मुख्य तथ्य
- विजेता उम्मीदवार
- देबांग्शु पांडा (भाजपा)
- जीत का अंतर
- 1.09 लाख मत
- दूसरे स्थान पर
- संबू नाथ कुर्मी (सीपीआईएम) - 40 हजार 645 मत
- तीसरे स्थान पर
- अब्दुर रज्जाक मोल्ला (कांग्रेस) - 10,084 मत
- चौथे स्थान पर
- जहांगीर खान (तृणमूल कांग्रेस)
- दोबारा मतदान की तारीख
- 21 मई
पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा क्षेत्र में मतदान के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों में इत्र जैसे पदार्थों के इस्तेमाल, स्याही के निशान और चिपकने वाली टेप लगाने की बातें शामिल थीं।
चुनाव आयोग ने इन शिकायतों के बाद फलता में दोबारा मतदान का आदेश दिया था। बाद में हुई जांच में मतदान केंद्रों के वेब-कैमरा फुटेज से छेड़छाड़ के प्रयासों का भी पता चला।
वर्तमान स्थिति
फलता विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने 1.09 लाख मतों के अंतर से जीत दर्ज की है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और सीपीआई(एम) के उम्मीदवार संबू नाथ कुर्मी को हराया, जिन्हें 40 हजार 645 मत मिले।
कांग्रेस के उम्मीदवार अब्दुर रज्जाक मोल्ला 10,084 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे स्थान पर खिसक गए। इस जीत के साथ भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाई है।
फलता में 21 मई को सभी 285 मतदान केंद्रों पर दोबारा मतदान हुआ। इस दौरान करीब 35 कंपनियों के केंद्रीय बलों की सुरक्षा व्यवस्था रही।
| उम्मीदवार | पार्टी | प्राप्त मत |
|---|---|---|
| देबांग्शु पांडा | भाजपा | विजेता (1.09 लाख मतों के अंतर से) |
| संबू नाथ कुर्मी | सीपीआई(एम) | 40 हजार 645 |
| अब्दुर रज्जाक मोल्ला | कांग्रेस | 10,084 |
| जहांगीर खान | तृणमूल कांग्रेस | चौथा स्थान |
प्रभाव
इस जीत से पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाजपा की स्थिति मजबूत होने की संभावना है, क्योंकि फलता क्षेत्र को तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माना जाता था।
चुनाव आयोग द्वारा दोबारा मतदान कराने और सुरक्षा के कड़े इंतजाम से यह संकेत मिलता है कि आयोग मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर गंभीर है। इसका असर अन्य क्षेत्रों में भी देखा जा सकता है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि भाजपा इसी तरह अन्य सीटों पर भी प्रदर्शन करती है, तो आगामी चुनावों में उसकी स्थिति और मजबूत हो सकती है। हालांकि, यह केवल एक सीट का परिणाम है, इसलिए इसे व्यापक रुझान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस के लिए यह हार एक चेतावनी हो सकती है, लेकिन पार्टी के पास अभी भी राज्य में मजबूत जनाधार है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि पार्टी इस हार से क्या सबक लेती है।
चुनाव आयोग की ओर से ईवीएम से छेड़छाड़ की शिकायतों पर की गई कार्रवाई से भविष्य में मतदान प्रक्रिया पर भरोसा बढ़ सकता है, लेकिन इसके दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन अभी संभव नहीं है।
स्रोत: News On AIR



