मुख्य तथ्य
- घटना
- अनुच्छेद 370 हटाने की सातवीं वर्षगांठ पर राजनीतिक बयानबाजी
- भाजपा का दावा
- अशोक कौल ने कहा कि व्यवस्था पटरी पर है, लोग बिना बाधा के रह सकते हैं
- पीडीपी की मांग
- महबूबा मुफ्ती ने अनुच्छेद 370 और 35ए बहाल करने की मांग की
- नेशनल कॉन्फ्रेंस की मांग
- सज्जाद शाहीन ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की
- विरोध प्रदर्शन
- श्रीनगर में मोमबत्ती जलाकर विरोध
- तुलना
- जम्मू-कश्मीर में विकास, पीओजेके में अशांति की खबरें
पृष्ठभूमि
पांच अगस्त 2026 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं वर्षगांठ है। इस अवसर पर राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट की है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस कदम को क्षेत्र के विकास और सुरक्षा के लिए लाभकारी बताया है, जबकि विपक्षी दलों ने विशेष दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई है।
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था, और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू-कश्मीर और लद्दाख – में विभाजित कर दिया गया था। इस फैसले के बाद से क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां और विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
वर्तमान स्थिति
भाजपा के जम्मू-कश्मीर प्रभारी अशोक कौल ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद क्षेत्र में व्यवस्था पटरी पर लौट आई है। उन्होंने कहा, "पहले लोग स्वतंत्र रूप से आ-जा नहीं सकते थे और व्यापार ठीक से नहीं कर पाते थे; आज यह बदल गया है। लोग अब व्यापार कर सकते हैं और अपनी दुकानें देर रात तक खुली रख सकते हैं। वे बिना किसी बाधा के अपनी दैनिक गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं।"
कौल ने यह भी कहा कि विशेष दर्जा खत्म होने से शिक्षा और जन आवागमन में आने वाली बाधाएं दूर हुई हैं। उन्होंने कहा, "हमारे बच्चे और युवा, जो पहले स्कूल, विश्वविद्यालय या कॉलेज नहीं जा पाते थे, अब आसानी से जा सकते हैं। हमने इसके लिए कश्मीर और पूरे देश में भव्य समारोह आयोजित करने का फैसला किया है।"
इसके विपरीत, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने मंगलवार को श्रीनगर में मोमबत्ती जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नीत सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा "लूटा" है और अनुच्छेद 370 तथा 35ए की बहाली की मांग की।
| दल/नेता | स्थिति | मुख्य मांग |
|---|---|---|
| भाजपा (अशोक कौल) | समर्थन | व्यवस्था सुधरी, विकास जारी |
| पीडीपी (महबूबा मुफ्ती) | विरोध | अनुच्छेद 370 और 35ए बहाल करें |
| नेशनल कॉन्फ्रेंस (सज्जाद शाहीन) | विरोध | राज्य का दर्जा बहाल करें |
प्रभाव
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अनुच्छेद 370 केवल एक संवैधानिक प्रावधान नहीं था, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहचान और अधिकारों का प्रतीक था। उन्होंने कहा, "अनुच्छेद 370 सिर्फ एक अनुच्छेद नहीं था। यह हमारी पहचान, हमारा सम्मान, हमारा गौरव और हमारी जमीन तथा नौकरियों की सुरक्षा थी। उन्होंने हमें पूरी तरह बेकार कर दिया है।"
नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक सज्जाद शाहीन ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में और सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे के जरिए राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था, जिसे पूरा किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट के अनुसार, अनुच्छेद 370 हटने के सात साल बाद जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) की स्थितियां अलग हैं। जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे का विस्तार, बेहतर सार्वजनिक सेवाएं और अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण माहौल देखा जा रहा है, जबकि पीओजेके में शासन, विकास, आर्थिक कठिनाई और नागरिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंधों को लेकर चिंताएं जारी हैं।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि केंद्र सरकार राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा पूरा करती है, तो जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक स्थिरता और बेहतर हो सकती है। हालांकि, यदि विपक्षी दलों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो विरोध प्रदर्शन जारी रह सकते हैं।
अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली की मांग को लेकर राजनीतिक गतिरोध बना रह सकता है। यदि सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत होती है, तो समाधान की संभावना है, अन्यथा स्थिति यथावत बनी रह सकती है।
पीओजेके में स्थितियों में सुधार होता है या नहीं, यह वहां के प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय दबाव पर निर्भर करेगा। फिलहाल, दोनों क्षेत्रों के बीच असमानता बनी रह सकती है।
स्रोत: webindia123.com



