मुख्य तथ्य
- अनुमानित निजी उपभोग
- 1.9 ट्रिलियन डॉलर (2030 तक)
- इंटरनेट ग्राहक
- 1 अरब से अधिक
- UPI लेनदेन (2025)
- 228 अरब, लगभग 3.6 ट्रिलियन डॉलर
- स्मार्ट स्टैंडर्ड्स लॉन्च
- 14 अक्टूबर (विश्व मानक दिवस)
- रिपोर्ट जारी
- FICCI MASSMERIZE 2026 में
पृष्ठभूमि
FICCI और डेलॉयट की संयुक्त रिपोर्ट 'कंज्यूमर ट्रेंड्स: IGNITEing Growth and Governance' मंगलवार को 'FICCI MASSMERIZE 2026' के उद्घाटन सत्र में जारी की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनसांख्यिकीय बदलाव, बढ़ती आय और बदलती उपभोक्ता अपेक्षाएं देश की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था को नया आकार दे रही हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एक अरब से अधिक इंटरनेट ग्राहक हैं और 2025 में 228 अरब UPI लेनदेन हुए, जिनकी कीमत लगभग 3.6 ट्रिलियन डॉलर रही। यह डिजिटल बुनियादी ढांचा उपभोक्ता बाजार के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
वर्तमान स्थिति
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय उपभोक्ता अब केवल कीमत के प्रति जागरूक नहीं हैं, बल्कि वे समाज, स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर विवेकशील, विकसित, चिंतित और मुखर हो गए हैं। FMCG, खुदरा और ई-कॉमर्स में अवसरों को भुनाने के लिए कंपनियों को उत्पाद गुणवत्ता, सुरक्षा, लेबलिंग, उपभोक्ता संरक्षण, पर्यावरणीय दायित्व, डिजिटल वाणिज्य और डेटा गवर्नेंस जैसे नियामक पहलुओं से निपटना होगा।
उपभोक्ता मामलों के सचिव निधि खरे ने विनिर्माण और बिक्री में गुणवत्ता मानकों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "समय आ गया है कि हम महसूस करें कि जब तक हम विनिर्माण प्रक्रियाओं और उपभोक्ताओं को उत्पाद बेचने के तरीके में गुणवत्ता संबंधी चिंताओं का समाधान नहीं करते, हम विकास नहीं कर सकते। उपभोक्ता शिकायतों में वृद्धि हुई है।"
| विवरण | मान |
|---|---|
| निजी उपभोग अनुमान (2030) | 1.9 ट्रिलियन डॉलर |
| इंटरनेट ग्राहक | 1 अरब से अधिक |
| UPI लेनदेन (2025) | 228 अरब |
| UPI मूल्य (2025) | लगभग 3.6 ट्रिलियन डॉलर |
प्रभाव
खरे ने बताया कि कानूनी मेट्रोलॉजी अधिनियम के तहत पहली बार निर्माताओं और खुदरा विक्रेताओं को सुधार नोटिस जारी किए जाएंगे, जिससे मामूली गलतियों को सुधारने का समय मिलेगा। इससे छोटे व्यवसायों पर तत्काल दंड का बोझ कम हो सकता है।
विभाग 'स्मार्ट स्टैंडर्ड्स' पेश करने की योजना बना रहा है, जिसका लक्ष्य विश्व मानक दिवस (14 अक्टूबर) तक इसे लॉन्च करना है। इससे व्यवसायों के लिए अनुपालन सरल होगा और भारत विकसित देशों की श्रेणी में आ सकेगा। साथ ही, परीक्षण बुनियादी ढांचे में एआई और रोबोटिक्स के उपयोग से एमएसएमई के लिए लागत कम होने और परीक्षण की सटीकता बढ़ने की संभावना है।
भविष्य का परिदृश्य
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि स्मार्ट स्टैंडर्ड्स समय पर लागू होते हैं, तो भारत में व्यापार करने में आसानी बढ़ सकती है और उपभोक्ता विश्वास मजबूत हो सकता है। हालांकि, यदि नियामक प्रक्रियाएं जटिल रहती हैं, तो छोटे उद्यमों पर बोझ बढ़ सकता है।
FICCI के महासचिव ज्योति विज ने कहा कि कंपनियां प्रौद्योगिकी, ओमनीचैनल रणनीतियों और नवाचार के माध्यम से बदलती उपभोक्ता प्राथमिकताओं के अनुकूल हो रही हैं। आने वाले वर्षों में उपभोक्ता बाजार में व्यक्तिगत अनुभव, सुविधा, पारदर्शिता और स्थिरता पर अधिक जोर दिया जा सकता है।
स्रोत: webindia123.com



