मुख्य तथ्य
- आरोपी
- हुसैन मोहम्मद शत्ताफ (उर्फ हुसैन महबूब खोखावाला)
- अपराध
- 2006 में लोनावाला में कैप्टन मनमोहन सिंह वीरदी की हत्या
- अन्य आरोप
- जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात, झूठे विवरण से पासपोर्ट प्राप्त करना
- वर्तमान स्थिति
- यूएई ने और दस्तावेज मांगे, भारत काम कर रहा है
- प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू
- दिसंबर 2025 में MEA ने प्रक्रिया शुरू की
पृष्ठभूमि
हुसैन मोहम्मद शत्ताफ, जिसे हुसैन महबूब खोखावाला के नाम से भी जाना जाता है, 2006 में महाराष्ट्र के लोनावाला में सेवानिवृत्त मर्चेंट नेवी कैप्टन मनमोहन सिंह वीरदी की हत्या के सिलसिले में वांछित है। उस पर हत्या के अलावा जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और झूठे विवरण के साथ पासपोर्ट प्राप्त करने के अलग-अलग मामले भी दर्ज हैं।
दिसंबर 2025 में, अधिकारियों ने बताया था कि विदेश मंत्रालय (MEA) ने संयुक्त अरब अमीरात से शत्ताफ के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। उस समय यह भी कहा गया था कि प्रत्यर्पण अनुरोध भारतीय दूतावास को भेजा गया था, क्योंकि शत्ताफ के यूएई में अवैध रूप से निवास करने का संदेह है।
वर्तमान स्थिति
मंगलवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि शत्ताफ के प्रत्यर्पण का विशिष्ट अनुरोध यूएई पक्ष को भेजा गया था। उन्होंने कहा, "उन्होंने इस संबंध में कुछ और दस्तावेज मांगे हैं, और हम इस विशेष मामले पर काम कर रहे हैं।"
जायसवाल ने यह भी कहा कि यूएई के साथ लंबित प्रत्यर्पण अनुरोधों की संख्या के बारे में उन्हें बाद में जानकारी देनी होगी। उन्होंने कहा, "जहां तक उनके पास या हमारे पास लंबित प्रत्यर्पण अनुरोधों की संख्या का सवाल है, मुझे इस मुद्दे पर आपके पास वापस आना होगा।"
भारत सरकार ने पहले कहा है कि वह वांछित अपराधियों को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है। शत्ताफ कथित तौर पर अपराध के बाद भारत से भाग गया और यूएई में निवास सुरक्षित करने के लिए नकली विवाह प्रमाण पत्र बनाया। उसका भारतीय पासपोर्ट, जो 2019 में जारी हुआ था, 2021 में समाप्त हो गया।
| विवरण | तिथि |
|---|---|
| हत्या की घटना | 2006 |
| प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू | दिसंबर 2025 |
| पासपोर्ट जारी | 2019 |
| पासपोर्ट समाप्त | 2021 |
| वर्तमान स्थिति | अगस्त 2026 |
प्रभाव
इस मामले में और दस्तावेज मांगे जाने से शत्ताफ के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया में देरी हो सकती है, जिससे न्याय में विलंब होने की संभावना है। हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि वह इस मामले पर काम कर रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि प्रक्रिया जारी है।
इस घटनाक्रम का सीधा असर शत्ताफ के खिलाफ चल रहे मामलों पर पड़ सकता है, क्योंकि उसकी उपस्थिति के बिना मुकदमा आगे नहीं बढ़ सकता। साथ ही, यह भारत-यूएई के बीच प्रत्यर्पण संधि की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाता है, हालांकि दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि भारत यूएई द्वारा मांगे गए अतिरिक्त दस्तावेज उपलब्ध करा देता है, तो प्रत्यर्पण प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है और शत्ताफ को भारत लाया जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इसमें कितना समय लगेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दस्तावेजों की कमी के कारण प्रत्यर्पण में देरी होती है, तो इससे अन्य देशों के साथ भारत के प्रत्यर्पण संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। लेकिन यह संभावना तभी है जब यह मामला लंबा खिंचे।
फिलहाल, भारत सरकार का रुख सकारात्मक है और वह यूएई के साथ मिलकर मामले को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। यदि सब कुछ ठीक रहा, तो शत्ताफ का प्रत्यर्पण जल्द हो सकता है, लेकिन इसकी कोई निश्चित समयसीमा नहीं है।
स्रोत: dailyexcelsior.com



