मार्केट

बाज़ार डेटा लोड हो रहा है…

विलंबित भाव
लाइव टीवी
राज्य

श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ संबंध भारत की पड़ोस नीति के प्रमुख मुद्दे: शशि थरूर

संसदीय समिति की अध्यक्षता कर रहे शशि थरूर ने कहा कि श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ संबंध भारत की पड़ोस विदेश नीति के प्रमुख मुद्दे हैं। समिति ने मंगलवार को विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से श्रीलंका संबंधों पर चर्चा की और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ संबंध भारत की पड़ोस नीति के प्रमुख मुद्दे: शशि थरूर
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

बैठक की तारीख
मंगलवार, 4 अगस्त 2026
विषय
भारत-श्रीलंका संबंध और आगे का रास्ता
वक्ता
शशि थरूर, अध्यक्ष, संसदीय स्थायी समिति (विदेश मामले)
मुख्य मुद्दे
श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ संबंध
लंबित रिपोर्ट
चार रिपोर्टें तैयार की जानी हैं
पाकिस्तान पर रिपोर्ट
हाल ही में रिपोर्ट बन चुकी है, भविष्य में नई रिपोर्ट संभव

पृष्ठभूमि

संसदीय स्थायी समिति (विदेश मामले) की अध्यक्षता कर रहे कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को कहा कि श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ संबंध भारत की पड़ोस विदेश नीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। उन्होंने यह बात समिति की बैठक के बाद कही, जिसमें 'भारत-श्रीलंका संबंध और आगे का रास्ता' विषय पर विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों के विचार सुने गए।

थरूर ने बताया कि समिति ने अपने कार्यकाल के दौरान भारत-श्रीलंका संबंधों के मुद्दे पर विचार किया है। पिछले साल विदेश सचिव ने समिति को जानकारी दी थी, और इस साल की शुरुआत में श्रीलंका में पूर्व राजदूतों सहित विषय विशेषज्ञों से भी ब्रीफिंग ली गई थी। यह बैठक विस्तृत प्रश्नों और पिछली बैठकों के बाद श्रीलंका संबंधों में हुए घटनाक्रमों पर अद्यतन जानकारी के साथ निष्कर्षात्मक विचार-विमर्श थी।

वर्तमान स्थिति

थरूर ने कहा कि बैठक के बाद एक मसौदा रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे सहमति के बाद संसद में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'सचिवालय को रिपोर्ट का मसौदा तैयार करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा, जिसे बाद में सहमति देकर संसद में पेश किया जाएगा। चार लंबित रिपोर्टें हैं जिन्हें तैयार किया जाना है। एक बार पूरा हो जाने पर, रिपोर्ट को अपनाने के लिए बैठकें होंगी।'

समिति श्रीलंका के साथ संबंधों से जुड़े सभी मुद्दों और चिंताओं को गंभीरता से ले रही है। थरूर ने कहा कि श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ संबंध भारत की पड़ोस विदेश नीति के शीर्ष महत्वपूर्ण मुद्दों में हैं। उन्होंने कहा कि इस विषय पर आगे कोई बैठक नहीं होगी।

समिति की बैठकों का विवरण
विवरण जानकारी
पिछले साल विदेश सचिव द्वारा ब्रीफिंगहाँ
इस साल विषय विशेषज्ञों द्वारा ब्रीफिंगहाँ (पूर्व राजदूत सहित)
वर्तमान बैठकविदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ
आगे की बैठकेंनहीं (इस विषय पर)
लंबित रिपोर्ट4
पाकिस्तान पर रिपोर्टहाल ही में बनी, मान्य
स्रोत: पाकिस्तान टेलीग्राफ की रिपोर्ट

प्रभाव

समिति की यह कार्रवाई भारत की पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाती है। श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ संबंधों को प्रमुखता दिए जाने से इन देशों के साथ भारत की नीतियों पर संसदीय निगरानी बढ़ सकती है। इससे क्षेत्रीय सहयोग और द्विपक्षीय मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित होने की संभावना है।

थरूर ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को इस बार समिति में नहीं उठाया गया क्योंकि हाल ही में उस पर रिपोर्ट बनाई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भविष्य के सत्रों में आएगा, और विदेश सचिव समिति को पाकिस्तान के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों की जानकारी देते रहेंगे। चीन पर भी कोई नई रिपोर्ट नहीं होगी क्योंकि मौजूदा रिपोर्ट अभी भी मान्य है।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि समिति चार लंबित रिपोर्टों को समय पर पूरा कर लेती है, तो उन्हें संसद में पेश किया जा सकता है, जिससे भारत की पड़ोस नीति पर संसदीय बहस को बल मिल सकता है। श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ संबंधों पर विशेष ध्यान दिए जाने से इन देशों के साथ व्यापार, निवेश और सुरक्षा सहयोग के नए अवसर खुल सकते हैं।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि रिपोर्ट में किन विशिष्ट सिफारिशों को शामिल किया जाएगा। यदि पाकिस्तान या चीन पर भविष्य में नई रिपोर्ट बनती है, तो यह मौजूदा रिपोर्टों की वैधता अवधि पर निर्भर करेगा। समिति के निष्कर्षों से भारत की विदेश नीति की दिशा प्रभावित हो सकती है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव तभी स्पष्ट होगा जब रिपोर्ट संसद में पेश होगी।

स्रोत: pakistantelegraph.com

इस समाचार को साझा करें