मुख्य तथ्य
- कंपनी
- एक्यूरेट इंडस्ट्रियल कंट्रोल्स, पुणे
- प्रमाणन
- आईआरएस AUTN 4-R(N)
- बोट की लंबाई
- 13 मीटर
- निर्माण स्थल
- एसएचएम शिपयार्ड, मुंबई
- परीक्षण स्थल
- अरब सागर, कारवार
- अतिरिक्त नाव
- 5 मीटर एसएआर क्राफ्ट, सुमित शिपयार्ड, कोच्चि
पृष्ठभूमि
भारतीय रजिस्टर ऑफ शिपिंग (आईआरएस) ने पुणे स्थित ऑटोमेशन विशेषज्ञ एक्यूरेट इंडस्ट्रियल कंट्रोल्स द्वारा निर्मित नई पेट्रोल बोट को प्रमाणित किया है, जिसमें कोलिजन अवॉइडेंस सॉफ्टवेयर लगा है। यह प्रमाणन समुद्री परीक्षणों के बाद दिया गया है।
एक्यूरेट के एआई और रोबोटिक्स निदेशक धर्मेश पोपटलाल गाला के अनुसार, आईएसीएसए प्रणाली में रडार, जीएनएसएस, इको साउंडर, सीसीटीवी और पूर्ण कोलिजन अवॉइडेंस स्टैक सहित कई स्थितिजन्य जागरूकता सेंसर शामिल हैं। इसे आईएमओ के COLREGs नियमों के अनुरूप आईआरएस AUTN 4-R(N) प्रमाणन प्राप्त हुआ है।
यह बोट मुंबई के एसएचएम शिपयार्ड लिमिटेड में बनाई गई है और इसके समुद्री परीक्षण अरब सागर के कारवार तट पर हुए।
वर्तमान स्थिति
सफल परीक्षणों के बाद, एक्यूरेट को वाणिज्यिक और नौसेना बाजारों के लिए नए निर्माण और रेट्रोफिट दोनों संस्करणों के लिए ऑर्डर और रुचि मिल रही है। कंपनी ने कोच्चि के सुमित शिपयार्ड में 5 मीटर का स्वायत्त 'एसएआर क्राफ्ट' भी बनाया है।
आईएसीएसए प्लेटफॉर्म मर्करी, कॉक्स और किसी भी CAN/MODBUS आधारित प्रणोदन प्रणाली के साथ संगत है, और उपयुक्त एक्चुएटर्स का उपयोग करके गैर-डिजिटल प्रणोदन को भी एकीकृत कर सकता है।
कंपनी के अनुसार, आईएसीएसए की कोलिजन अवॉइडेंस सॉफ्टवेयर (दृष्टिपथ) बिना स्वायत्त नियंत्रण के, लेकिन ऑडियो/विजुअल अलर्ट के साथ, व्हीलहाउस सह-नेविगेटर के रूप में उपलब्ध है।
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| निरंतर स्वायत्त संचालन | 24/7 निगरानी और मिशन निष्पादन बिना चालक दल के |
| उन्नत सेंसर फ्यूजन | रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरे, एआईएस और जड़त्वीय नेविगेशन का संयोजन |
| स्थिति धारणा | कई जहाजों और वस्तुओं का पता लगाना, वर्गीकरण और ट्रैकिंग |
| 360° स्थितिजन्य जागरूकता | जटिल समुद्री वातावरण में निरंतर चारों ओर निगरानी |
| स्वायत्त मिशन योजना | बदलती परिस्थितियों के अनुसार मार्ग और गश्त पैटर्न का अनुकूलन |
| COLREGS-अनुरूप कोलिजन अवॉइडेंस | वास्तविक समय जोखिम विश्लेषण और सुरक्षित युद्धाभ्यास |
| सटीक पोत नियंत्रण | हवा, लहरों और धाराओं की भरपाई के साथ स्टीयरिंग और थ्रॉटल कमांड |
| रिमोट कमांड और नियंत्रण | वास्तविक समय में पोत की स्थिति और सेंसर फ़ीड की निगरानी, मैनुअल ओवरराइड के साथ |
प्रभाव
एक्यूरेट के निदेशक के अनुसार, आईएसीएसए प्रणाली से लैस स्वायत्त नावें चालक दल की जगह ले सकती हैं और कम परिचालन लागत पर 24/7 निगरानी और निरंतर जागरूकता प्रदान कर सकती हैं। यह नौसेना क्षेत्र में विशेष रूप से प्रासंगिक है जहां खतरे बदल रहे हैं।
इस तकनीक के अनुप्रयोगों में बंदरगाह और बंदरगाह सुरक्षा, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, अपतटीय ऊर्जा, तटीय निगरानी, पर्यावरण निगरानी, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण, निरीक्षण मिशन, सीमा सुरक्षा और समुद्री रक्षा संचालन शामिल हैं।
कंपनी का दावा है कि यह तकनीक पारंपरिक गश्ती नावों पर दबाव कम कर सकती है, जिन्हें निरंतर चालक दल की आवश्यकता होती है और वे बड़े क्षेत्रों में लगातार जागरूकता नहीं बनाए रख सकती हैं।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
एक्यूरेट के निदेशक ने यूरोप, मध्य पूर्व, भारत और अन्य क्षेत्रों में कोलिजन अवॉइडेंस सॉफ्टवेयर और स्वायत्त नेविगेशन समाधानों की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण विकास क्षमता देखी है। उन्होंने नौसेनाओं, तटरक्षकों, बंदरगाहों और अपतटीय बाजार से पूछताछ का उल्लेख किया।
यदि कंपनी को अपेक्षित ऑर्डर मिलते हैं, तो यह भारत को वैश्विक समुद्री स्वायत्तता बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इन ऑर्डरों की वित्तीय राशि क्या है या वे कब पूरे होंगे।
यदि लागत प्रतिस्पर्धात्मक रहती है और तकनीक प्रदर्शन बनाए रखती है, तो स्वायत्त नेविगेशन समाधानों का व्यापक रूप से अपनाया जाना संभव है। अन्यथा, बाजार में प्रतिस्पर्धा और नियामक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
स्रोत: maritime-executive.com



