मुख्य तथ्य
- स्रोत
- याहू न्यूज़, द कन्वर्सेशन से पुनर्प्रकाशित
- लेखक
- अलियासगर के. सेलम, आयोवा विश्वविद्यालय
- मुख्य विषय
- मकड़ी के रेशम से दवा वितरण और घाव देखभाल सामग्री विकसित करना
- रेशम का निर्माण
- मकड़ी के शरीर में तरल प्रोटीन से ठोस रेशे में परिवर्तन
- प्रयोगात्मक अध्ययन
- इंजीनियर्ड रेशम कणों ने लगभग दो सप्ताह तक दवा जारी की
- अनुप्रयोग
- दवा वितरण, घाव भरना, ऊतक इंजीनियरिंग
पृष्ठभूमि
मकड़ी का रेशम एक जैविक पदार्थ है जो मकड़ियों द्वारा निर्मित होता है। यह मुख्य रूप से स्पाइड्रोइन नामक बड़े प्रोटीन से बना होता है, जिसमें कठोर और लचीले हिस्से होते हैं। यह संरचना रेशम को मजबूती और कठोरता प्रदान करती है।
मकड़ियाँ अपने शरीर में तैयार धागा नहीं रखतीं, बल्कि पेट की ग्रंथियों में तरल रूप में प्रोटीन जमा करती हैं। जब यह तरल एक संकीर्ण नली से गुजरता है, तो पानी निकल जाता है, pH घटता है और आयनों का संतुलन बदलता है, जिससे प्रोटीन एक ठोस रेशे में बदल जाता है।
यह प्रक्रिया सामान्य कमरे के तापमान पर और जल-आधारित प्रणाली में होती है, जबकि सिंथेटिक फाइबर बनाने के लिए अक्सर उच्च ताप या कठोर रसायनों की आवश्यकता होती है।
वर्तमान स्थिति
वैज्ञानिक मकड़ी के रेशम का अध्ययन कर रहे हैं और इसे विभिन्न तकनीकी अनुप्रयोगों के लिए अनुकूलित करने का प्रयास कर रहे हैं। वे मकड़ियों से सीधे रेशम निकालने के बजाय, रेशम के जीन को बैक्टीरिया या अन्य कोशिकाओं में डालकर इंजीनियर्ड रेशम प्रोटीन बनाते हैं।
इन प्रोटीनों को कणों, फिल्मों, जैल, फाइबर और छिद्रपूर्ण स्कैफोल्ड के रूप में आकार दिया जा सकता है। प्रयोगशाला अध्ययनों में, इंजीनियर्ड मकड़ी रेशम के कणों ने लगभग दो सप्ताह तक लगभग स्थिर दर से छोटे अणुओं को जारी किया।
शोधकर्ताओं ने इंसुलिन और एंटीबॉडी उपचार जैसी प्रोटीन-आधारित दवाओं के लिए रेशम कणों और जैल का भी पता लगाया है। ये प्रणालियाँ अभी प्रयोगात्मक हैं, लेकिन दिखाती हैं कि एक बायोडिग्रेडेबल सामग्री दवा की रक्षा कर सकती है और उसके रिलीज़ को नियंत्रित कर सकती है।
प्रभाव
मकड़ी के रेशम से बने स्कैफोल्ड ऊतक मरम्मत में मदद कर सकते हैं। ये अस्थायी त्रि-आयामी ढांचे होते हैं जो कोशिकाओं को जुड़ने, बढ़ने और व्यवस्थित होने के लिए स्थान देते हैं। वैज्ञानिक इंजीनियर्ड रेशम में कोशिका-बंधन संकेत या अन्य जैविक संकेत जोड़ते हैं, जो कोशिकाओं को रेशम स्कैफोल्ड से जुड़ने के लिए कहते हैं।
चोट के आधार पर, एक स्कैफोल्ड त्वचा पर घाव को ढक सकता है या शरीर के अंदर क्षतिग्रस्त ऊतक के क्षेत्र को पाटने या भरने के लिए प्रत्यारोपित किया जा सकता है। पशु अध्ययनों में जलने के घावों को ढकने के लिए पुनः संयोजक मकड़ी रेशम का परीक्षण किया गया है, और प्रयोगशाला अध्ययनों में तंत्रिका मरम्मत का मार्गदर्शन करने के लिए रेशम-आधारित संरचनाओं का पता लगाया गया है।
शोधकर्ताओं की टीम ने हड्डी पुनर्जनन के लिए 3D-मुद्रित सिंथेटिक स्कैफोल्ड में भी यही सिद्धांत लागू किया है। ये स्कैफोल्ड रेशम स्कैफोल्ड के समान शारीरिक समर्थन प्रदान करते हैं, साथ ही DNA निर्देश देते हैं जो आस-पास की कोशिकाओं को रक्त वाहिका वृद्धि और ऊतक मरम्मत का समर्थन करने वाले संकेत उत्पन्न करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
भविष्य की संभावनाएँ
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
वैज्ञानिक अभी भी मकड़ियों के रेशम निर्माण पर पूर्ण नियंत्रण या उनके जालों की जटिल वास्तुकला को पूरी तरह से दोहरा नहीं सकते हैं। हालाँकि, मकड़ी के रेशम ने दवा वितरण, घाव देखभाल और ऊतक इंजीनियरिंग के लिए प्रयोगात्मक दृष्टिकोण को प्रेरित किया है।
यदि आगे के शोध सफल रहते हैं, तो मकड़ी के रेशम-आधारित सामग्री दवा वितरण प्रणालियों में क्रांति ला सकती है, जिससे दवाओं की नियंत्रित रिलीज़ संभव हो सकेगी। यह मधुमेह या ऑटोइम्यून बीमारियों जैसी स्थितियों के उपचार में सुधार कर सकता है, जहाँ नियमित इंजेक्शन की आवश्यकता होती है।
हालाँकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये प्रयोगात्मक प्रणालियाँ कब व्यावसायिक रूप से उपलब्ध होंगी। यदि नैदानिक परीक्षण सफल होते हैं, तो वे घाव भरने और ऊतक मरम्मत के लिए नए उपचार प्रदान कर सकते हैं, लेकिन अभी यह संभावना बनी हुई है।
स्रोत: yahoo.com



