मुख्य तथ्य
- PMI जुलाई
- 53.5
- PMI जून
- 54.2
- सबसे निचला स्तर
- अगस्त 2021 के बाद
- नए ऑर्डर वृद्धि
- चार वर्षों में दूसरी सबसे कम
- रोजगार वृद्धि
- 29 महीने के विस्तार में सबसे धीमी
- इनपुट मुद्रास्फीति
- पांच महीने का निचला स्तर
पृष्ठभूमि
भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने जुलाई में विस्तार जारी रखा, लेकिन विकास दर में तेज गिरावट दर्ज की गई। HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जून के 54.2 से गिरकर जुलाई में 53.5 पर आ गया, जो अगस्त 2021 के बाद का सबसे निचला स्तर है। हालांकि, सूचकांक 50 के आंकड़े से ऊपर बना हुआ है, जो दर्शाता है कि विनिर्माण गतिविधि अभी भी विस्तार के दायरे में है।
यह गिरावट मुख्य रूप से नए ऑर्डर की धीमी वृद्धि के कारण हुई है। नए ऑर्डर की वृद्धि दर जुलाई में पिछले चार वर्षों में दूसरी सबसे कम रही। कंपनियों ने कठिन व्यावसायिक स्थितियों और कुछ उत्पादों के लिए उपभोक्ता मांग में कमी का हवाला दिया। नए ऑर्डर भविष्य के उत्पादन की मांग का संकेत देते हैं, इसलिए इसमें गिरावट से कंपनियां भर्ती, खरीद और इन्वेंट्री प्रबंधन में सतर्क हो जाती हैं।
वर्तमान स्थिति
जुलाई में उत्पादन में वृद्धि जारी रही, लेकिन पहले की तुलना में काफी धीमी गति से। कंपनियों ने इनपुट की खरीद में भी कम सक्रियता दिखाई। रोजगार सृजन की दर लगातार तीसरे महीने धीमी रही, और यह पिछले 29 महीनों के विस्तार क्रम में सबसे धीमी गति थी। यह नौकरियों में कटौती का संकेत नहीं है, बल्कि भविष्य की मांग को लेकर अनिश्चितता के बीच कंपनियों द्वारा चयनात्मक भर्ती का संकेत है।
हालांकि, कुछ सकारात्मक पहलू भी हैं। निर्यात ऑर्डर में जुलाई में सुधार देखा गया, जिसमें कनाडा, मिस्र, इंडोनेशिया, केन्या, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड और यूएई जैसे बाजारों से मजबूती मिली। आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति में भी सुधार हुआ, और आपूर्तिकर्ता डिलीवरी समय सूचकांक में वृद्धि दर्ज की गई। कंपनियों ने इनपुट और तैयार माल की इन्वेंट्री भी बढ़ाई, जो संभावित व्यवधानों से बचाव के लिए बफर बनाने का संकेत है।
| माह | PMI | नए ऑर्डर वृद्धि | रोजगार वृद्धि |
|---|---|---|---|
| जून | 54.2 | — | — |
| जुलाई | 53.5 | दूसरी सबसे कम (4 वर्षों में) | सबसे धीमी (29 महीनों में) |
प्रभाव
इस सुस्ती का सबसे सीधा असर रोजगार सृजन पर पड़ा है। धीमी भर्ती का मतलब है कि विनिर्माण क्षेत्र में नौकरी के अवसर पहले की तुलना में कम बढ़ रहे हैं। यह उन श्रमिकों और नौकरी चाहने वालों को प्रभावित कर सकता है जो इस क्षेत्र पर निर्भर हैं। हालांकि, यह नौकरियों में कटौती नहीं है, बल्कि वृद्धि की गति धीमी है।
नए ऑर्डर की धीमी वृद्धि का असर भविष्य के उत्पादन और निवेश पर पड़ सकता है। कंपनियां अगर मांग को लेकर अनिश्चित हैं, तो वे विस्तार योजनाओं को टाल सकती हैं। इससे पूंजीगत व्यय और समग्र आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, निर्यात में मजबूती और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार से कुछ राहत मिली है। मध्य पूर्व में तनाव के कारण लॉजिस्टिक्स में सुधार जारी रहने को लेकर अनिश्चितता है, जिससे कंपनियों ने उच्च स्टॉक बनाए रखा है।
भविष्य का परिदृश्य
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
आगे का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि ऑर्डर वृद्धि में कमजोरी बनी रहती है या निर्यात और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार से क्षेत्र को गति मिलती है। यदि नए ऑर्डर में सुधार होता है और वैश्विक मांग मजबूत रहती है, तो विनिर्माण क्षेत्र फिर से तेजी दर्ज कर सकता है। हालांकि, अगर मांग कमजोर बनी रहती है, तो कंपनियां और अधिक सतर्क हो सकती हैं, जिससे विकास दर और धीमी हो सकती है।
मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक प्रमुख जोखिम बना हुआ है। यदि तनाव बढ़ता है, तो आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आ सकता है, जिससे लागत बढ़ सकती है और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, यदि स्थिति सामान्य होती है, तो कंपनियों का विश्वास बढ़ सकता है। फिलहाल, विनिर्माण क्षेत्र विस्तार के रास्ते पर है, लेकिन जुलाई का आंकड़ा बताता है कि कंपनियां आगे की राह को लेकर सतर्क हैं।
स्रोत: newsx.com
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PMI और संबंधित संकेतक
जुलाई53.5
सटीक आंकड़े देखें
| श्रेणी | PMI |
|---|---|
| जून | 54.2 |
| जुलाई | 53.5 |
स्रोत:newsx.com स्रोत-समर्थित



