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जनगणना 2027 के दूसरे चरण का अंतिम प्रश्नावली अगले सप्ताह जारी होने की संभावना

जनगणना 2027 के दूसरे चरण के लिए अंतिम प्रश्नावली अगले सप्ताह अधिसूचित होने की संभावना है। यह चरण 17 अगस्त से लद्दाख और बर्फीले क्षेत्रों में शुरू होगा, जिसमें जाति की गणना की जाएगी।

जनगणना 2027 के दूसरे चरण का अंतिम प्रश्नावली अगले सप्ताह जारी होने की संभावना
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

पहला डिजिटल जनगणना
जनगणना 2027 स्वतंत्र भारत का पहला डिजिटल जनगणना है।
जाति की गणना
यह स्वतंत्र भारत में पहली बार जाति की गणना करेगा।
प्रश्नावली में प्रश्न
अंतिम प्रश्नावली में 28 प्रश्न होने की संभावना है।
प्रारंभ तिथि
दूसरा चरण 17 अगस्त से लद्दाख और बर्फीले क्षेत्रों में शुरू होगा।
2011 एसईसीसी में जाति नाम
2011 एसईसीसी में 46 लाख से अधिक जाति नाम दर्ज हुए थे।

पृष्ठभूमि

जनगणना 2027 स्वतंत्र भारत का पहला डिजिटल जनगणना और पहला ऐसा जनगणना होगा जिसमें जाति की गणना की जाएगी। अब तक केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना जनगणना में की जाती थी।

जनगणना का कार्य दो चरणों में होता है - आवास एवं गृह सूचीकरण कार्य (एचएलओ) और जनसंख्या गणना (पीई)। एचएलओ चरण 30 सितंबर तक पूरा होना है, और कुछ राज्यों को छोड़कर अधिकांश राज्यों में यह पूरा हो चुका है।

वर्तमान स्थिति

जनगणना 2027 के दूसरे चरण के प्रश्न अगले सप्ताह अधिसूचित होने की संभावना है। यह चरण 17 अगस्त से लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों में शुरू होगा, जबकि शेष देश में यह फरवरी 2027 में होगा।

अंतिम प्रश्नावली में 28 प्रश्न शामिल होने की संभावना है। पहली बार पूछे जाने वाले प्रश्नों में 'पैकेज्ड या बोतलबंद पानी' का उपभोग और प्रवास के कारणों में 'प्राकृतिक आपदाएं' शामिल हो सकते हैं। शैक्षिक योग्यता के लिए विस्तृत कोड निर्देशिका भी प्रदान की जा सकती है।

3 अगस्त को भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त ने राजपत्र में अधिसूचित किया कि लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों में जनगणना 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक होगी, जिसमें 1 से 5 अक्टूबर 2026 तक पुनरीक्षण दौर होगा।

जनगणना चरणों की तिथियां
क्षेत्र प्रारंभ तिथि समाप्ति तिथि पुनरीक्षण दौर
लद्दाख और बर्फीले क्षेत्र1 सितंबर 202630 सितंबर 20261-5 अक्टूबर 2026
शेष देशफरवरी 2027अनिर्दिष्टअनिर्दिष्ट
तिथियां स्रोत से ली गई हैं।

प्रभाव

इस चरण में सभी निवासियों की जाति दर्ज की जाएगी। यह पहली बार होगा जब स्वतंत्र भारत में जनगणना में जाति की गणना की जाएगी।

2011 की सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना (एसईसीसी) में खुले कॉलम पद्धति के कारण 46 लाख से अधिक विभिन्न 'जाति नाम' दर्ज हुए थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले दशक में लगातार कहा है कि 2011 एसईसीसी का जाति डेटा 'त्रुटियों' के कारण अविश्वसनीय था।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि अंतिम प्रश्नावली में जाति के लिए खुला कॉलम रखा जाता है, तो 2011 एसईसीसी की तरह ही कई जाति नाम दर्ज हो सकते हैं, जिससे डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं।

यदि सरकार शैक्षिक योग्यता के लिए विस्तृत कोड निर्देशिका लागू करती है, तो डेटा संग्रह में अधिक सटीकता आ सकती है, लेकिन इससे गणना प्रक्रिया में समय भी लग सकता है।

आगामी चरणों में, यदि जाति गणना का डेटा सार्वजनिक किया जाता है, तो इसका उपयोग सामाजिक नीति और आरक्षण निर्धारण में हो सकता है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता पर अभी स्पष्टता नहीं है।

स्रोत: thehindu.com

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