मुख्य तथ्य
- विवाद का कारण
- रीफॉर्म सांसद सारा पोचिन का फ्रांस पर द्वितीय विश्व युद्ध वाला तंज
- फ्रांस की प्रतिक्रिया
- 'ऑपरेशन फोर्ट्रेस' योजना को संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया
- पोचिन की टिप्पणी
- 'अफसोस है कि फ्रांस ने जून 1940 में अपनी संप्रभुता की रक्षा में वही दृढ़ता नहीं दिखाई'
- लेबर सांसदों की प्रतिक्रिया
- सैम रशवर्थ ने 'घृणित' और जोश फेंटन-ग्लिन ने 'अज्ञानता' बताया
- गेविन बारवेल की टिप्पणी
- पोचिन को 'अज्ञानता की राजनीति का प्रतीक' कहा
- फ्रांसीसी हताहत
- 1940 में लगभग 90,000-100,000 फ्रांसीसी सैनिक मारे गए
पृष्ठभूमि
रीफॉर्म यूके के नेता निगेल फराज ने सोमवार को पार्टी की 'ऑपरेशन फोर्ट्रेस' योजना का अनावरण किया, जिसके तहत शाही नौसेना को चैनल में अवैध प्रवासियों को ले जाने वाले हर जहाज को रोकने और उन्हें उनके प्रस्थान देश में वापस भेजने का प्रस्ताव है।
फराज ने इस योजना की तुलना ऑस्ट्रेलिया के उस अभ्यास से की, जिसमें सैन्य जहाजों का इस्तेमाल प्रवासी नौकाओं को इंडोनेशिया वापस खींचने के लिए किया गया था। उन्होंने दावा किया कि फ्रांस के लिए इसके 'बड़े फायदे' होंगे, भले ही पेरिस उत्तरी तटों पर लौटाए गए प्रवासियों को स्वीकार करने से इनकार कर सकता है।
फ्रांसीसी सरकार ने सोमवार को ही रीफॉर्म की योजना को खारिज करते हुए कहा कि यह 'फ्रांसीसी संप्रभुता के साथ-साथ समुद्री कानून और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन' होगा।
वर्तमान स्थिति
फ्रांस की प्रतिक्रिया के बाद, रनकॉर्न और हेल्सबी की सांसद सारा पोचिन ने एक्स पर पोस्ट किया: 'अफसोस है कि फ्रांस ने जून 1940 में अपनी संप्रभुता की रक्षा में वही दृढ़ता नहीं दिखाई।' इस टिप्पणी ने लेबर सांसदों और पूर्व प्रधानमंत्री कार्यालय प्रमुख को नाराज कर दिया।
बिशप ऑकलैंड के लेबर सांसद सैम रशवर्थ ने इसे 'घृणित टिप्पणी' बताया, जो सहयोगियों, विशेष रूप से बहादुर फ्रांसीसी प्रतिरोध सेनानियों को धोखा देती है, जिन्होंने डनकर्क में ब्रिटिश वापसी में सुविधा प्रदान की। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां दिखाती हैं कि रीफॉर्म सरकार चलाने के लिए पूरी तरह से अयोग्य है।
काल्डर वैली के लेबर सांसद जोश फेंटन-ग्लिन ने पोस्ट किया कि द्वितीय विश्व युद्ध में नाजियों से लड़ते हुए 200,000 से अधिक फ्रांसीसी सैन्य कर्मी मारे गए, जिनमें से 90,000 की मौत 1940 में हुई। उन्होंने कहा कि कभी-कभी यह स्पष्ट नहीं होता कि यह अज्ञानता दिखावटी है या वास्तविक।
| विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| 1940 में मारे गए फ्रांसीसी सैनिक (अनुमानित) | 90,000–100,000 |
| सबसे अधिक उद्धृत आंकड़ा | लगभग 92,000 |
| द्वितीय विश्व युद्ध में कुल फ्रांसीसी सैन्य मौतें | 200,000 से अधिक |
प्रभाव
थेरेसा मे की प्रधानमंत्री रहते हुए शीर्ष सलाहकार रहे गेविन बारवेल ने पोचिन से कहा कि 1940 में लगभग 100,000 फ्रांसीसी नागरिकों ने अपने देश की रक्षा करते हुए जान दी, लेकिन वह यह नहीं जानतीं क्योंकि वह 'अज्ञानता की राजनीति' का प्रतीक हैं।
कुछ एक्स उपयोगकर्ताओं ने पोचिन के पोस्ट में 'संदर्भ' जोड़ते हुए फ्रांस की लड़ाई के विकिपीडिया पृष्ठ का लिंक दिया, जिसमें बताया गया कि मई-जून 1940 में जर्मनी के आक्रमण के दौरान लगभग 90,000-100,000 फ्रांसीसी सैनिक मारे गए थे, और सबसे अधिक उद्धृत आंकड़ा लगभग 92,000 है।
इस विवाद से ब्रिटेन-फ्रांस संबंधों में तनाव बढ़ सकता है, खासकर प्रवासन नीति के मोर्चे पर, जहां दोनों देश पहले से ही चैनल पार करने वाले प्रवासियों की संख्या को लेकर सहयोग कर रहे हैं। फ्रांसीसी गृह मंत्रालय ने कहा कि 2026 में क्रॉसिंग की संख्या में कमी आई है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि रीफॉर्म यूके की यह योजना आगे बढ़ती है, तो फ्रांस के साथ कूटनीतिक गतिरोध और गहरा सकता है, क्योंकि पेरिस पहले ही इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बता चुका है। संभावना है कि ब्रिटिश सरकार को योजना को लागू करने के लिए कानूनी और राजनयिक चुनौतियों का सामना करना पड़े।
यदि यह विवाद चुनावी माहौल में गर्माता है, तो रीफॉर्म यूके को अपने समर्थकों के बीच मजबूती मिल सकती है, लेकिन मुख्यधारा के दलों से आलोचना भी बढ़ सकती है। यह देखना बाकी है कि क्या पोचिन अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगेंगी या पार्टी नेतृत्व इस पर कोई रुख अपनाएगा।
फ्रांसीसी सरकार के बयान के अनुसार, यदि वर्तमान सहयोग जारी रहता है, तो चैनल पार करने वालों की संख्या में गिरावट जारी रह सकती है, जिससे इस तरह की कठोर योजनाओं की आवश्यकता कम हो सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों देशों के बीच प्रवासन पर बातचीत का अगला चरण क्या होगा।
स्रोत: dailymail.com



