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पाकिस्तान PoJK के निवासियों को राजनीतिक हेरफेर और सैन्य दमन से वश में कर रहा है: रिपोर्ट

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान पर यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस्लामाबाद PoJK के कश्मीरियों को संवैधानिक प्रतिबंधों, राजनीतिक हेरफेर और सैन्य दमन से वश में कर रहा है। प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी से साबित होता है कि PoJK के निवासियों की जान की कीमत नहीं है।

पाकिस्तान PoJK के निवासियों को राजनीतिक हेरफेर और सैन्य दमन से वश में कर रहा है: रिपोर्ट
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

रक्षा मंत्री का बयान
ख्वाजा आसिफ ने PoJK प्रदर्शनकारियों को 'दुश्मन' कहा
प्रदर्शन की शुरुआत
5 जून से शुरू, लगातार तेज
मौतें
50 से अधिक लोग मारे गए
घायल
सैकड़ों घायल
JKJAAC का गठन
2023 में परिवहनकर्ताओं, वकीलों, छात्रों द्वारा
मांगें
बिजली दरों में कटौती, सब्सिडी वाला गेहूं, 12 सीटें समाप्त

पृष्ठभूमि

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) के प्रदर्शनकारियों को भारत से जोड़ते हुए उन्हें 'दुश्मन' करार दिया। यूरेशिया रिव्यू की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बयान दर्शाता है कि इस्लामाबाद अपने अवैध कब्जे को जारी रखते हुए PoJK को एक उपनिवेश मानता है और वहां के लोगों के साथ द्वितीय श्रेणी के नागरिकों जैसा व्यवहार करता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मुद्दा PoJK के कश्मीरियों को संवैधानिक प्रतिबंधों, राजनीतिक हेरफेर और सैन्य दमन के माध्यम से वश में करने का है, जबकि विडंबना यह है कि पाकिस्तान उन्हें 'आज़ाद' कहता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी यह साबित करती है कि PoJK के निवासियों की जान की कोई कीमत नहीं है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उदासीनता भी स्पष्ट है।

वर्तमान स्थिति

PoJK में वर्तमान में दशकों में स्थानीय आबादी और पाकिस्तानी राज्य के बीच सबसे व्यापक टकराव देखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन 5 जून से शुरू हुए और लगातार तेज होते जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कठोर कार्रवाई की, जिसमें पिछले कई हफ्तों में 50 से अधिक लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए हैं।

2023 में, परिवहनकर्ताओं, वकीलों, छात्रों और अन्य नागरिक समूहों ने मिलकर जम्मू-कश्मीर संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) का गठन किया था। इस गठबंधन ने PoJK में लोगों का समर्थन प्राप्त किया क्योंकि इसने बुनियादी आर्थिक और शासन सुधारों की मांग उठाई। आर्थिक मांगों में मंगला बांध से उत्पादित बिजली की लागत के आधार पर बिजली दरों में कटौती और सब्सिडी वाले गेहूं की आपूर्ति शामिल थी। शासन सुधारों में राजनेताओं और नौकरशाहों के भत्तों और विशेषाधिकारों को समाप्त करना तथा PoJK विधानसभा में जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करना शामिल था, क्योंकि इनका उपयोग सत्तारूढ़ दल कृत्रिम बहुमत बनाकर राजनीतिक निर्णयों में हेरफेर करने के लिए कर रहे थे।

PoJK विरोध प्रदर्शन: प्रमुख आंकड़े
विवरण आंकड़ा
मौतें50 से अधिक
घायलसैकड़ों
प्रदर्शन प्रारंभ5 जून
आरक्षित सीटें12
आंकड़े यूरेशिया रिव्यू की रिपोर्ट से लिए गए हैं।

प्रभाव

2023 में आटे की कीमतों और बिजली दरों में वृद्धि के खिलाफ PoJK में विरोध प्रदर्शन हुए, और PoJK सरकार ने आटे पर सब्सिडी लागू करने और बिजली दरों को स्थिर करने पर सहमति व्यक्त की। हालांकि, PoJK अधिकारियों की ओर से ईमानदारी की कमी के कारण 2024, 2025 और वर्तमान में भी विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जो दर्शाता है कि स्थानीय और संघीय सरकारों ने कोई सबक नहीं सीखा है।

पाकिस्तानी अधिकारी क्रूर बल प्रयोग के बावजूद प्रदर्शनों को दबाने में सक्षम नहीं हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई मौतें और गंभीर चोटें हुई हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत JKJAAC को प्रतिबंधित कर दिया है। इस बीच, JKJAAC ने पाकिस्तान रेड क्रिसेंट सोसाइटी को एक पत्र लिखकर रावलकोट और कब्जे वाले क्षेत्र के अन्य प्रभावित इलाकों में तत्काल मानवीय और चिकित्सा सहायता का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि 27-28 जुलाई की घटनाओं के बाद PoJK में स्थिति एक 'गंभीर मानवीय और चिकित्सा आपातकाल' में बदल गई है।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि पाकिस्तानी अधिकारी प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान नहीं देते हैं और दमन जारी रखते हैं, तो PoJK में हिंसा और बढ़ सकती है और मानवीय संकट गहरा सकता है। JKJAAC द्वारा अनुरोधित स्वतंत्र मूल्यांकन और चिकित्सा सहायता यदि उपलब्ध नहीं होती है, तो घायलों और विस्थापितों की स्थिति और खराब हो सकती है।

यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय हस्तक्षेप करता है और पाकिस्तान पर दबाव डालता है, तो संभावना है कि पाकिस्तान को बातचीत के लिए मजबूर होना पड़े और संकट का समाधान निकल सकता है। हालांकि, यदि पाकिस्तान अपनी नीति जारी रखता है, तो PoJK में असंतोष और विद्रोह बढ़ सकता है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

स्रोत: ianslive.in

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