मुख्य तथ्य
- किरा कजिन्स
- 23 वर्षीय, एयरड्री, स्कॉटलैंड; नौ महीने तक नकली प्रेग्नेंसी, गुड़िया को बच्चा बताया
- लिब्बी वर्नन
- 23 वर्षीय, स्टैफोर्डशायर; 13 महीने तक झूठी प्रेग्नेंसी, जुड़वां बच्चों का दावा
- सजा
- वर्नन को छह महीने जेल और दो साल का प्रतिबंधात्मक आदेश
- AI टूल्स
- मिडजर्नी, स्टेबल डिफ्यूजन, DALL-E 3, लूमा
- विशेषज्ञ
- डॉ. अब्दुल्लाही अराबो, डॉ. सैंड्रा व्हीटली
पृष्ठभूमि
ब्रिटेन में हाल के महीनों में नकली प्रेग्नेंसी और बच्चे के जन्म की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें महिलाओं ने अपने परिवार और साथी को धोखा दिया। स्कॉटलैंड के एयरड्री की 23 वर्षीय किरा कजिन्स ने पूरे नौ महीने तक प्रेग्नेंसी का नाटक किया और परिवार को एक गुड़िया को अपनी नवजात बेटी बताकर धोखा दिया।
इसी तरह, स्टैफोर्डशायर की 23 वर्षीय लिब्बी वर्नन ने 13 महीने तक एक ऑनलाइन साथी को झूठी प्रेग्नेंसी और बच्चे के जन्म की कहानी सुनाई। इन घटनाओं में नकली स्कैन और फोटो का इस्तेमाल किया गया, लेकिन अब विशेषज्ञों का कहना है कि AI तकनीक इन धोखाधड़ियों को और आसान बना रही है।
वर्तमान स्थिति
किरा कजिन्स ने अपने परिवार और साथी जेमी गार्डनर को धोखा देने के लिए नकली स्कैन साझा किए, एक भव्य बेबी शावर आयोजित किया, और माना जाता है कि AI-जनित वीडियो का इस्तेमाल किया जिसमें 'बच्चा' उसके गर्भ में लात मारता दिख रहा था। उसने बताया कि अस्पताल के अपॉइंटमेंट और दिल की बीमारी का पता चलने की झूठी जानकारी दी।
लिब्बी वर्नन ने नवंबर 2023 में अपने साथी को नकली बेबी फोटो भेजीं और बाद में बेटी एथेना के जन्म और उसकी मौत की झूठी कहानी बनाई। उसने दूसरी बार जुड़वां बच्चों की प्रेग्नेंसी का दावा किया, लेकिन अस्पताल में स्कैन कराने पर पता चला कि वह नकली बेबी बंप पहने हुए थी। वर्नन ने दस आरोपों में दोषी ठहराए जाने के बाद छह महीने की जेल और दो साल का प्रतिबंधात्मक आदेश पाया।
| विवरण | किरा कजिन्स | लिब्बी वर्नन |
|---|---|---|
| उम्र | 23 | 23 |
| स्थान | एयरड्री, स्कॉटलैंड | स्टैफोर्डशायर |
| अवधि | पूरे नौ महीने | 13 महीने |
| नकली सामग्री | स्कैन, AI वीडियो, गुड़िया | फोटो, डेथ सर्टिफिकेट, बेबी बंप |
| परिणाम | पकड़ी गईं | छह महीने जेल, दो साल प्रतिबंध |
प्रभाव
इन धोखाधड़ियों का सबसे गहरा असर पीड़ितों पर पड़ा है। लिब्बी वर्नन के साथी ने अदालत में कहा कि वह उन बच्चों के लिए शोक मना रहा है जो कभी अस्तित्व में नहीं थे। उसने बताया कि जब जुड़वां बच्चों का जन्म होना था, उस समय वह भावनात्मक रूप से बहुत परेशान था।
विशेषज्ञों के अनुसार, AI टूल्स जैसे मिडजर्नी, स्टेबल डिफ्यूजन, DALL-E 3 और लूमा की मदद से अब कोई भी व्यक्ति कुछ ही सेकंड में यथार्थवादी मैटरनिटी फोटो या वीडियो बना सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ द वेस्ट ऑफ इंग्लैंड के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अब्दुल्लाही अराबो ने चेतावनी दी है कि इन टूल्स पर नियंत्रण करना मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि तकनीक नियमों से तेजी से विकसित हो रही है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि AI की मदद से इस तरह की धोखाधड़ी के मामले बढ़ सकते हैं। डॉ. अराबो ने कहा कि हर दिन तकनीक और शक्तिशाली हो रही है और जो लोग इसका दुरुपयोग करना चाहते हैं, वे रास्ता खोज लेंगे। यदि AI वीडियो की गुणवत्ता में सुधार जारी रहता है, तो नकली सामग्री को पहचानना और मुश्किल हो सकता है।
मनोवैज्ञानिक डॉ. सैंड्रा व्हीटली के अनुसार, नकली प्रेग्नेंसी अक्सर गहरी मनोवैज्ञानिक जरूरतों या आघात से उपजती है। वह कहती हैं कि लगभग 80% मामलों में यह उन चीजों की कमी से जुड़ा होता है जो उनके जीवन में मौजूद नहीं हैं। यदि इन लोगों को सही मार्गदर्शन और सहायता मिले, तो उनकी भावनात्मक ताकत को सकारात्मक दिशा में मोड़ा जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि AI के बढ़ते उपयोग से ऐसे मामलों में वृद्धि होगी या नहीं, लेकिन विशेषज्ञों को आशंका है कि यह प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
स्रोत: mirror.co.uk
खबर को बेहतर समझें
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धोखाधड़ी की घटनाओं की समयरेखा
- 01
लिब्बी ने नकली बेबी फोटो भेजीं
लिब्बी वर्नन ने अपने साथी को नकली बेबी फोटो भेजीं
- 02
किरा की नकली प्रेग्नेंसी
किरा ने नौ महीने तक नकली प्रेग्नेंसी और बच्चे के जन्म का नाटक किया
स्रोत:मिरर की रिपोर्ट से स्रोत-समर्थित



