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तेल: निजी सर्वेक्षण में कच्चे तेल के भंडार में बढ़ोतरी का अनुमान, सरकारी आंकड़ों से पहले

अमेरिकी सरकारी आंकड़ों से पहले निजी सर्वेक्षण में कच्चे तेल के भंडार में बढ़ोतरी का अनुमान, जबकि ईरान-ओमान वार्ता से होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की उम्मीद।

तेल: निजी सर्वेक्षण में कच्चे तेल के भंडार में बढ़ोतरी का अनुमान, सरकारी आंकड़ों से पहले
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

स्रोत
investinglive.com
प्रकाशन समय
2026-08-04T21:45:00Z
सर्वेक्षण प्रकार
निजी तेल भंडार सर्वेक्षण
अनुमान
कच्चे तेल के भंडार में बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़े
कल सुबह जारी होने की उम्मीद
ईरान-ओमान वार्ता
होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की व्यापक रूपरेखा पर सहमति

पृष्ठभूमि

investinglive.com की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सरकारी तेल भंडार के आधिकारिक आंकड़ों से एक दिन पहले निजी क्षेत्र के सर्वेक्षण में कच्चे तेल के भंडार में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। यह सर्वेक्षण निजी तौर पर किया गया है और इसके नतीजे सरकारी आंकड़ों से अलग हो सकते हैं।

इस बीच, तेल बाजार में ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए बातचीत की खबरों ने कीमतों पर असर डाला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान और ओमान ने जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के समझौते की व्यापक रूपरेखा पर सहमति जताई है।

वर्तमान स्थिति

निजी सर्वेक्षण में कच्चे तेल के भंडार में बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है, जबकि आमतौर पर इस दौरान कमी की उम्मीद की जाती है। यह आंकड़े अमेरिकी सरकार के आधिकारिक आंकड़ों से पहले जारी किए गए हैं, जो कल सुबह आने वाले हैं।

इसके अलावा, तेल की कीमतों में पिछले सत्र में करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसका कारण ईरान वार्ता से होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की उम्मीदें बताई गईं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह गिरावट सर्वेक्षण के आंकड़ों से कितनी प्रभावित हुई।

प्रभाव

अगर सरकारी आंकड़ों में भी भंडार में बढ़ोतरी दिखती है, तो इससे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि आपूर्ति बढ़ने से बाजार में नरमी आ सकती है। इसका असर तेल आयातक देशों और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है, जिन्हें कम कीमतों से राहत मिल सकती है।

वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति में सुधार हो सकता है, जिससे कीमतों में और गिरावट आ सकती है। हालांकि, यह अभी सिर्फ बातचीत का विषय है और अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।

भविष्य का परिदृश्य

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि सरकारी आंकड़ों में भी भंडार में बढ़ोतरी दिखती है, तो तेल की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। हालांकि, अगर ईरान-ओमान वार्ता में कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में तेल बाजार की दिशा सरकारी आंकड़ों और ईरान वार्ता की प्रगति पर निर्भर करेगी। संभावना है कि अगर समझौता होता है, तो कीमतों में गिरावट जारी रहेगी, लेकिन अगर बातचीत विफल होती है, तो कीमतों में तेजी आ सकती है।

स्रोत: investinglive.com

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