मुख्य तथ्य
- कुल लीजिंग (H1 2026)
- 36.2 MSF
- सालाना वृद्धि
- 18%
- वेयरहाउस लीजिंग
- 24.3 MSF (67%)
- 3PL हिस्सेदारी
- 12.2 MSF (34%)
- ऑटो लीजिंग
- 4.8 MSF (13%)
- शीर्ष शहर
- दिल्ली एनसीआर (8.7 MSF)
पृष्ठभूमि
कुशमैन एंड वेकफील्ड की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के शीर्ष आठ शहरों में लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक स्थान की मांग ने वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में रिकॉर्ड स्तर छुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि सकल लीजिंग 36.2 मिलियन वर्ग फुट (MSF) रही, जो किसी कैलेंडर वर्ष की पहली छमाही के लिए अब तक की सबसे अधिक है।
यह मांग वेयरहाउसिंग और औद्योगिक सुविधाओं में मजबूत गतिविधि से समर्थित रही। कुल लीजिंग में सालाना आधार पर 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि यह 2025 की दूसरी छमाही की तुलना में 2 प्रतिशत अधिक रही।
वर्तमान स्थिति
वेयरहाउस लीजिंग सबसे बड़ा खंड बना रहा, जो 24.3 MSF रहा और कुल लीजिंग गतिविधि का 67 प्रतिशत हिस्सा था। वहीं, औद्योगिक लीजिंग पहली छमाही में बढ़कर लगभग 12 MSF हो गई।
थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) ऑपरेटरों ने 12.2 MSF लीजिंग के साथ कुल मांग का 34 प्रतिशत हिस्सा लिया। इंजीनियरिंग और विनिर्माण (E&M) कंपनियों ने 10.2 MSF के साथ 28 प्रतिशत योगदान दिया। दोनों क्षेत्रों ने मिलकर कुल अवशोषण का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा लिया।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र भी प्रमुख विकास चालक के रूप में उभरा, जिसने 4.8 MSF लीजिंग की, जो कुल मांग का 13 प्रतिशत है। ऑटोमोबाइल किरायेदारों द्वारा लीजिंग H1 2025 की तुलना में लगभग दोगुनी हो गई।
| शहर | लीजिंग (MSF) | सालाना वृद्धि (%) |
|---|---|---|
| दिल्ली एनसीआर | 8.7 | 69 |
| चेन्नई | 6.1 | 39 |
| पुणे | 5.9 | 32 |
प्रभाव
शहरों के आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली एनसीआर में सबसे अधिक लीजिंग 8.7 MSF दर्ज की गई, उसके बाद चेन्नई में 6.1 MSF और पुणे में 5.9 MSF रही। दिल्ली एनसीआर में सालाना वृद्धि सबसे मजबूत 69 प्रतिशत रही, जबकि चेन्नई और पुणे में क्रमशः 39 प्रतिशत और 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
कुशमैन एंड वेकफील्ड के प्रबंध निदेशक (लॉजिस्टिक्स एंड इंडस्ट्रियल सर्विसेज) अभिषेक भूटानी ने कहा, "भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताओं से चिह्नित बाहरी माहौल के बावजूद, किरायेदारों की मांग लचीली बनी हुई है। हाल के महीनों में व्यवसायों ने निर्णय लेने में अधिक सतर्क दृष्टिकोण अपनाया है, लेकिन विस्तार योजनाएं पटरी पर बनी हुई हैं, जो भारत की विनिर्माण और उपभोग कहानी में दीर्घकालिक विश्वास को दर्शाती हैं।"
भविष्य का परिदृश्य
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 की दूसरी छमाही में ई-कॉमर्स, खुदरा और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों की मौसमी गतिविधियों से मांग को समर्थन मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वैश्विक घटनाक्रम व्यावसायिक निर्णयों की गति को प्रभावित कर सकते हैं।
यदि वैश्विक अनिश्चितताएं बनी रहती हैं, तो कंपनियां विस्तार में सतर्क रह सकती हैं, लेकिन मौजूदा रुझान बताते हैं कि मांग मजबूत बनी रह सकती है। वैकल्पिक रूप से, यदि भू-राजनीतिक स्थिति में सुधार होता है, तो लीजिंग गतिविधि में और तेजी आ सकती है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि वैश्विक घटनाएं किस दिशा में जाएंगी।
स्रोत: webindia123.com
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शीर्ष तीन शहरों में लीजिंग (MSF)
पुणे5.9 MSF
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| श्रेणी | लीजिंग |
|---|---|
| दिल्ली एनसीआर | 8.7 MSF |
| चेन्नई | 6.1 MSF |
| पुणे | 5.9 MSF |
स्रोत:कुशमैन एंड वेकफील्ड रिपोर्ट स्रोत-समर्थित



