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क्या वन नेशन सरकारी पार्टी बन पाएगी या मतदाता ही बाधा बनेंगे?

पॉलीन हैनसन का सवालों पर रोक लगाना वन नेशन के लिए निर्णायक मोड़ है। पार्टी आंदोलन बनी रहे या सत्ता की पार्टी बने, यह उसके मतदाताओं की अपेक्षाओं पर निर्भर करेगा।

क्या वन नेशन सरकारी पार्टी बन पाएगी या मतदाता ही बाधा बनेंगे?
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

पार्टी
वन नेशन
नेता
पॉलीन हैनसन
घटना
प्रेस कार्यक्रमों से सवाल पूछने वाले पत्रकारों पर प्रतिबंध
प्रभावित मीडिया
एबीसी, नाइन मास्टहेड्स, गार्डियन ऑस्ट्रेलिया, क्रिकी
मुद्दा
पार्टी का आंदोलन बने रहना या सरकारी पार्टी बनना

पृष्ठभूमि

ऑस्ट्रेलिया की दक्षिणपंथी पार्टी वन नेशन इन दिनों एक अहम मोड़ पर है। पार्टी की प्रमुख पॉलीन हैनसन ने प्रेस कार्यक्रमों से सवाल पूछने वाले पत्रकारों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या पार्टी अब सरकार में हिस्सेदारी की ओर बढ़ेगी या फिर विरोध प्रदर्शनों की पार्टी बनी रहेगी।

क्रिकी डॉट कॉम डॉट एयू की रिपोर्ट के अनुसार, हैनसन का यह कदम उन पत्रकारों को निशाना बनाता है जो वन नेशन से सवाल-जवाब और जवाबदेही की उम्मीद करते हैं। इनमें एबीसी, नाइन मास्टहेड्स, गार्डियन ऑस्ट्रेलिया और क्रिकी के पत्रकार शामिल हैं।

वर्तमान स्थिति

वन नेशन के सामने अभी दो रास्ते हैं। एक तो यह कि वह पहले की तरह एक आंदोलन बनी रहे, जो भावनात्मक मुद्दों को उठाकर अपने समर्थकों को जुटाती है। दूसरा रास्ता यह है कि वह सत्ता की पार्टी बनने की कोशिश करे, जिसमें समझौते और गठबंधन की राजनीति करनी पड़ेगी।

हैनसन का पत्रकारों पर प्रतिबंध लगाना यह संकेत देता है कि वह आलोचना और सवालों से बचना चाहती हैं। यह स्थिति पार्टी के भविष्य को लेकर असमंजस पैदा करती है, क्योंकि एक तरफ उसके मतदाता उससे कट्टर रुख की उम्मीद करते हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी पार्टी बनने के लिए उसे नरम रुख अपनाना पड़ सकता है।

प्रभाव

अगर वन नेशन सरकारी पार्टी बनने का रास्ता चुनती है, तो उसे अपने मतदाताओं की अपेक्षाओं से समझौता करना पड़ सकता है। उसके कट्टर समर्थक उसे नरम पड़ता देखकर निराश हो सकते हैं, जिससे पार्टी का जनाधार कमजोर पड़ सकता है।

दूसरी तरफ, अगर वह आंदोलन की तरह ही काम करती रहती है, तो उसे सत्ता में हिस्सेदारी के अवसर गंवाने पड़ सकते हैं। पत्रकारों पर प्रतिबंध से मीडिया और जनता के बीच पार्टी की छवि पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं माना जाता।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

वन नेशन का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह किस रास्ते को चुनती है। यदि वह सरकारी पार्टी बनने का फैसला करती है, तो उसे अपनी नीतियों में लचीलापन लाना होगा और गठबंधन की राजनीति में शामिल होना पड़ सकता है। ऐसे में उसके कुछ कट्टर समर्थक उससे दूर हो सकते हैं, लेकिन उसे व्यापक जनसमर्थन मिल सकता है।

अगर वह आंदोलन की तरह ही बनी रहती है, तो उसका प्रभाव सीमित रह सकता है, लेकिन उसके समर्थकों में उसकी पकड़ मजबूत बनी रहेगी। यह भी संभावना है कि पार्टी दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करे, लेकिन यह देखना होगा कि उसके मतदाता इसे कैसे लेते हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वन नेशन किस दिशा में जाएगी।

स्रोत: crikey.com.au

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