मुख्य तथ्य
- आयोजन
- imm india 2026
- तिथि
- 1-3 सितंबर 2026
- स्थान
- यशोभूमि (IICC), द्वारका, नई दिल्ली
- प्रदर्शक
- 100+ पुष्ट प्रदर्शक
- आयोजक
- कोलनमेसे (Koelnmesse)
- मुख्य भागीदार
- JHEA, AMK, HHEWA, BAA, AFMI
पृष्ठभूमि
भारत में फर्नीचर, हस्तशिल्प, कालीन और होम डेकोर के कुछ बेहतरीन डिजाइन और निर्माण होते हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा देश से बाहर चला जाता है, जिसे अधिकांश भारतीय खरीदार—खुदरा विक्रेता, इंटीरियर डिजाइनर, होटल या डेवलपर—कभी देख नहीं पाते। imm india 2026 इसी कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है।
यह आयोजन कोलनमेसे (Koelnmesse) द्वारा किया जा रहा है, जो दुनिया के तीन सबसे बड़े फर्नीचर व्यापार मेलों में से एक, imm cologne के पीछे की ताकत है। imm india 2026, 1 से 3 सितंबर 2026 तक नई दिल्ली के यशोभूमि (IICC), द्वारका में आयोजित होगा। यह भारत का एकीकृत B2B सोर्सिंग प्लेटफॉर्म है, जहां वैश्विक और घरेलू मांग भारत की विनिर्माण क्षमता से एक ही छत के नीचे मिलती है।
वर्तमान स्थिति
घरेलू व्यापार समुदाय से मिली प्रतिक्रिया अभूतपूर्व रही है। आर्किटेक्ट, इंटीरियर डिजाइनर, रियल एस्टेट डेवलपर, खुदरा विक्रेता, थोक विक्रेता, HoReCa पेशेवर, खरीद एजेंसियां और सोर्सिंग एजेंसियों ने बड़ी संख्या में पंजीकरण कराया है। यह एक ऐसे मंच की वास्तविक उद्योग आवश्यकता को दर्शाता है जो सीधे निर्माता तक पहुंच, डिजाइन-उन्मुख उत्पाद और ऐसी व्यावसायिक बातचीत प्रदान करता है जो कैटलॉग या पोर्टल के माध्यम से संभव नहीं है।
imm india 2026 में 100 से अधिक पुष्ट प्रदर्शक होंगे, जिनमें कई निर्यात-तैयार निर्माता शामिल हैं जो आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर को प्राथमिकता देते हैं। अब उनके पास भारत के घरेलू व्यापार खरीदारों से सीधे जुड़ने का एक संरचित मंच होगा। दूसरी ओर, घरेलू खरीदारों को वह मिलेगा जो उन्हें शायद ही कभी मिला है: निर्यात-गुणवत्ता, डिजाइन-अग्रणी उत्पाद, स्रोत पर, निर्माता के साथ।
वैश्विक व्यापार वातावरण इस घरेलू कहानी में गति जोड़ रहा है। हाल ही में अंतिम रूप दिए गए EU-भारत मुक्त व्यापार समझौते और भारत-यूके CETA के तहत भारतीय फर्नीचर, होम डेकोर और हस्तशिल्प निर्यात का 99% यूरोप और यूके में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। इससे भारत की वैश्विक सोर्सिंग गंतव्य के रूप में स्थिति बढ़ रही है।
| प्रदर्शक | श्रेणी |
|---|---|
| सोर्स | फर्नीचर |
| सनराइज इंटरनेशनल | फर्नीचर |
| शीला फोम लिमिटेड | मैट्रेस |
| ओबेटी प्राइवेट लिमिटेड | कालीन |
| फीनिक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड | फर्नीचर |
| रॉयल रग्स | कालीन |
| खिवराज हैंडीक्राफ्ट्स | हस्तशिल्प |
| संकारा फर्नीचर डिजाइन्स | फर्नीचर |
| मेटलटेक डिजाइन | धातु डिजाइन |
| सराफ एक्सपोर्ट्स | निर्यात |
| टेपिसरी होम | होम डेकोर |
| द फर्नीचर फोक्स | फर्नीचर |
प्रभाव
इस आयोजन से आर्किटेक्ट और इंटीरियर डिजाइनरों को सामग्री छूने, निर्माता को विनिर्देश के अनुसार ब्रीफ करने और किसी परियोजना के लिए कुछ विशिष्ट स्रोत करने का अवसर मिलेगा। खुदरा विक्रेताओं और वितरकों को व्यापक बाजार में पहुंचने से पहले नए संग्रह तक पहली-बार पहुंच मिलेगी। HoReCa पेशेवरों और रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए, यह परियोजना स्तर पर सीधी खरीद है—एजेंट को हटाकर, मार्जिन अंतर को कम करना और आपूर्तिकर्ता को आमने-सामने ब्रीफ करना।
प्रदर्शकों में सोर्स, सनराइज इंटरनेशनल, शीला फोम लिमिटेड, ओबेटी प्राइवेट लिमिटेड, फीनिक्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड, रॉयल रग्स, खिवराज हैंडीक्राफ्ट्स, संकारा फर्नीचर डिजाइन्स, मेटलटेक डिजाइन, सराफ एक्सपोर्ट्स, टेपिसरी होम, द फर्नीचर फोक्स और माहेश्वरी हैंडीक्राफ्ट्स शामिल हैं। ये जोधपुर, मुरादाबाद, करूर और सहारनपुर जैसे प्रमुख विनिर्माण केंद्रों से हैं।
imm india 2026 एक संरचित अंतरराष्ट्रीय होस्टेड बायर प्रोग्राम की मेजबानी करेगा, जिसमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूके, जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड, डेनमार्क, स्पेन, ओमान, मैक्सिको, मिस्र, इज़राइल, रोमानिया, यूएई और अन्य प्रमुख बाजारों से पुष्ट व्यापार प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि imm india 2026 को अपेक्षित प्रतिक्रिया मिलती है, तो यह भारतीय फर्नीचर और इंटीरियर उद्योग के लिए एक नियमित वार्षिक मंच बन सकता है, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी बन सकती है। यह भारतीय निर्माताओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पाद विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह आयोजन कितने व्यापारिक सौदों को अंतिम रूप दे पाएगा। यदि EU-भारत FTA और भारत-यूके CETA के लाभ समय पर साकार होते हैं, तो निर्यात में वृद्धि हो सकती है। लेकिन यदि वैश्विक आर्थिक स्थिति खराब होती है, तो अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी प्रभावित हो सकती है।
आयोजन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रदर्शक और खरीदार इस मंच का कितना उपयोग करते हैं। यदि यह पहला संस्करण सफल रहा, तो आने वाले वर्षों में यह और अधिक प्रदर्शकों और खरीदारों को आकर्षित कर सकता है, जिससे भारत की वैश्विक सोर्सिंग हब के रूप में स्थिति मजबूत होगी।
स्रोत: bignewsnetwork.com



