मुख्य तथ्य
- कानून
- एक्ट 10
- वर्ष
- 15वां वर्ष
- अदालत
- विस्कॉन्सिन कोर्ट ऑफ अपील्स
- अगला कदम
- विस्कॉन्सिन सुप्रीम कोर्ट
- वादी
- क्रिस्टी कोश्की
- बचाव पक्ष
- विस्कॉन्सिन इंस्टीट्यूट फॉर लॉ एंड लिबर्टी (WILL)
पृष्ठभूमि
विस्कॉन्सिन का एक्ट 10, जो अपने 15वें वर्ष में है, को हाल ही में विस्कॉन्सिन कोर्ट ऑफ अपील्स में एक चुनौती के खिलाफ फिर से बरकरार रखा गया है। यह कानून कुछ सार्वजनिक कर्मचारियों को, जो यूनियन के सदस्य नहीं हैं, 'फेयर शेयर' भुगतान से छूट देता है।
विस्कॉन्सिन इंस्टीट्यूट फॉर लॉ एंड लिबर्टी (WILL) इस कानून का बचाव कर रहा है। विल के डिप्टी काउंसल लुकास वेबर ने कहा कि वे कानून की रक्षा के लिए तैयार हैं, क्योंकि यह करदाताओं और स्थानीय सरकारों को लाभ पहुंचाता है।
वर्तमान स्थिति
यह मामला मूल रूप से डेन काउंटी सर्किट कोर्ट में लाया गया था, जहां अदालत ने पाया कि कानून के कुछ वर्गीकरण विस्कॉन्सिन संविधान के समान संरक्षण खंड का उल्लंघन करते हैं, और लगभग पूरे कानून को असंवैधानिक घोषित कर दिया था।
हालांकि, अपील कोर्ट ने कानून को बरकरार रखा है। विल का कहना है कि वे इस मामले को विस्कॉन्सिन सुप्रीम कोर्ट में ले जाने के लिए तैयार हैं। विल शिक्षिका क्रिस्टी कोश्की का प्रतिनिधित्व करता है, जो एक्ट 10 की आवश्यकता का समर्थन करती हैं कि यूनियनों को सालाना पुन: प्रमाणित होना पड़ता है।
प्रभाव
यदि विस्कॉन्सिन सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई करता है, तो इसका असर सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों और यूनियनों पर पड़ सकता है। यह कानून गैर-सदस्य कर्मचारियों को यूनियन भुगतान से छूट देता है, जिससे यूनियनों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है।
करदाताओं और स्थानीय सरकारों को इस कानून से लाभ हो सकता है, क्योंकि इससे सरकारी खर्च में कमी आ सकती है। हालांकि, यूनियनों का तर्क है कि इससे कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन होता है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि विस्कॉन्सिन सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई करता है, तो यह तय कर सकता है कि एक्ट 10 संवैधानिक है या नहीं। यदि अदालत कानून को बरकरार रखती है, तो यह लागू रहेगा, लेकिन यदि इसे असंवैधानिक घोषित किया जाता है, तो इसमें संशोधन की आवश्यकता हो सकती है।
विल का कहना है कि वे कानून का बचाव करने के लिए तैयार हैं, लेकिन अंतिम फैसला अदालत पर निर्भर करेगा। यह संभावना है कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि अदालत कब सुनवाई करेगी।
स्रोत: wjfw.com



