बेंगलुरु: कर्नाटक मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान अंतिम समय में हुए बदलाव और एक नेता को मंत्री पद से हटाए जाने से दिन अफरातफरी भरा रहा। यह जानकारी टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार से पहले अंतिम समय में एक नेता की जगह दूसरे को शामिल किया गया, जबकि एक अन्य नेता को मंत्री पद से वंचित कर दिया गया। इससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
इस बीच, कर्नाटक मंत्रिमंडल में पहली बार कोई ब्राह्मण मंत्री नहीं होने की बात भी सामने आई है। यह राज्य के इतिहास में पहला मौका है जब मंत्रिमंडल में ब्राह्मण समुदाय का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।
रिपोर्ट में 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार द्वारा उम्र, जाति और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिशों का भी जिक्र किया गया है।
स्रोत: indiatimes.com



