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जापान ने नए युद्ध के तरीकों के लिए ड्रोन को अहम बताया, रक्षा उद्योग मजबूत करने पर जोर

जापान सरकार ने मंगलवार को रक्षा श्वेतपत्र अपनाया, जिसमें ड्रोन और एआई जैसे नए युद्ध तरीकों को अपनाने और रक्षा उद्योग को मजबूत करने की बात कही गई। चीन को सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बताया गया।

मुख्य तथ्य

श्वेतपत्र
598 पन्नों का रक्षा श्वेतपत्र मंगलवार को मंत्रिमंडल द्वारा अपनाया गया
चीन को चुनौती
चीन को जापान की सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती बताया गया
ड्रोन विकास
38 आवेदकों में से चार ड्रोन निर्माताओं का चयन, अगस्त में नौसेना परीक्षण
तोशिबा समझौता
तोशिबा ने प्रो ड्रोन के साथ लड़ाकू ड्रोन विकसित करने की योजना बनाई
हथियार निर्यात
जापान ने घातक हथियारों के निर्यात पर प्रतिबंध हटाया
प्रमुख सौदे
ऑस्ट्रेलिया को 11 मोगामी-श्रेणी के फ्रिगेट का संयुक्त विकास और हस्तांतरण

पृष्ठभूमि

जापान ने हाल के वर्षों में अपनी सैन्य क्षमता और खर्च बढ़ाया है। देश ने चीन की सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें तैनात करना शुरू कर दिया है।

जापान ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से शांतिवादी नीति अपनाई हुई है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव के मद्देनजर उसने अपनी रक्षा नीति में बदलाव किए हैं। कई स्थापित कंपनियां घातक हथियारों से जुड़ने से बचती हैं, लेकिन अब स्टार्टअप्स में दिलचस्पी बढ़ रही है।

वर्तमान स्थिति

मंगलवार को मंत्रिमंडल द्वारा अपनाए गए 598 पन्नों के रक्षा श्वेतपत्र में कहा गया है कि चीन जापान के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती है। प्रशांत महासागर में चीनी युद्धपोतों की बढ़ती उपस्थिति और गतिविधियों को लेकर जापान चिंतित है।

यूक्रेन में ड्रोन के इस्तेमाल से प्रेरित होकर जापान ने 'युद्ध के नए तरीकों' को अपनाना आवश्यक समझा है। सरकार लंबी दूरी की मिसाइलों के साथ तटीय रक्षा के लिए अपने स्वयं के ड्रोन विकसित करने को प्राथमिकता दे रही है। रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी ने जुलाई की शुरुआत में कहा था, 'गति महत्वपूर्ण है।'

अधिग्रहण, प्रौद्योगिकी और रसद एजेंसी ने हाल ही में 38 आवेदकों में से चार ड्रोन निर्माताओं का चयन किया है। वे अगस्त की शुरुआत में नौसेना द्वारा परीक्षण के लिए आगे बढ़ेंगे, जिसके बाद अंतिम चयन होगा। तोशिबा ने शुक्रवार को स्टार्टअप प्रो ड्रोन के साथ संयुक्त रूप से लड़ाकू ड्रोन विकसित करने की योजना की घोषणा की।

जापान के रक्षा श्वेतपत्र में उल्लिखित प्रमुख बिंदु
विषय विवरण
चीनसबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती, प्रशांत में युद्धपोतों की बढ़ती उपस्थिति
ड्रोननए युद्ध तरीकों के लिए आवश्यक, तटीय रक्षा के लिए विकास
उत्तर कोरियामिसाइल विकास 'गंभीर और दबावपूर्ण खतरा'
रूसचीन के साथ संयुक्त सैन्य अभियान 'गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता'
हथियार निर्यातप्रतिबंध हटाने से रक्षा उद्योग मजबूत होने की उम्मीद
आंकड़े स्रोत रिपोर्ट पर आधारित हैं।

प्रभाव

मानवरहित हथियार जापान की घटती आबादी के कारण घटते सैन्य कर्मियों की कमी को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जापान के वाणिज्यिक ड्रोन बाजार में चीनी आयात का वर्चस्व है, ऐसे में पूरी तरह से स्वदेशी ड्रोन विकसित करना चुनौतीपूर्ण होगा।

जापान ने हथियारों के निर्यात पर प्रतिबंध हटा दिया है, जिससे उसके अविकसित रक्षा उद्योग को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। हथियार प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त विकास से जापान के रक्षा उद्योग आधार और साझेदारों के साथ संबंध मजबूत होंगे। जापान ने ऑस्ट्रेलिया को 11 उन्नत मोगामी-श्रेणी के फ्रिगेट के संयुक्त विकास और हस्तांतरण सहित प्रमुख सौदे किए हैं।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि जापान अपने ड्रोन विकास कार्यक्रम में सफल होता है, तो वह तटीय रक्षा में आत्मनिर्भर बन सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा में अपनी भूमिका बढ़ा सकता है। हालांकि, अगर चीनी आयात पर निर्भरता बनी रहती है, तो स्वदेशी विकास में बाधा आ सकती है।

चीन और रूस के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए, जापान अपने रक्षा सहयोग को और मजबूत कर सकता है। यदि ताइवान में संघर्ष होता है, तो जापान की सैन्य तैयारियों का परीक्षण हो सकता है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि जापान का ड्रोन कार्यक्रम कितनी जल्दी पूरा होगा और उसका अंतिम परिणाम क्या होगा।

स्रोत: asahi.com

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