मुख्य तथ्य
- लाभार्थी कर्मचारी
- 3,276
- न्यूनतम सेवा अवधि
- 10 वर्ष (30 जून 2026 तक)
- सरकारी प्रस्ताव की तारीख
- 4 अगस्त 2026
- मंत्रिमंडल की मंजूरी
- 2 जुलाई 2026
- अधिकतम सेवा आयु
- 58 वर्ष
- लाभ
- न्यूनतम मूल वेतन, महंगाई भत्ता, यात्रा भत्ता
पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत दीर्घकालिक संविदा कर्मियों के मुद्दों के समाधान के लिए एक विशेष कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने 2 जुलाई को हुई बैठक में इस संबंध में अनुमोदन दिया था, जिसके बाद स्कूल शिक्षा और खेल विभाग ने 4 अगस्त को सरकारी प्रस्ताव जारी किया।
यह निर्णय एक सरकार-गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है, जिसने संविदा कर्मियों की समस्याओं की जांच की थी और नवंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। समिति की रिपोर्ट के बाद ही यह कदम उठाया गया है।
वर्तमान स्थिति
महाराष्ट्र सरकार ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत 3,276 संविदा कर्मियों के लिए सुपरन्यूमररी पदों के सृजन को मंजूरी दी है। यह निर्णय उन कर्मियों पर लागू होगा, जिन्होंने 30 जून 2026 तक कम से कम 10 वर्षों की संविदा सेवा पूरी कर ली है। सरकार ने इसे एकमुश्त विशेष उपाय बताया है।
पात्र कर्मियों को तुलनीय नियमित सरकारी पदों के समकक्ष वेतनमान में नियुक्ति दी जाएगी। वेतनमान का निर्धारण कार्य की प्रकृति, कर्तव्यों, जिम्मेदारियों, योग्यता और लागू सेवा नियमों के आधार पर किया जाएगा। सातवें वेतन आयोग की अनुशंसाओं को ध्यान में रखते हुए समकक्ष वेतनमान तय करने का निर्देश दिया गया है।
इन कर्मियों को समकक्ष पद का न्यूनतम मूल वेतन मिलेगा, जबकि उनका मौजूदा वेतन संरक्षित रहेगा। इसके अलावा, वे महंगाई भत्ता और यात्रा भत्ता के भी हकदार होंगे। हालांकि, नए सृजित पदों पर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| लाभार्थी कर्मचारियों की संख्या | 3,276 |
| न्यूनतम सेवा अवधि | 10 वर्ष |
| कट-ऑफ तिथि | 30 जून 2026 |
| मंत्रिमंडल की मंजूरी | 2 जुलाई 2026 |
| सरकारी प्रस्ताव | 4 अगस्त 2026 |
| अधिकतम सेवा आयु | 58 वर्ष |
प्रभाव
इस निर्णय से दीर्घकालिक संविदा कर्मियों को वित्तीय सुरक्षा और सेवा स्थिरता मिलने की उम्मीद है, लेकिन उन्हें पूर्ण नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। सुपरन्यूमररी पदों पर नियुक्त कर्मचारी प्रोन्नति, निश्चित कैरियर प्रगति लाभ, पेंशन या पारिवारिक पेंशन के पात्र नहीं होंगे।
ये पद कर्मियों के व्यक्तिगत होंगे और कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने, इस्तीफा देने, मृत्यु या किसी अन्य कारण से पद खाली होने पर समाप्त हो जाएंगे। ऐसी रिक्तियों पर कोई नई नियुक्ति नहीं की जाएगी। इन पदों पर अधिकतम सेवा आयु 58 वर्ष निर्धारित की गई है, हालांकि वित्त विभाग की मंजूरी से कुछ मामलों में विशेष निर्णय लिए जा सकते हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह उपाय असाधारण है और इसे अन्य सरकारी योजनाओं या विभागों के कर्मचारियों के लिए उदाहरण के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। भविष्य में समग्र शिक्षा अभियान के तहत जनशक्ति की आवश्यकता केवल आउटसोर्सिंग या सेवा अनुबंधों के माध्यम से पूरी की जाएगी।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि यह निर्णय लागू होता है, तो 3,276 संविदा कर्मियों को तुरंत लाभ मिल सकता है, लेकिन उन्हें पेंशन और प्रोन्नति जैसे दीर्घकालिक लाभ नहीं मिलेंगे। इससे उनकी वित्तीय स्थिति में सुधार हो सकता है, लेकिन पूर्ण नियमितीकरण की मांग बनी रह सकती है।
सरकार के इस रुख से अन्य योजनाओं के संविदा कर्मियों में असंतोष बढ़ सकता है, क्योंकि उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह एकमुश्त उपाय है और भविष्य में ऐसी मांगों से बचने के लिए आउटसोर्सिंग नीति अपनाई जाएगी।
यदि वित्त विभाग कुछ मामलों में विशेष अनुमति देता है, तो सेवा आयु सीमा में छूट मिल सकती है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि किन परिस्थितियों में ऐसा होगा। कुल मिलाकर, यह कदम संविदा कर्मियों को आंशिक राहत देता है, लेकिन उनकी मूल मांगों का समाधान नहीं करता।
स्रोत: freepressjournal.in



