूल सौर क्षेत्र | 823 | 2,500 मेगावाट + 1,000 मेगावाट |
| कुरनूल-IV आरईजेड चरण-एक | 5,550 | 4.5 गीगावाट |
प्रभाव
इन ट्रांसमिशन प्रणालियों के चालू होने से इन क्षेत्रों में उत्पन्न नवीकरणीय बिजली का राष्ट्रीय ग्रिड में निर्बाध स्थानांतरण संभव हो सकेगा। इससे देश के विभिन्न हिस्सों में बिजली की आपूर्ति को लाभ होगा, क्योंकि नवीकरणीय ऊर्जा को अधिक कुशलता से वितरित किया जा सकेगा।
बयान के अनुसार, इन दो ट्रांसमिशन परियोजनाओं और नई आरईजेड ट्रांसमिशन प्रणाली के चालू होने से 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता के भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में योगदान मिलने की उम्मीद है। यह देश के नवीकरणीय ऊर्जा ट्रांसमिशन नेटवर्क को बेहतर बनाकर संभव होगा।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि ये परियोजनाएं समय पर पूरी हो जाती हैं, तो वे भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, परियोजनाओं के पूरा होने की समयसीमा और उनके वास्तविक लाभ स्पष्ट नहीं हैं, क्योंकि आधिकारिक बयान में इनके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
आगे देखते हुए, यदि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों से बिजली की निकासी सुचारू रूप से होती है, तो इससे ग्रिड स्थिरता में सुधार हो सकता है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो सकती है। वैकल्पिक रूप से, यदि ट्रांसमिशन बुनियादी ढांचे में देरी होती है, तो नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो पाने की संभावना है।
स्रोत: hindustantimes.com
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परियोजना लागत और क्षमता
कुरनूल-IV आरईजेड चरण-एक5,550
सटीक आंकड़े देखें
| श्रेणी | लागत (करोड़ रुपये) |
|---|---|
| कुरनूल विंड/सोलर जोन (भाग ए और बी) | 3,547 |
| अनंतपुर और कुरनूल सौर क्षेत्र | 823 |
| कुरनूल-IV आरईजेड चरण-एक | 5,550 |
स्रोत:hindustantimes.com स्रोत-समर्थित



