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उत्तराखंड के छात्र लकी रावत उत्तरी ध्रुव के अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अभियान में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे

उत्तराखंड के चकराता निवासी लकी रावत को 10 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अभियान 'आइसब्रेकर ऑफ नॉलेज' के लिए भारत का प्रतिनिधि चुना गया है। यह अभियान रूस के मुरमान्स्क से परमाणु आइसब्रेकर जहाज पर शुरू हुआ है।

उत्तराखंड के छात्र लकी रावत उत्तरी ध्रुव के अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अभियान में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

छात्र का नाम
लकी रावत
गृह स्थान
चकराता, उत्तराखंड
अभियान का नाम
आइसब्रेकर ऑफ नॉलेज
अवधि
10 दिन
प्रारंभिक स्थान
मुरमान्स्क, रूस
भाग लेने वाले देश
22 देश

पृष्ठभूमि

उत्तराखंड के चकराता निवासी लकी रावत को 10 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक और शैक्षिक अभियान 'आइसब्रेकर ऑफ नॉलेज' में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है। यह अभियान रूस के मुरमान्स्क स्थित एफएसयूई एटमफ्लोट बेस पर परमाणु आइसब्रेकर '50 लेट पोबेडी' पर औपचारिक रूप से शुरू किया गया।

इस अभियान में 22 देशों के 14 से 16 वर्ष की आयु के स्कूली छात्र भाग ले रहे हैं, जिनमें भारत, बांग्लादेश, चीन और रूस शामिल हैं। प्रतिभागी मुरमान्स्क से भौगोलिक उत्तरी ध्रुव के लिए रवाना हुए हैं और 90 डिग्री उत्तरी अक्षांश पर पहुंचने के बाद लौटने का कार्यक्रम है।

वर्तमान स्थिति

लकी रावत ने एएनआई से बातचीत में कहा कि वह इस अभियान में भारत के राजदूत के रूप में आए हैं। उन्होंने कहा, 'मैं उत्तराखंड के चकराता से हूं और इस अभियान के लिए भारत के राजदूत के रूप में यहां आया हूं। यह 10 दिन का अभियान है जिसमें हम उत्तरी ध्रुव की यात्रा करेंगे। हम उन बहुत कम लोगों में से होंगे जो वास्तव में उत्तरी ध्रुव तक पहुंचे हैं।'

चयन प्रक्रिया के बारे में रावत ने बताया कि प्रतिभागियों को तीन चरणों की प्रतियोगिता पास करनी थी, जिसके बाद प्रत्येक भाग लेने वाले देश से एक छात्र का चयन किया गया। उन्होंने कहा, 'यहां आने के लिए हमें तीन चरणों की प्रतियोगिता पास करनी थी, जिसके बाद प्रत्येक देश से एक छात्र का चयन अपने राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया गया।'

अभियान में भाग लेने वाले देशों की संख्या
विवरण मान
कुल देश22
आयु सीमा14-16 वर्ष
अभियान की अवधि10 दिन
आंकड़े समाचार रिपोर्ट से लिए गए हैं।

प्रभाव

लकी रावत के पिता राम सिंह ने अपने बेटे की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने एएनआई से कहा, 'मुझे अपने बेटे पर गर्व है जिसने ऑनलाइन परीक्षा पास की और भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया। वह उत्तरी ध्रुव के 10 दिवसीय अभियान पर जा रहा है।'

यह अभियान छात्रों को वैज्ञानिक शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आर्कटिक के बारे में जागरूकता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। भारत से एक छात्र का चयन देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है, हालांकि इसके दीर्घकालिक प्रभावों के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि अभियान सफलतापूर्वक पूरा होता है, तो लकी रावत उत्तरी ध्रुव तक पहुंचने वाले कुछ चुनिंदा भारतीयों में शामिल हो सकते हैं। इससे उन्हें वैज्ञानिक क्षेत्र में आगे के अवसर मिल सकते हैं, हालांकि इसकी पुष्टि के लिए कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

इस अभियान से भारत और अन्य देशों के छात्रों के बीच वैज्ञानिक सहयोग बढ़ने की संभावना है। यदि यह पहल जारी रहती है, तो भविष्य में और अधिक भारतीय छात्रों को इस तरह के अंतरराष्ट्रीय अभियानों में भाग लेने का मौका मिल सकता है, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होगा या नहीं।

स्रोत: indiagazette.com

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