मुख्य तथ्य
- दोषी की उम्र
- 66 वर्ष (अपराध के समय 59 वर्ष)
- पीड़िता की उम्र
- 14 वर्ष
- सजा
- 20 वर्ष कठोर कारावास और 5,000 रुपये जुर्माना
- मुआवजा
- 1,00,000 रुपये
- अपराध का स्थान
- फेंतेजोन बीएम गांव, त्सेमिन्यू
- अपराध का वर्ष
- 2019
पृष्ठभूमि
कोहिमा, 4 अगस्त: नागालैंड के त्सेमिन्यू जिले में 2019 में एक 14 वर्षीय बच्ची से बलात्कार के मामले में एक 66 वर्षीय व्यक्ति को POCSO अदालत ने 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि 'बच्ची पीड़िता की भेद्यता एक महत्वपूर्ण गंभीर परिस्थिति है', जो दोषी की दया याचिका से अधिक भारी है।
यह मामला त्सेमिन्यू जिले के फेंतेजोन बीएम गांव का है, जहां आरोपी ने 16 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार किया था। घटना के समय आरोपी की उम्र 59 वर्ष थी।
वर्तमान स्थिति
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-विशेष न्यायाधीश (POCSO) मेज़िवोलु टी थेरीह, NJS ने 3 अगस्त को नगाबू केंट को दोषी ठहराया और 4 अगस्त को सजा सुनाई। अदालत ने केंट को 20 साल के कठोर कारावास और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई, जुर्माना न देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास होगा।
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) लागू की, जो 2019 में अपराध के समय प्रभावी थी और POCSO अधिनियम की धारा 42 के तहत अधिक सजा का प्रावधान करती है। सजा सुनाते समय अदालत ने कहा कि 'दोषी की ओर से दी गई दया याचिकाएं 16 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के खिलाफ अपराध की गंभीरता से अधिक भारी नहीं हो सकतीं।'
| विवरण | मान |
|---|---|
| दोषी की उम्र | 66 वर्ष |
| अपराध के समय आरोपी की उम्र | 59 वर्ष |
| पीड़िता की उम्र | 14 वर्ष |
| सजा | 20 वर्ष कठोर कारावास |
| जुर्माना | 5,000 रुपये |
| जुर्माना न देने पर अतिरिक्त सजा | 1 वर्ष साधारण कारावास |
| मुआवजा | 1,00,000 रुपये |
प्रभाव
अदालत ने कहा कि पीड़िता को 'गंभीर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक आघात' सहना पड़ा, जिसके परिणाम अपरिवर्तनीय हैं। अदालत ने बच्ची की भेद्यता को एक महत्वपूर्ण गंभीर परिस्थिति माना।
अदालत ने राज्य सरकार को CrPC की धारा 357A के तहत पीड़ित मुआवजा योजना के अनुसार 1,00,000 रुपये जारी करने का निर्देश दिया। कोहिमा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को मुआवजा राशि के वितरण की निगरानी और सुविधा का कार्य सौंपा गया।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि दोषी जुर्माना अदा नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त एक वर्ष का साधारण कारावास भुगतना होगा। यह स्पष्ट नहीं है कि दोषी इस सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेगा या नहीं।
यदि पीड़िता को मुआवजा समय पर मिलता है, तो उसे कुछ हद तक आर्थिक सहायता मिल सकती है, लेकिन अदालत ने जिस अपरिवर्तनीय आघात का उल्लेख किया है, उसके दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन अभी संभव नहीं है।
स्रोत: morungexpress.com



