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शहरों में अत्यधिक गर्मी का भविष्य: जो हम जानते हैं और जो नहीं जानते

2023 में वैश्विक तापमान रिकॉर्ड टूटे। शहरी क्षेत्र ग्रामीण इलाकों की तुलना में अधिक गर्मी झेलते हैं, क्योंकि शहरी ताप द्वीप प्रभाव से गर्मी फंसती है। वर्तमान नीतियों से 2100 तक 2.5-2.9°C तापमान बढ़ने की संभावना है।

मुख्य तथ्य

वैश्विक तापमान वृद्धि (2023)
1.1°C (पूर्व-औद्योगिक स्तर से)
2100 तक अनुमानित तापमान वृद्धि
2.5°C से 2.9°C
शहरी ताप द्वीप प्रभाव
इमारतों, कंक्रीट और बुनियादी ढांचे से गर्मी फंसती है
अतिरिक्त जोखिम कारक
जनसंख्या घनत्व, वायु प्रदूषण, गरीबी, स्थानीय भौगोलिक स्थिति

पृष्ठभूमि

2023 में दुनिया भर में तापमान के रिकॉर्ड टूटे। विभिन्न क्षेत्रों में लोग पहले से ही ऐतिहासिक गर्मी की लहरों, जंगल की आग और सूखे का सामना कर रहे हैं, जबकि पूर्व-औद्योगिक स्तर से तापमान में केवल 1.1°C की वृद्धि हुई है।

वर्तमान नीतियों के तहत, दुनिया 2100 तक 2.5°C से 2.9°C तापमान वृद्धि की ओर अग्रसर है। इस साल महसूस की गई भीषण गर्मी भविष्य का एक छोटा सा संकेत मात्र है।

वर्तमान स्थिति

गर्म होती दुनिया में, शहर ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक गर्मी झेलते हैं। इसका पहला कारण यह है कि शहरों में अधिकांश आबादी निवास करती है।

इसके अलावा, शहरी ताप द्वीप प्रभाव के कारण उच्च तापमान का जोखिम और बढ़ जाता है, जहां इमारतों, कंक्रीट और अन्य बुनियादी ढांचे की सघनता किसी क्षेत्र में गर्मी को फंसा लेती है। जनसंख्या घनत्व, वायु प्रदूषण, गरीबी और स्थानीय भौगोलिक स्थिति जैसे कारक शहरी निवासियों की संवेदनशीलता को और बढ़ाते हैं।

तापमान वृद्धि के आंकड़े
विवरण मान
2023 में वैश्विक तापमान वृद्धि1.1°C
2100 तक अनुमानित वृद्धि (वर्तमान नीतियां)2.5°C - 2.9°C
आंकड़े स्रोत से सीधे लिए गए हैं।

प्रभाव

शहरी क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी का सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ता है, क्योंकि उच्च तापमान से हीट स्ट्रोक, निर्जलीकरण और अन्य गर्मी से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

वायु प्रदूषण और गरीबी जैसे कारक सबसे कमजोर वर्गों को अधिक प्रभावित कर सकते हैं, क्योंकि उनके पास ठंडक पाने के साधन सीमित होते हैं। इसके अलावा, शहरी ताप द्वीप प्रभाव से ऊर्जा की खपत बढ़ सकती है, क्योंकि ठंडक के लिए एयर कंडीशनिंग का उपयोग अधिक होता है।

भविष्य का परिदृश्य

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि वर्तमान नीतियां जारी रहती हैं, तो 2100 तक तापमान में 2.5°C से 2.9°C की वृद्धि हो सकती है, जिससे शहरों में गर्मी की घटनाएं और अधिक गंभीर हो सकती हैं।

हालांकि, यदि उत्सर्जन में तेजी से कटौती की जाती है, तो तापमान वृद्धि को सीमित किया जा सकता है, जिससे शहरों पर पड़ने वाले प्रभाव कम हो सकते हैं। लेकिन यह अनिश्चित है कि क्या वैश्विक स्तर पर ऐसे प्रयास पर्याप्त होंगे।

शहरी नियोजन और बुनियादी ढांचे में बदलाव, जैसे हरित स्थानों को बढ़ाना और ऊष्मा-प्रतिबिंबित सामग्री का उपयोग, भविष्य में गर्मी के प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए ठोस नीतिगत कदमों की आवश्यकता होगी।

स्रोत: archdaily.com

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