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कश्मीर पर 2019 के बाद: जनसांख्यिकी, पहचान और अंतरराष्ट्रीय कानून

डेली सबा की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में अनुच्छेद 370 और 35-ए हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में जनसांख्यिकीय बदलाव, मानवाधिकार उल्लंघन और पहचान पर खतरे की आशंका जताई गई है।

कश्मीर पर 2019 के बाद: जनसांख्यिकी, पहचान और अंतरराष्ट्रीय कानून
Graphic: Amrit Khabar NewsroomImage rights policy

मुख्य तथ्य

घटना
यौम-ए-इस्तेहसाल-ए-कश्मीर 5 अगस्त को मनाया जाता है
वर्ष
2019 में अनुच्छेद 370 और 35-ए निरस्त
अनुच्छेद 35-ए
1954 से स्थायी निवासियों को भूमि और नौकरी का अधिकार
डोमिसाइल प्रमाणपत्र
2019 से लाखों जारी
मानवाधिकार संगठन
एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच
सैन्यीकरण
दुनिया का सबसे अधिक सैन्यीकृत क्षेत्र

पृष्ठभूमि

हर साल 5 अगस्त को यौम-ए-इस्तेहसाल-ए-कश्मीर मनाया जाता है, जिसे कश्मीर के शोषण दिवस के रूप में जाना जाता है। यह दिन भारत द्वारा 2019 में किए गए संवैधानिक बदलावों की याद दिलाता है, जिसमें अनुच्छेद 370 और 35-ए को निरस्त करना शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, इन कदमों को क्षेत्र की शांति और सुरक्षा तथा कश्मीरी लोगों के मौलिक अधिकारों पर गंभीर प्रभाव डालने वाला बताया गया है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 35-ए, जो 1954 से लागू था, जम्मू-कश्मीर में स्थायी निवासियों को भूमि स्वामित्व और सरकारी नौकरी का अधिकार सुरक्षित रखता था। यह प्रावधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत विवादित क्षेत्र की जनसांख्यिकीय विशेषता को संरक्षित करने के लिए था, जब तक कि लोग अपना भविष्य खुद तय नहीं कर लेते।

वर्तमान स्थिति

2019 के बाद, नए डोमिसाइल कानून लागू किए गए, जिन्होंने निवास, भूमि स्वामित्व और सरकारी रोजगार की पात्रता उन लोगों तक बढ़ा दी जो पहले स्थायी निवासी नहीं थे। रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से लाखों डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं, और कानून द्वारा संरक्षित भूमि अब गैर-स्थानीय व्यक्तियों और संस्थाओं के लिए उपलब्ध हो रही है। इसे जनसांख्यिकीय इंजीनियरिंग की प्रक्रिया बताया गया है।

मानवाधिकार संगठनों, जिनमें एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच शामिल हैं, ने क्षेत्र में संचार ब्लैकआउट, इंटरनेट शटडाउन, राजनीतिक नेताओं की हिरासत, सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA) के तहत सुरक्षा बलों को छूट, जबरन गायब करना और अतिरिक्त न्यायिक हत्याओं की चिंता जताई है। पत्रकारों के उत्पीड़न और यात्रा प्रतिबंध की भी सूचना है।

प्रमुख घटनाएं और प्रावधान
वर्ष घटना/प्रावधान
1954अनुच्छेद 35-ए लागू
2019अनुच्छेद 370 और 35-ए निरस्त
2019 के बादनए डोमिसाइल कानून
स्रोत: dailysabah.com

प्रभाव

इन घटनाक्रमों ने कश्मीरियों के बीच उनकी पहचान और मातृभूमि के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। शैक्षिक पाठ्यक्रम में बदलाव, क्षेत्र के इतिहास की प्रस्तुति और कश्मीरी भाषा तथा सांस्कृतिक विरासत के स्थान को लेकर चिंताएं जताई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कई कश्मीरियों को लगता है कि उनकी अलग पहचान को व्यवस्थित रूप से मिटाया जा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि ये रुझान भारत में भाजपा और आरएसएस द्वारा अपनाए गए हिंदुत्व एजेंडे का हिस्सा हैं, जिसे 'भगवाकरण' कहा जाता है। अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव और हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं, और सबसे गंभीर स्थिति जम्मू-कश्मीर में है।

भविष्य की संभावनाएं

विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।

यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को नजरअंदाज करता है, तो यह एक भूला हुआ विवाद बन सकता है, जबकि यह दुनिया का सबसे अधिक सैन्यीकृत क्षेत्र है। दक्षिण एशिया में स्थायी शांति तभी संभव है जब इस मुद्दे का समाधान कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुरूप हो।

यदि भारत अपने अवैध कदमों को नहीं पलटता और मानवाधिकारों का सम्मान नहीं करता, तो क्षेत्र में तनाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने की स्थिति में भारत को अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में क्या होगा, लेकिन संभावना है कि यदि बातचीत नहीं हुई तो स्थिति और खराब हो सकती है।

स्रोत: dailysabah.com

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