भारतीय पवन टरबाइन निर्माता संघ (IWTMA) के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में पवन ऊर्जा निविदाओं की मात्रा पहली बार स्टैंडअलोन सौर ऊर्जा निविदाओं से अधिक रही है। यह देश की स्वच्छ ऊर्जा खरीद प्राथमिकताओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्शाता है।
IWTMA के आंकड़ों के अनुसार, इस तिमाही में कुल 9.34 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता की निविदाएं जारी की गईं। इसमें बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) सबसे बड़ा खंड रहा, जिसकी 3.48 गीगावॉट क्षमता कुल का 37.3 प्रतिशत है। पवन ऊर्जा 2.35 गीगावॉट (25.2 प्रतिशत) के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि सौर 1.34 गीगावॉट (14.4 प्रतिशत) के साथ तीसरे स्थान पर रही।
IWTMA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदित्य प्यासी ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा निविदा मिश्रण में यह बदलाव भारत के स्वच्छ ऊर्जा सफर में एक अहम विकास है। उन्होंने कहा कि अब ध्यान सिर्फ क्षमता बढ़ाने से हटकर विश्वसनीय और डिस्पैचेबल स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने पर केंद्रित हो रहा है, जो ग्रिड की बढ़ती जरूरतों को पूरा कर सके।
प्यासी ने कहा कि पवन और भंडारण मिलकर भारत के अगले चरण के नवीकरणीय ऊर्जा विकास के लिए पूरक स्तंभ होंगे। उन्होंने कहा कि निरंतर नीतिगत समर्थन, समय पर निविदा जारी करना और तेज परियोजना क्रियान्वयन से ही दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा और नेट-जीरो लक्ष्य हासिल किए जा सकेंगे।
स्रोत: thehindubusinessline.com



