मुख्य तथ्य
- क्षेत्र का अनुमानित आकार (2030)
- 150 अरब डॉलर
- वर्तमान सकल मूल्य वर्धन
- 65-70 अरब डॉलर
- अनुमानित वृद्धि (दशक के अंत तक)
- 100-150 अरब डॉलर
- मुख्य राज्य
- गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, बिहार
- स्रोत
- वन वर्ल्ड आउटलुक का लेख
पृष्ठभूमि
नई दिल्ली, 4 अगस्त: भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) का विस्तार तेजी से हो रहा है, जिससे राज्यों के बीच इस क्षेत्र में हिस्सेदारी के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। वन वर्ल्ड आउटलुक में प्रकाशित एक लेख के अनुसार, यह क्षेत्र 2030 तक 150 अरब डॉलर का होने का अनुमान है।
लेख में कहा गया है कि GCC अब पश्चिमी कंपनियों के आउटसोर्स बैक ऑफिस नहीं रहे, जहां बैंक डेटा एंट्री या सॉफ्टवेयर फर्म सपोर्ट टिकट भेजती थीं। अब ये केंद्र वैश्विक कंपनियों के लिए वास्तविक उत्पाद विकास, जोखिम मॉडल, चिप डिजाइन, एआई प्लेटफॉर्म और आपूर्ति श्रृंखला सॉफ्टवेयर बनाने में सक्षम हैं।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, GCC वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था में लगभग 65-70 अरब डॉलर का सकल मूल्य वर्धन कर रहे हैं, जो दशक के अंत तक बढ़कर 100 से 150 अरब डॉलर के बीच हो सकता है।
वर्तमान स्थिति
लेख के अनुसार, GCC अब वैश्विक व्यापार की परिचालन रीढ़ बन गए हैं। वे अंतरराष्ट्रीय बैंकों के लिए अनुपालन, बहुराष्ट्रीय बीमा कंपनियों के लिए साइबर सुरक्षा, खुदरा विक्रेताओं के लिए क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और उत्पाद तथा अनुसंधान एवं विकास की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
पश्चिमी कंपनियां अब नए एआई सेंटर या जोखिम कार्यों के लिए स्थान चुनते समय 'ऑनशोर' और 'ऑफशोर' के बीच नहीं, बल्कि भारतीय राज्यों के बीच चयन कर रही हैं। प्रत्येक राज्य सब्सिडी, प्रतिभा पाइपलाइन, नियामक सुगमता और विशेषज्ञता का अलग संयोजन पेश करता है।
लेख में कहा गया है कि बैंकों के लिए गुजरात में GIFT सिटी के कर लाभ और वित्तीय क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करना अलग है, जबकि कर्नाटक में इंजीनियरिंग और उत्पाद डिजाइन की गहराई है। तेलंगाना में फार्मा और BFSI प्रतिभा पूल का अनूठा संगम है।
प्रभाव
लेख के अनुसार, उच्च मात्रा और मध्यम जटिलता वाले काम के लिए लागत दक्षता चाहने वाली कंपनियों को उत्तर प्रदेश के टियर-II शहर या बिहार का उभरता प्रोत्साहन तंत्र बेंगलुरु की तुलना में अधिक आकर्षक लग सकता है, क्योंकि बेंगलुरु में दो दशकों की सफलता के बाद लागत बढ़ गई है।
इससे राज्यों के बीच निवेश आकर्षित करने की होड़ तेज होगी, और कंपनियों को एक ही गंतव्य के बजाय विविध विकल्प मिलेंगे। लेख में इसे 'पोर्टफोलियो' के रूप में वर्णित किया गया है, जो एकल दांव की तुलना में अधिक लचीला है।
बिहार जैसे राज्यों के लिए यह नए अवसर पैदा कर सकता है, लेकिन बुनियादी ढांचे और प्रतिभा विकास पर निर्भर करेगा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कौन से राज्य कितना निवेश आकर्षित करेंगे।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि GCC क्षेत्र 2030 तक 150 अरब डॉलर तक पहुंचता है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। हालांकि, यह वैश्विक आर्थिक स्थितियों और नीतिगत स्थिरता पर निर्भर करेगा।
राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा से विशेषज्ञता के आधार पर क्षेत्रीय केंद्र विकसित हो सकते हैं, जैसे गुजरात में वित्त, कर्नाटक में प्रौद्योगिकी, तेलंगाना में फार्मा। यदि बिहार अपनी प्रोत्साहन नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करता है, तो वह लागत-संवेदनशील कार्यों को आकर्षित कर सकता है।
हालांकि, यह संभावना है कि बेंगलुरु अपनी स्थापित पारिस्थितिकी तंत्र के कारण उच्च-मूल्य वाले कार्यों में अग्रणी बना रहे। वास्तविक परिणाम राज्यों की नीतियों और वैश्विक कंपनियों की रणनीतियों पर निर्भर करेंगे।
स्रोत: prokerala.com



