मुख्य तथ्य
- प्रकोप घोषणा
- 15 मई, 2026
- पुष्ट मौतें
- 1,600 से अधिक
- मातृ मृत्यु (प्रति सप्ताह)
- 3.1 से बढ़कर 5.8
- स्वास्थ्य केंद्रों के बाहर मौतें
- 9.1% से 17.4%
- प्रसवपूर्व पंजीकरण में गिरावट
- 60 से घटकर 10 प्रति माह
- स्वास्थ्य कर्मियों की मौत
- 44
पृष्ठभूमि
पूर्वी कांगो के इटुरी प्रांत में 15 मई को इबोला प्रकोप घोषित किया गया था। यह अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप है, जिसमें 1,600 से अधिक पुष्ट मौतें हो चुकी हैं। इस क्षेत्र में पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं और हिंसा का खतरा बना रहता है।
कांगो में मातृ मृत्यु दर दुनिया में सबसे अधिक है। 2023 में कम से कम 19,000 महिलाओं की मृत्यु गर्भावस्था की जटिलताओं से हुई, जो भारत के बराबर और नाइजीरिया के बाद दूसरे स्थान पर है। महिलाएं औसतन लगभग छह बच्चों को जन्म देती हैं।
वर्तमान स्थिति
इबोला प्रकोप की घोषणा के बाद से गर्भवती महिलाएं प्रसवपूर्व जांच के लिए अस्पताल जाने से बच रही हैं। बुनिया की 26 वर्षीय एस्तेर लुतुला ने बताया कि वह बुखार होने पर अलगाव में डाले जाने के डर से जांच करवाना बंद कर दिया। कई निवासियों का मानना है कि अस्पताल जाने पर उन्हें तुरंत इबोला का मरीज मानकर क्वारंटीन कर दिया जाएगा।
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) के आंकड़ों के अनुसार, प्रकोप से पहले इस साल साप्ताहिक औसतन 3.1 मातृ मृत्यु होती थी, जो 25 मई से 19 जुलाई के बीच बढ़कर 5.8 हो गई। स्वास्थ्य केंद्रों के बाहर होने वाली मौतों का प्रतिशत भी 9.1% से बढ़कर 17.4% हो गया।
बुनिया के बेनेडिक्ट क्लिनिक में प्रसवपूर्व देखभाल के लिए पंजीकृत महिलाओं की संख्या 60 प्रति माह से घटकर लगभग 10 रह गई है। स्वास्थ्य कर्मियों पर हमले भी बढ़े हैं, और कम से कम 12 हमले दर्ज किए गए हैं। कई स्वास्थ्य कर्मियों ने वेतन न मिलने के विरोध में काम बंद कर दिया है।
| अवधि | औसत साप्ताहिक मृत्यु | स्वास्थ्य केंद्रों के बाहर मृत्यु (%) |
|---|---|---|
| प्रकोप से पहले (2026) | 3.1 | 9.1 |
| 25 मई – 19 जुलाई | 5.8 | 17.4 |
प्रभाव
इबोला के डर से गर्भवती महिलाओं के अस्पताल न जाने के कारण मातृ मृत्यु दर में वृद्धि हुई है। यूएनएफपीए की उप देश प्रतिनिधि नोएमी डालमोंटे ने कहा कि महिलाएं इबोला से नहीं, बल्कि उस देखभाल के अभाव में मर रही हैं जो उन्हें बचा सकती थी।
इबोला उपचार केंद्रों पर हमलों के कारण महिलाएं हिंसा का शिकार होने से भी डरती हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं में स्टाफ और आपूर्ति की कमी के कारण प्रसवपूर्व देखभाल और प्रसव सेवाएं प्रभावित हुई हैं। कम से कम 44 संक्रमित स्वास्थ्य कर्मियों की मौत हो चुकी है।
महिलाएं आमतौर पर परिवार में बीमार व्यक्ति की देखभाल करती हैं, इसलिए वे संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। कई गर्भवती स्वास्थ्य कर्मी भी इस प्रकोप के दौरान काम कर रही हैं।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषणात्मक परिदृश्य: नीचे दी गई संभावनाएं निश्चित भविष्यवाणी नहीं हैं।
यदि इबोला प्रकोप पर नियंत्रण नहीं हुआ और गर्भवती महिलाओं में अस्पताल जाने का डर बना रहा, तो मातृ मृत्यु दर और बढ़ सकती है। स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल और संसाधनों की कमी के कारण स्थिति और खराब हो सकती है।
यदि गलत सूचना और अफवाहों पर काबू पाया जा सके और स्वास्थ्य केंद्रों पर भरोसा बहाल किया जा सके, तो महिलाएं फिर से प्रसवपूर्व देखभाल के लिए आ सकती हैं और मृत्यु दर में कमी आ सकती है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये प्रयास कितने प्रभावी होंगे, क्योंकि इस क्षेत्र में हिंसा और अस्थिरता बनी हुई है।
स्रोत: latimes.com
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मातृ मृत्यु दर में बदलाव
25 मई – 19 जुलाई5.8
सटीक आंकड़े देखें
| श्रेणी | औसत साप्ताहिक मृत्यु | स्वास्थ्य केंद्रों के बाहर मृत्यु (%) |
|---|---|---|
| प्रकोप से पहले (2026) | 3.1 | 9.1 |
| 25 मई – 19 जुलाई | 5.8 | 17.4 |
स्रोत:latimes.com स्रोत-समर्थित



