मुख्य तथ्य
- राजस्थान में स्वीकृत ऋण
- 2,18,423 करोड़ रुपये
- राजस्थान में लाभार्थी
- 2,55,91,381
- महिला लाभार्थी
- 1.54 करोड़ से अधिक
- महिलाओं को ऋण
- 67,982 करोड़ रुपये से अधिक
- चालू वित्त वर्ष में ऋण
- 31,460 करोड़ रुपये
- राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत ऋण
- 41.71 लाख करोड़ रुपये
पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) वर्ष 2015 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य गैर-कॉर्पोरेट छोटे व्यवसायों को 20 लाख रुपये तक का बिना संपत्ति गिरवी रखे ऋण उपलब्ध कराना है। यह योजना शिशु, किशोर, तरुण और तरुण प्लस नामक चार श्रेणियों में ऋण प्रदान करती है, जो व्यवसायों की विभिन्न विकास अवस्थाओं और वित्तीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखती है।
यह योजना छोटे विनिर्माण इकाइयों, सूक्ष्म उद्यमों और सड़क विक्रेताओं को औपचारिक ऋण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। इससे पहले इनमें से कई उद्यमी साहूकारों, रिश्तेदारों या दोस्तों जैसे अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर थे।
वर्तमान स्थिति
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में पीएमएमवाई के तहत 2,55,91,381 लाभार्थियों को 2,18,423 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 1.54 करोड़ से अधिक महिलाओं को 67,982 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण मिले हैं, जो कुल लाभार्थियों का लगभग 60 प्रतिशत है।
चालू वित्त वर्ष 2025-26 में राजस्थान में 23 लाख से अधिक लाभार्थियों को 31,460 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में बताया कि जून 2026 तक देश भर में 59.14 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 41.71 लाख करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं।
| विवरण | मात्रा |
|---|---|
| कुल स्वीकृत ऋण (करोड़ रुपये) | 2,18,423 |
| कुल लाभार्थी | 2,55,91,381 |
| महिला लाभार्थी | 1.54 करोड़ से अधिक |
| महिलाओं को ऋण (करोड़ रुपये) | 67,982 से अधिक |
| चालू वित्त वर्ष में ऋण (करोड़ रुपये) | 31,460 |
| चालू वित्त वर्ष में लाभार्थी | 23 लाख से अधिक |
| राष्ट्रीय स्तर पर ऋण (लाख करोड़ रुपये) | 41.71 |
| राष्ट्रीय स्तर पर लाभार्थी (करोड़) | 59.14 से अधिक |
प्रभाव
मुद्रा योजना ने राजस्थान में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है और अनौपचारिक ऋण स्रोतों पर निर्भरता कम की है। इससे विनिर्माण इकाइयों, खुदरा दुकानों, फल और सब्जी विक्रेताओं, ट्रक और टैक्सी संचालकों, खाद्य सेवा व्यवसायों, मशीन संचालकों, कारीगरों, खाद्य प्रसंस्करणकर्ताओं, छोटे उद्योगों और सड़क विक्रेताओं सहित विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिला है।
मुद्रा ऋण लेने वालों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों का एक बड़ा हिस्सा शामिल है। महिलाओं की भागीदारी लगभग 60 प्रतिशत होने से महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिला है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि योजना के तहत ऋण वितरण की यह गति जारी रहती है, तो राजस्थान में अधिक उद्यमियों को औपचारिक ऋण मिल सकता है और अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भरता और कम हो सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ऋण वितरण में क्षेत्रीय असमानताएं कम होंगी या नहीं।
यदि ऋण वसूली दर और व्यवसायों की स्थिरता पर ध्यान दिया जाता है, तो योजना का दीर्घकालिक प्रभाव सकारात्मक हो सकता है। अन्यथा, कुछ परिवारों पर ऋण का बोझ बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्रोत: newkerala.com



