मुख्य तथ्य
- घोषणा की तिथि
- 4 अगस्त, 2026
- सुझावों की अंतिम तिथि
- 15 अक्टूबर
- समिति के अध्यक्ष
- न्यायमूर्ति देसाई
- सुझाव देने के माध्यम
- ईमेल, वेब पोर्टल, डाक
- मुख्यमंत्री
- विष्णु देव साय
- यूसीसी लागू करने वाले राज्य
- उत्तराखंड, गुजरात, असम, मध्य प्रदेश
पृष्ठभूमि
छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने मंगलवार (4 अगस्त, 2026) को घोषणा की कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए गठित समिति ने प्रस्तावित कानून पर नागरिकों, संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं।
आधिकारिक बयान के अनुसार, पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति ने सुझावों के लिए 15 अक्टूबर की अंतिम तिथि निर्धारित की है। पिछले महीने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा था कि यूसीसी को आगामी शीतकालीन सत्र में विधानसभा में पेश किया जाएगा।
वर्ष 2024 से उत्तराखंड, गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू की जा चुकी है, जो मुख्य रूप से विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यक्तिगत कानून के क्षेत्रों को विनियमित करती है।
वर्तमान स्थिति
समिति के कार्यक्षेत्र के बारे में आधिकारिक बयान में कहा गया है, “समिति यूसीसी लागू करने के कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर रही है। इसके अधिदेश में राज्य के मौजूदा कानूनी ढांचे की जांच करना और विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों पर व्यावहारिक सिफारिशें तैयार करना शामिल है।”
समिति अन्य राज्यों द्वारा अपनाए गए यूसीसी मॉडल का अध्ययन करेगी, नागरिकों, कानूनी विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों से प्राप्त सुझावों पर विचार करेगी, और विधायी तथा प्रशासनिक सिफारिशों के साथ एक व्यापक मसौदा तैयार करेगी।
समिति ने सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों, सामाजिक समूहों, धार्मिक संस्थानों, समुदायों, राजनीतिक दलों और नागरिकों से 15 अक्टूबर तक अपने विचार और सुझाव प्रस्तुत करने की अपील की है। सुझाव ईमेल (ucc-chhattisgarh@cg.gov.in), वेब पोर्टल (https://ucc.cgstate.gov.in/) या डाक द्वारा कार्यालय, समान नागरिक संहिता समिति, न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस, कक्ष संख्या 202, रायपुर, छत्तीसगढ़ – 492001 पर भेजे जा सकते हैं।
| राज्य | लागू होने का वर्ष | मुख्य प्रावधान |
|---|---|---|
| उत्तराखंड | 2024 | विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन |
| गुजरात | 2024 | विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन |
| असम | 2024 | विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन |
| मध्य प्रदेश | 2024 | बहुविवाह पर प्रतिबंध, लिव-इन पंजीकरण अनिवार्य, आदिवासी छूट |
प्रभाव
सरकारी बयान में कहा गया है कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्य धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर सभी नागरिकों को एक सामान्य संवैधानिक ढांचे में लाना है। हालांकि, विपक्ष लंबे समय से मांग करता रहा है कि इस तरह के कानून में आदिवासी समुदायों के लिए छूट प्रदान की जाए।
विपक्ष की मांग है कि आदिवासी समुदायों की सदियों पुरानी रूढ़िवादी परंपराओं, विवाह प्रणालियों और सामाजिक व्यवस्थाओं को यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाए ताकि उनके विशिष्ट अधिकारों का उल्लंघन न हो।
जुलाई में मध्य प्रदेश विधानसभा ने यूसीसी विधेयक पारित किया था, जिसमें बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य करने के प्रावधान हैं, जबकि आदिवासी समुदाय को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि समिति 15 अक्टूबर तक प्राप्त सुझावों को शामिल करते हुए अपना मसौदा तैयार कर लेती है, तो सरकार शीतकालीन सत्र में विधेयक पेश कर सकती है, जैसा कि मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है।
हालांकि, यदि आदिवासी समुदायों के लिए छूट को लेकर विपक्ष और सामाजिक संगठनों की आपत्तियां बनी रहती हैं, तो विधेयक के पारित होने में देरी हो सकती है या इसमें संशोधन किए जा सकते हैं।
यह स्पष्ट नहीं है कि समिति की सिफारिशों में आदिवासी समुदायों के लिए कोई विशेष प्रावधान शामिल किए जाएंगे या नहीं। यदि मध्य प्रदेश के मॉडल का अनुसरण किया जाता है, तो छत्तीसगढ़ में भी आदिवासियों को छूट दी जा सकती है, लेकिन यह अभी अनिश्चित है।
स्रोत: thehindu.com
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यूसीसी लागू करने वाले राज्य और मुख्य प्रावधान
मध्य प्रदेश2,024
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| श्रेणी | लागू होने का वर्ष |
|---|---|
| उत्तराखंड | 2,024 |
| गुजरात | 2,024 |
| असम | 2,024 |
| मध्य प्रदेश | 2,024 |
स्रोत:thehindu.com स्रोत-समर्थित



