मुख्य तथ्य
- सह-संस्थापक
- संजय दत्त और पारेश घेलानी
- विकास अवधि
- चार वर्ष (तरल), दो वर्ष (बोतल डिजाइन)
- डिस्टिलरी
- फ्रांस में 25 से अधिक डिस्टिलरियों का दौरा
- मुंबई साझेदारी
- BMW 7 सीरीज़ के साथ जिम्मेदार नाइटलाइफ़
- बाजार विस्तार
- मुंबई, गोवा, एनसीआर/गुरुग्राम
- अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार
- तरल और बोतल डिजाइन के लिए कई पुरस्कार
पृष्ठभूमि
अभिनेता संजय दत्त और उद्यमी पारेश घेलानी द्वारा सह-स्थापित TIGERFIRE वोदका ने बाजार में प्रवेश किया है। यह ब्रांड पारंपरिक सेलिब्रिटी समर्थन के बजाय पूरी तरह से संस्थापक-नेतृत्व वाले उद्यम के रूप में उभरा है। दत्त और घेलानी के बीच दशकों पुरानी दोस्ती ने इस ब्रांड की नींव रखी है।
उत्पाद लॉन्च से पहले चार वर्षों का गहन विकास चक्र पूरा किया गया। फ्रांस की कई डिस्टिलरियों में तरल फॉर्मूलेशन को परिष्कृत किया गया। बोतल के डिजाइन पर दो साल का काम हुआ, जिसे 'आर्किटेक्चर' के रूप में देखा गया। ब्रांड का उद्देश्य हाई-एंड वोदका सेगमेंट में अलग पहचान बनाना है।
वर्तमान स्थिति
TIGERFIRE वोदका ने मुंबई में ICW 2026 में भाग लिया और कई बार टेकओवर किए। मुंबई और गोवा के नाइटलाइफ़ केंद्रों से शुरू करके ब्रांड ने एनसीआर/गुरुग्राम बाजार में विस्तार किया है। कंपनी का कहना है कि वह जानबूझकर धीमी लेकिन सुनियोजित रणनीति अपना रही है।
मुंबई में ब्रांड ने BMW के साथ साझेदारी की, जिसमें मेहमानों को 7 सीरीज़ की गाड़ियों में शहर भर में ले जाया गया। इसका उद्देश्य जिम्मेदार शराब पीने को बढ़ावा देना था। ब्रांड ने बांद्रा बोर्न, लेट चेकआउट और एईआर जैसे प्रतिष्ठित आउटलेट्स में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
| विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| तरल विकास अवधि | 4 वर्ष |
| बोतल डिजाइन अवधि | 2 वर्ष |
| दौरा की गई डिस्टिलरियां | 25 से अधिक |
| मुंबई में भागीदारी वाले आउटलेट | 3 (बांद्रा बोर्न, लेट चेकआउट, एईआर) |
प्रभाव
TIGERFIRE का दृष्टिकोण भारत में वोदका को एक प्रीमियम स्पिरिट के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, जिसे सिर्फ मिक्सर के रूप में नहीं देखा जाए। कंपनी का मानना है कि अगर वोदका में असली कैरेक्टर हो, तो उपभोक्ता इसे सिंगल माल्ट की तरह सिप करना शुरू कर देंगे।
ब्रांड की रणनीति का असर उन बार और क्राफ्ट कॉकटेल प्रोग्राम्स पर दिख रहा है जो पहले वॉल्यूम बार के बजाय TIGERFIRE को अपना रहे हैं। कंपनी का कहना है कि यह बदलाव शुरू हो चुका है। हालांकि, भारत के अल्कोबेव उद्योग में राज्य-वार नियमों और उत्पाद शुल्क संरचनाओं की जटिलता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
TIGERFIRE के सीईओ बादल मोराडिया ने कहा कि अगले 12 से 18 महीनों में ब्रांड कई नई पहलों पर काम कर रहा है जो वैश्विक स्तर पर वोदका सेगमेंट को ऊपर उठाएंगी। हालांकि, उन्होंने विस्तृत जानकारी साझा नहीं की।
कंपनी को अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं, लेकिन मोराडिया ने कहा कि वे ट्रॉफियों के लिए ब्रांड नहीं बनाते। यदि ब्रांड अपनी वर्तमान नींव को मजबूत करता है, तो वह पोर्टफोलियो विविधीकरण या अंतरराष्ट्रीय निर्यात बाजारों में प्रवेश कर सकता है। यदि नियामक चुनौतियां बनी रहती हैं, तो विस्तार की गति धीमी रह सकती है।
स्रोत: adgully.com



